{"_id":"5c588926bdec227396044f64","slug":"111549306150-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान
विज्ञापन
मिर्जापुर। जिले में सोमवार को मौनी अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने मौन होकर गंगा में स्नान किया। अधिकांश गंगा तटों पर भोर से ही स्नान करने का सिलसिला शुरू हो गया था। गंगा घाटों पर भोर से सुबह के नौ बजे तक स्नान करने वालों की भीड़ लगी थी। स्नान करने का सिलसिला दोपहर 12 बजे तक चलता रहा। शहर के घाट एवं विंध्याचल को लेकर करीब ढाई लाख लोगों के स्नान करने एवं विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन करने का अनुुमान है।
नगर के बरियाघाट, नारघाट और पक्का घाट पर स्नान करने वालों की संख्या अधिक रही। बरियाघाट और नारघाट में पार्किंग की सुविधा के चलते वाहनों से आने वाले श्रद्धालु इन्हीं घाटों पर आए। सुबह के 10 बजे तक इन घाटों पर जबरदस्त भीड़ रही। घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी आए थे। बरियाघाट में पुरुष वाले घाट पर भी काफी भीड़ रही।
नगर के गंगा घाटों पर मेला लगा रहा। इस मेले में खानेपीने के सामान से लेकर घर-गृहस्थी तक के सामान की दुकानें सजी थीं। कई ठेलों पर जलेबी और समोसा के साथ चने और आलू की बनी घुघनी भी बिकती रही। छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक ने मेले में आनंद उठाया। इसी के साथ खिलौनों की दुकानें और गुब्बारों की दुकानें भी सजी थीं। नहाने के बाद जब बच्चे अपने माता-पिता के साथ घर को लौटने लगे तो उन्होंने इन दुकानों से अपने मनपसंद की चीजें खरीदीं। साथ ही महिलाओं ने भी अपनी गृहस्थी के लिए चम्मच, करछुल, लोटा और कड़ाही जैसे सामानों की खरीद की। दिनभर पूरे नगर में चहल-पहल रही। लोग दूर-दूर से गंगा स्नान के लिए आते रहे।
विज्ञापन
विंध्यधाम में उमड़े हजारों दर्शनार्थी
विंध्याचल। माघ मास की सोमवती अमावस्या पर हजारों दर्शनार्थियों ने मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया। आदि शक्ति मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में सोमवार को माघ मास के सोमवती अमावस्या पर दर्शन पूजन करने के लिए दूरदराज से आए आस्थावानों ने बड़े ही श्रद्धाभाव से सिर झुकाया। भोर में मंगला आरती के बाद से मंदिर में माता के भव्य स्वरूप का दर्शन पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया था। जो देर शाम तक जारी रहा। कुंभ स्नान के बाद लोगों के विंध्याचल पहुंचने का सिलसिला चलता रहा।
गंगा स्नान के बाद विंध्य दरबार में पहुंचे नरनारियों ने विधिवत दर्शन पूजन कर मंगल कामना की। घंटा-घड़ियाल शंख और पहाड़ा वाली के जयकारे से पूरा वातावरण देवीमय हो रहा था। नारियल, चुनरी, माला-फूल के साथ प्रसाद चढ़ाकर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने मां का दर्शन पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह भक्त गंगा स्नान करने के बाद देवी धाम पहुंचे, जहां मां का गुड़हल और गुलाब पुष्पों सहित रजतमणि आभूषणों से किए गए शृंगार के साथ मां का दर्शन पाकर भाव विभोर उठे। देवी धाम पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में जाकर दर्शन पूजन किया। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने हवन कुंड की परिक्रमा की। इसी क्रम में भक्तों ने मंदिर में विराजमान महाकाली, मां दुर्गा, पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती देवी, मां शीतला, महालक्ष्मी, दक्षिण मुखी हनुमान, राधाकृष्ण, अन्न्पूर्णा देवी, बटुक भैरव सहित अन्य मंदिरों में जाकर शीश नवाया। भक्तों ने पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजा देवी दरबार में जाकर पूजन अर्चन कर मंगल कामना की। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने विंघ्य धाम की गलियों में सजी दुकानों पर जाकर खरीदारी की। देवी दरबार में आस्थावानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस के जवान के साथ श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानू पाठक, मंदिर सुरक्षा व्यवस्था प्रभारी राघवेंद्र सिंह भक्तों की सेवा में तत्पर रहे।
