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जनसूचना के 1036 मामले लंबित
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Thu, 17 Nov 2016 12:27 AM IST
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पथरहिया स्थित आयुक्त कार्यालय सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक करते सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव।
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जन सूचना के माध्यम से लोगों के समस्याओं के निस्तारण की नवीन स्थिति की जानकारी होती है। जन सूचना आमजन की समस्याओं के निस्तारण का एक सशक्त माध्यम है। आयोग की सक्रियता से लोगों की समस्याओं के निस्तारण में तेजी आई है, बावजूद इसके अभी भी मिर्जापुर जिले में 1036 मामले लंबित हैं। जिलो में बीडीओ, एडीओ आदि समस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बरत रहे हैं। यह बात सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने बुधवार को आयुक्त कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि सूचना अधिकार को और अधिक सार्थक बनाना है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आम जन को सशक्त बनाता है। इससे लोगों को सरकारी विभागों में होने वाले कामों की जानकारी आसानी से मिल जाती है। जन सूचना अधिकारी को सुस्पष्ट जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि सूचना अधिकारी को 30 दिन के अंदर सूचना की धनराशि को बताना होगा, 31 वें दिन उनको नि:शुल्क अभिलेखों की सत्यापित प्रतिलिपि लेनी होगी।
सूचना नहीं देने पर 250 रुपये प्रतिदिन अथवा अधिकतम 25 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। इसमें संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। प्रत्येक नागरिक कर का भुगतान कर जानकारी प्राप्त कर सकता है कि उसके द्वारा कर के रूप में दी गई राशि का उपयोग कैसे किया जा रहा है। नागरिक को सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार देता है और इसमें टिप्पणियां, सारांश अथवा दस्तावेजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों या सामग्री के प्रमाणित नमूनों की मांग की जा सकती है।
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आरटीआई अधिनियम एक लोक प्राधिकरण द्वारा धारित सूचना तक पहुंच का अधिकार प्रदान करता है। इसके लिए विंध्याचल मंडल के जनसूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान मंडलायुक्त रंजन कुमार, डीआईजी रतन कुमार, अपर आयुक्त व सीडीओ अमित कुमार सिंह, सूचना निदेशक विनोद पांडेय मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि सूचना अधिकार को और अधिक सार्थक बनाना है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आम जन को सशक्त बनाता है। इससे लोगों को सरकारी विभागों में होने वाले कामों की जानकारी आसानी से मिल जाती है। जन सूचना अधिकारी को सुस्पष्ट जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि सूचना अधिकारी को 30 दिन के अंदर सूचना की धनराशि को बताना होगा, 31 वें दिन उनको नि:शुल्क अभिलेखों की सत्यापित प्रतिलिपि लेनी होगी।
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सूचना नहीं देने पर 250 रुपये प्रतिदिन अथवा अधिकतम 25 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। इसमें संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। प्रत्येक नागरिक कर का भुगतान कर जानकारी प्राप्त कर सकता है कि उसके द्वारा कर के रूप में दी गई राशि का उपयोग कैसे किया जा रहा है। नागरिक को सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार देता है और इसमें टिप्पणियां, सारांश अथवा दस्तावेजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों या सामग्री के प्रमाणित नमूनों की मांग की जा सकती है।
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आरटीआई अधिनियम एक लोक प्राधिकरण द्वारा धारित सूचना तक पहुंच का अधिकार प्रदान करता है। इसके लिए विंध्याचल मंडल के जनसूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान मंडलायुक्त रंजन कुमार, डीआईजी रतन कुमार, अपर आयुक्त व सीडीओ अमित कुमार सिंह, सूचना निदेशक विनोद पांडेय मौजूद रहे।