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पानी में बेमानी: 'मिनरल' धंधा है, पर पानी गंदा है
वैशाली/सौरभ पांडेय
Updated Fri, 22 Mar 2013 01:24 PM IST
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विश्व जल दिवस पर भले ही पानी बचाने के सैकड़ों उपाय सुझाए जा रहे हों, मगर गाजियाबाद की वसुंधरा, वैशाली, इंदिरापुरम, कौशांबी सहित हिंडन पार की ज्यादातर कालोनियों के लोगों के पास पीने को पानी तक नहीं है। लोग जार में भरा पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि सबमर्सिबल के पानी को ही फिल्टर्ड वाटर बताकर 25 से 30 रुपये में बेचा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि लाखों रुपये के इस काले कारोबार की भनक प्रशासन को नहीं है, लेकिन अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। पानी के अवैध कारोबार की सच्चाई बयां करती अमर उजाला की रिपोर्ट।
सीन-1 विक्रम एक्कलेव
यहां सबमर्सिल से निकले पाइप से जार भरे जा रहे थे। पूछने पर बताया गया है कि पानी पूरी तरह साफ है। 20 रुपये जार के हिसाब से मिलेगा, चाहिए तो पता लिखवा दो पहुंच जाएगा। पानी स्टोर के लिए दो बड़ी टंकियां भी रखी थी। कर्मचारी ने बताया कि लाइट नहीं होने पर इन्हीं टैंकियों से पानी की सप्लाई की जाती है।
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सीन-2 गरिमा गार्डन
मुख्य मार्ग पर पानी के जार से भरी ठेली खड़ी थी। अंदर गली में लगे सबमर्सिबल से पानी भरा जा रहा था और जार पर ढक्कर चढ़ाए जा रहे थे। सील न लगने पर बताया कि पानी वैसे ही लोगों को नहीं मिल रहा तो अब सील का क्या काम। पानी साफ है यह गारंटी है।
सीन-3 राजेंद्र नगर
पानी के जारों को गाड़ी में लोड किया जा रहा था। दुकान के अदर जाने से रोक दिया गया। कर्मचारी ने बताया कि अंदर पानी का प्लांट है, जबकि सामने ही लगे सबमर्सिबल से पानी जार में भरा जा रहा था। बताया कि प्लांट का कनेक्शन जमीन के नीचे है। लाइसेंस के बारे में पूछा तो जाने को कहा।
सीन-4 लाजपत नगर
ऊपर लगे टैंक से पानी के जारों में पानी भरा जा रहा था। पाइप पर चारों ओर गंदगी लगी थी। पानी गंदा होने की शिकायत कर्मचारी से की गई तो उसने कहा कि वसुंधरा, वैशाली में उनके ही इलाके से सप्लाई होती है। कोई कमी नहीं है। सील न होने पर कहा कि 25 रुपये में पानी दें या सील लगाएं।
गाजियाबाद के आसपास ये आरओ प्लांट कुकुरमुत्ते की तरह फैले हैं। प्लांट के पानी के सैंपल लचर व्यवस्था में भी अधिकतर पास ही होते हैं। मजे की बात यह है कि इस पानी के टेस्टिंग का कोई इंतजाम नहीं है। वैसे तो लैब में रासायनिक और जीवाणु परीक्षण तो होता है, पर नाम के लिए। यहां बस पानी में हार्डनेस और पानी की क्वालिटी चेक करते हैं। पीएच वैल्यू, टीडीएस आदि को चेक करने की कोई जरूरत नहीं समझी जाती।
इनकी सुनिए
फूड इंस्पेक्टर राजीव शर्मा ने बताया कि गाजियाबाद के आसपास जितनी भी जगह पानी के प्लांट हैं वह सभी लाइसेंस से चल रहे हैं। अगर कहीं सीधे सबमर्सिबल से पानी भरा जा रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। तुरंत कार्रवाई कर एफआईआर कराई जाएगी।
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हैरानी की बात तो यह है कि सबमर्सिबल के पानी को ही फिल्टर्ड वाटर बताकर 25 से 30 रुपये में बेचा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि लाखों रुपये के इस काले कारोबार की भनक प्रशासन को नहीं है, लेकिन अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। पानी के अवैध कारोबार की सच्चाई बयां करती अमर उजाला की रिपोर्ट।
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सीन-1 विक्रम एक्कलेव
यहां सबमर्सिल से निकले पाइप से जार भरे जा रहे थे। पूछने पर बताया गया है कि पानी पूरी तरह साफ है। 20 रुपये जार के हिसाब से मिलेगा, चाहिए तो पता लिखवा दो पहुंच जाएगा। पानी स्टोर के लिए दो बड़ी टंकियां भी रखी थी। कर्मचारी ने बताया कि लाइट नहीं होने पर इन्हीं टैंकियों से पानी की सप्लाई की जाती है।
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सीन-2 गरिमा गार्डन
मुख्य मार्ग पर पानी के जार से भरी ठेली खड़ी थी। अंदर गली में लगे सबमर्सिबल से पानी भरा जा रहा था और जार पर ढक्कर चढ़ाए जा रहे थे। सील न लगने पर बताया कि पानी वैसे ही लोगों को नहीं मिल रहा तो अब सील का क्या काम। पानी साफ है यह गारंटी है।
सीन-3 राजेंद्र नगर
पानी के जारों को गाड़ी में लोड किया जा रहा था। दुकान के अदर जाने से रोक दिया गया। कर्मचारी ने बताया कि अंदर पानी का प्लांट है, जबकि सामने ही लगे सबमर्सिबल से पानी जार में भरा जा रहा था। बताया कि प्लांट का कनेक्शन जमीन के नीचे है। लाइसेंस के बारे में पूछा तो जाने को कहा।
सीन-4 लाजपत नगर
ऊपर लगे टैंक से पानी के जारों में पानी भरा जा रहा था। पाइप पर चारों ओर गंदगी लगी थी। पानी गंदा होने की शिकायत कर्मचारी से की गई तो उसने कहा कि वसुंधरा, वैशाली में उनके ही इलाके से सप्लाई होती है। कोई कमी नहीं है। सील न होने पर कहा कि 25 रुपये में पानी दें या सील लगाएं।
गाजियाबाद के आसपास ये आरओ प्लांट कुकुरमुत्ते की तरह फैले हैं। प्लांट के पानी के सैंपल लचर व्यवस्था में भी अधिकतर पास ही होते हैं। मजे की बात यह है कि इस पानी के टेस्टिंग का कोई इंतजाम नहीं है। वैसे तो लैब में रासायनिक और जीवाणु परीक्षण तो होता है, पर नाम के लिए। यहां बस पानी में हार्डनेस और पानी की क्वालिटी चेक करते हैं। पीएच वैल्यू, टीडीएस आदि को चेक करने की कोई जरूरत नहीं समझी जाती।
इनकी सुनिए
फूड इंस्पेक्टर राजीव शर्मा ने बताया कि गाजियाबाद के आसपास जितनी भी जगह पानी के प्लांट हैं वह सभी लाइसेंस से चल रहे हैं। अगर कहीं सीधे सबमर्सिबल से पानी भरा जा रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। तुरंत कार्रवाई कर एफआईआर कराई जाएगी।