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प्रशिक्षण में पहुंची मात्र आठ महिला प्रधान और बीस सदस्य
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कछवां। मझवां विकास खंड सभागार में महिला सशक्तिकरण पर महिला ग्राम प्रधानों के प्रशिक्षण में ऐसे ग्राम प्रधानों के बजाए उनके पति या फिर बेटों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। ब्लाक सभागार में बुधवार को तीन विकास खंडो में मझवां, सिटी और सीखड़ विकास खंड से महिला ग्राम प्रधानों को आमंत्रित कर प्रशिक्षण में उन्हें आत्म निर्भर बनाया जाना था।
प्रशिक्षण में मझवां, सिटी और सीखड़ विकास खंड में भले ही महिला ग्राम प्रधानों की संख्या कागजों पर भले ही कुछ हो पर आयोजित इस प्रशिक्षण में महज आठ महिला ग्राम प्रधान और बीस सदस्यों ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया। आयोजित इस प्रशिक्षण में महिला ग्राम प्रधानों के अलावा अधिकांश उनके पति या फिर बेटों ने भाग लिया।
महिला ग्राम प्रधानों की भागीदारी नाम मात्र रही। प्रशिक्षण में यदि कुछ आई भी थीं तो वे मूकदर्शक सी बनी रही। किसी ने न तो कोई सवाल पूछा और न ही उन्हें कोई जबाब मिला। पंचायती राज विभाग के ऐसे प्रशिक्षण के नाम पर भले ही सरकार महिलाओं नाम पर आरक्षण प्रदानकर उन्हें आगे बढ़ाना चाहती हो पर उनके पतियों या फिर बेटों के द्वारा कमान अपने हाथों में लेकर महिला आरक्षण की मंशा पर पानी फेर दिया जा रहा है। अधिकांश में महिला ग्राम प्रधान तो अधिकारियों के सामने कुछ बोलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाती। ब्लाक सभागार में आई कुछ महिला ग्राम प्रधानों को छोड़कर ज्यादातर चुपचाप सभागार में बैठी रहीं। जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ वे अपने घरों की ओर रवाना हो गई। प्रशिक्षण के दौरान बीडीओ अमीर राम व एडीओ पंचायत रविकांत ओझा, शांति देवी, राजकुमारी, प्रतिभा यादव, गीता देवी, रेखा देवी, कबूतरा देवी, लालती देवी, किरण, राधा देवी, नारंगी देवी, सरोजा व निहारिका उपस्थित रही।
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प्रशिक्षण में मझवां, सिटी और सीखड़ विकास खंड में भले ही महिला ग्राम प्रधानों की संख्या कागजों पर भले ही कुछ हो पर आयोजित इस प्रशिक्षण में महज आठ महिला ग्राम प्रधान और बीस सदस्यों ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया। आयोजित इस प्रशिक्षण में महिला ग्राम प्रधानों के अलावा अधिकांश उनके पति या फिर बेटों ने भाग लिया।
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महिला ग्राम प्रधानों की भागीदारी नाम मात्र रही। प्रशिक्षण में यदि कुछ आई भी थीं तो वे मूकदर्शक सी बनी रही। किसी ने न तो कोई सवाल पूछा और न ही उन्हें कोई जबाब मिला। पंचायती राज विभाग के ऐसे प्रशिक्षण के नाम पर भले ही सरकार महिलाओं नाम पर आरक्षण प्रदानकर उन्हें आगे बढ़ाना चाहती हो पर उनके पतियों या फिर बेटों के द्वारा कमान अपने हाथों में लेकर महिला आरक्षण की मंशा पर पानी फेर दिया जा रहा है। अधिकांश में महिला ग्राम प्रधान तो अधिकारियों के सामने कुछ बोलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाती। ब्लाक सभागार में आई कुछ महिला ग्राम प्रधानों को छोड़कर ज्यादातर चुपचाप सभागार में बैठी रहीं। जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ वे अपने घरों की ओर रवाना हो गई। प्रशिक्षण के दौरान बीडीओ अमीर राम व एडीओ पंचायत रविकांत ओझा, शांति देवी, राजकुमारी, प्रतिभा यादव, गीता देवी, रेखा देवी, कबूतरा देवी, लालती देवी, किरण, राधा देवी, नारंगी देवी, सरोजा व निहारिका उपस्थित रही।
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