शीतला धाम में 25 हजार लोगों ने लगाई हाजिरी
सीखड़। क्षेत्र के आराजी लाइन, सुल्तानपुर, अदलपुरा शीतला धाम में मौनी अमावस्या पर करीब 25 हजार भक्तों ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। मां शीतला धाम में सीखड़ ब्लाक के अलावा वाराणसी, भदोही, जौनपुर, सोनभद्र, गाजीपुर जैसे दूरदराज से दर्शनार्थी आते हैं। मौनी अमावस्या अवसर पर तीन बजे भोर से ही मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। मां के भक्त भोर में ही गंगा में डुबकी लगाने के बाद मां को भोग लगाने के लिए करहिया चढ़ाकर हलुआ पूड़ी गुलगुले बनाकर मां के दर्शन के लिए लाइन में लग गए। मां का जयकारे लगाते हुए मां के दर्शन को लोग आतुर थे। जयकारे से वातावरण देविमय हो गया।
बरैनी घाट पर स्नार्थीयों ने लगाई आस्था की डुबकी
कछवां । क्षेत्र के बरैनी घाट पर मौनी अमावस्या पर महास्नान के लिए क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु बरैनी घाट पहुंचे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद ईश्वर को याद किया और दान दिया। महास्नान को लेकर प्रशासन ने गंगा घाटों पर कोई भी व्यापक तैयारी नहीं की थीं। बरैनी घाट से बरैनी डोमवा घाट तक न तो घाटों की सफाई की गई थी न ही सुरक्षा की दृष्टि से घाट किनारे बैरिकेडिंग भी नही की गई थी। गंगा दशहरा पर्व पर गंगा स्नान करने आए बजहा और कछवां डीह के दस बच्चे गंगा में एक साथ डुब रहे थे इसके बावजूद गंगा किनारे प्रसाशन या ग्राम सभा की तरफ से कोई भी सुविधा गंगा स्नार्थीयों के लिए नहीं थी। महास्नान के पर्व पर गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए कछवां क्षेत्र के सैकडों गांव से लोग बरैनी आए थे।
विज्ञापन
नगर के बरियाघाट, नारघाट और पक्का घाट पर स्नान करने वालों की संख्या अधिक रही। बरियाघाट और नारघाट में पार्किंग की सुविधा के चलते वाहनों से आने वाले श्रद्धालु इन्हीं घाटों पर आए। सुबह के 10 बजे तक इन घाटों पर जबरदस्त भीड़ रही। घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी आए थे। बरियाघाट में पुरुष वाले घाट पर भी काफी भीड़ रही।
विज्ञापन
नगर के गंगा घाटों पर मेला लगा रहा। इस मेले में खानेपीने के सामान से लेकर घर-गृहस्थी तक के सामान की दुकानें सजी थीं। कई ठेलों पर जलेबी और समोसा के साथ चने और आलू की बनी घुघनी भी बिकती रही। छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक ने मेले में आनंद उठाया। इसी के साथ खिलौनों की दुकानें और गुब्बारों की दुकानें भी सजी थीं। नहाने के बाद जब बच्चे अपने माता-पिता के साथ घर को लौटने लगे तो उन्होंने इन दुकानों से अपने मनपसंद की चीजें खरीदीं। साथ ही महिलाओं ने भी अपनी गृहस्थी के लिए चम्मच, करछुल, लोटा और कड़ाही जैसे सामानों की खरीद की। दिनभर पूरे नगर में चहल-पहल रही। लोग दूर-दूर से गंगा स्नान के लिए आते रहे।
विज्ञापन
विंध्यधाम में उमड़े हजारों दर्शनार्थी
