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खनन से ट्रांसमिशन लाइन के टावरों को खतरा
Updated Mon, 07 Aug 2017 12:24 AM IST
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मड़िहान। देवरी पहाड़ियों पर दो ट्रांसमिशन टावरों के बीच पत्थर खनन से ट्रांसमिशन लाइन के टावरों को खतरा बढ़ गया है। शनिवार को छापेमारी के दौरान जिलाधिकारी विमल कुमार दुबे व मड़िहान एसडीएम सविता यादव बड़े तालाब देख कर हैरान रह गए। खान अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि मड़िहान में 14 लीज वैध हैं। लगभाग 70 एकड़ जमीन पर पत्थर निकालने की स्वीकृति दी गई है। देवरी पहाड़ी पर पांच सौ एकड़ में पत्थर माफिया ने कब्जा कर रखा है।
मड़िहान और आसपास के इलाके में पत्थर खनन में लिप्त माफियाओं का साम्राज्य फैला है।जिलाधिकारी के निर्देश पर लीज के लिए स्वीकृत जगह का सीमांकन कराया जा रहा है।शनिवार को अंधेरा होने से सीमांकन का कार्य अधूरा रह गया था।रविवार को भी नापी के लिए लेखपाल लगाये गए थे।सीमा से बाहर खनन करने के आरोप में दो लीज होल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद अभी और लोगों पर कार्यवाई की तरवार लटक रही है। हांलाकि मौके पर अवैध पत्थर खनन से कई सवाल खड़ा हो गए हैं।संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों व पुलिस के संरक्षण में देवरी की पहाड़ियों पर इतना अवैध खनन कैसे हुआ इसकी ठीक से जांच कराने की जरूरत है।बगैर परमिट कैसे इतने बड़े पहाड़ के पत्थरों की ढुलाई की गई।जिले में खान अधिकारी को कानो कान खबर क्यों नही लगी।किसी भी विभाग के कर्मचारियों ने अधिकारियो को क्यों नहीं रिपोर्ट भेजी।कर्मचारियों पर कौन दबाव डाल रहा था।पत्थर माफिया किसके इशारे पर सरकार को करोड़ो का चूना लगाया ये सब प्रश्न अब आम लोगों के मन में उठ रहे हैं।गत वर्ष 24 जून को पहाड़ में ब्लास्ट करते समय तीन लोगों की मौत हो गई थी व कई लोग घायल हो गए थे।पांच लोगों के खिलाफ मड़िहान थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।दो महीने तक उथल पुथल रहा।शासन प्रशासन के लोगों ने फिर आंख बंद कर लिया।इस बार भी चर्चा है कि अधिकारियों की चुस्ती दिनों के लिए रहेगी, फिर शांत हो जाएगी। वर्ष 2007/08 में होली के त्यौहार पर घर जाने की तैयारी में मजदूरों का सामान समेत दर्जनों मड़हे छप्पर बारूद से जलकर खाख हो गए थे।तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर इतिश्री कर ली गई। इतनी बड़ी घटना के बावजूद क्यों नही चेता प्रशासन। शासन प्रशासन के लोग मूकदर्शक बने रहते हैं। जांच हुई तो सच्चाई सामने होगी।
मड़िहान और आसपास के इलाके में पत्थर खनन में लिप्त माफियाओं का साम्राज्य फैला है।जिलाधिकारी के निर्देश पर लीज के लिए स्वीकृत जगह का सीमांकन कराया जा रहा है।शनिवार को अंधेरा होने से सीमांकन का कार्य अधूरा रह गया था।रविवार को भी नापी के लिए लेखपाल लगाये गए थे।सीमा से बाहर खनन करने के आरोप में दो लीज होल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद अभी और लोगों पर कार्यवाई की तरवार लटक रही है। हांलाकि मौके पर अवैध पत्थर खनन से कई सवाल खड़ा हो गए हैं।संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों व पुलिस के संरक्षण में देवरी की पहाड़ियों पर इतना अवैध खनन कैसे हुआ इसकी ठीक से जांच कराने की जरूरत है।बगैर परमिट कैसे इतने बड़े पहाड़ के पत्थरों की ढुलाई की गई।जिले में खान अधिकारी को कानो कान खबर क्यों नही लगी।किसी भी विभाग के कर्मचारियों ने अधिकारियो को क्यों नहीं रिपोर्ट भेजी।कर्मचारियों पर कौन दबाव डाल रहा था।पत्थर माफिया किसके इशारे पर सरकार को करोड़ो का चूना लगाया ये सब प्रश्न अब आम लोगों के मन में उठ रहे हैं।गत वर्ष 24 जून को पहाड़ में ब्लास्ट करते समय तीन लोगों की मौत हो गई थी व कई लोग घायल हो गए थे।पांच लोगों के खिलाफ मड़िहान थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।दो महीने तक उथल पुथल रहा।शासन प्रशासन के लोगों ने फिर आंख बंद कर लिया।इस बार भी चर्चा है कि अधिकारियों की चुस्ती दिनों के लिए रहेगी, फिर शांत हो जाएगी। वर्ष 2007/08 में होली के त्यौहार पर घर जाने की तैयारी में मजदूरों का सामान समेत दर्जनों मड़हे छप्पर बारूद से जलकर खाख हो गए थे।तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर इतिश्री कर ली गई। इतनी बड़ी घटना के बावजूद क्यों नही चेता प्रशासन। शासन प्रशासन के लोग मूकदर्शक बने रहते हैं। जांच हुई तो सच्चाई सामने होगी।
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