विंध्याचल। माघ मास की सोमवती अमावस्या पर हजारों दर्शनार्थियों ने मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया। आदि शक्ति मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में सोमवार को माघ मास के सोमवती अमावस्या पर दर्शन पूजन करने के लिए दूरदराज से आए आस्थावानों ने बड़े ही श्रद्धाभाव से सिर झुकाया। भोर में मंगला आरती के बाद से मंदिर में माता के भव्य स्वरूप का दर्शन पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया था। जो देर शाम तक जारी रहा। कुंभ स्नान के बाद लोगों के विंध्याचल पहुंचने का सिलसिला चलता रहा।
गंगा स्नान के बाद विंध्य दरबार में पहुंचे नरनारियों ने विधिवत दर्शन पूजन कर मंगल कामना की। घंटा-घड़ियाल शंख और पहाड़ा वाली के जयकारे से पूरा वातावरण देवीमय हो रहा था। नारियल, चुनरी, माला-फूल के साथ प्रसाद चढ़ाकर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने मां का दर्शन पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह भक्त गंगा स्नान करने के बाद देवी धाम पहुंचे, जहां मां का गुड़हल और गुलाब पुष्पों सहित रजतमणि आभूषणों से किए गए शृंगार के साथ मां का दर्शन पाकर भाव विभोर उठे। देवी धाम पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में जाकर दर्शन पूजन किया। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने हवन कुंड की परिक्रमा की। इसी क्रम में भक्तों ने मंदिर में विराजमान महाकाली, मां दुर्गा, पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती देवी, मां शीतला, महालक्ष्मी, दक्षिण मुखी हनुमान, राधाकृष्ण, अन्न्पूर्णा देवी, बटुक भैरव सहित अन्य मंदिरों में जाकर शीश नवाया। भक्तों ने पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजा देवी दरबार में जाकर पूजन अर्चन कर मंगल कामना की। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने विंघ्य धाम की गलियों में सजी दुकानों पर जाकर खरीदारी की। देवी दरबार में आस्थावानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस के जवान के साथ श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानू पाठक, मंदिर सुरक्षा व्यवस्था प्रभारी राघवेंद्र सिंह भक्तों की सेवा में तत्पर रहे।
शीतला धाम में 25 हजार लोगों ने लगाई हाजिरी
सीखड़। क्षेत्र के आराजी लाइन, सुल्तानपुर, अदलपुरा शीतला धाम में मौनी अमावस्या पर करीब 25 हजार भक्तों ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। मां शीतला धाम में सीखड़ ब्लाक के अलावा वाराणसी, भदोही, जौनपुर, सोनभद्र, गाजीपुर जैसे दूरदराज से दर्शनार्थी आते हैं। मौनी अमावस्या अवसर पर तीन बजे भोर से ही मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। मां के भक्त भोर में ही गंगा में डुबकी लगाने के बाद मां को भोग लगाने के लिए करहिया चढ़ाकर हलुआ पूड़ी गुलगुले बनाकर मां के दर्शन के लिए लाइन में लग गए। मां का जयकारे लगाते हुए मां के दर्शन को लोग आतुर थे। जयकारे से वातावरण देविमय हो गया।
बरैनी घाट पर स्नार्थीयों ने लगाई आस्था की डुबकी
कछवां । क्षेत्र के बरैनी घाट पर मौनी अमावस्या पर महास्नान के लिए क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु बरैनी घाट पहुंचे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद ईश्वर को याद किया और दान दिया। महास्नान को लेकर प्रशासन ने गंगा घाटों पर कोई भी व्यापक तैयारी नहीं की थीं। बरैनी घाट से बरैनी डोमवा घाट तक न तो घाटों की सफाई की गई थी न ही सुरक्षा की दृष्टि से घाट किनारे बैरिकेडिंग भी नही की गई थी। गंगा दशहरा पर्व पर गंगा स्नान करने आए बजहा और कछवां डीह के दस बच्चे गंगा में एक साथ डुब रहे थे इसके बावजूद गंगा किनारे प्रसाशन या ग्राम सभा की तरफ से कोई भी सुविधा गंगा स्नार्थीयों के लिए नहीं थी। महास्नान के पर्व पर गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए कछवां क्षेत्र के सैकडों गांव से लोग बरैनी आए थे।