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विश्व स्तनपान सप्ताह: तीसरी लहर से रखना है महफूज, तो बच्चों को पिलाएं मां का दूध

Mon, 02 Aug 2021 03:22 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 02 Aug 2021 03:22 PM IST
सार

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय बताते हैं कि मां के दूध में जरूरी पोषक तत्व, एंटी बाडीज, हार्मोन, प्रतिरोधक कारक और ऐसे आक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो नवजात शिशु के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं।

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World Breastfeeding Week 2021: Breastfeeding babies can protect the baby from against third wave danger
विश्व स्तनपान सप्ताह - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कोरोना की संभावित तीसरी लहर का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ने की आशंका है। जो माताएं बच्चों को भरपूर स्तनपान कराती हैं, उन्हें बच्चों की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मां का दूध बच्चे को रोगों से लड़ने की ताकत देता है। कोरोना ही नहीं बल्कि कई अन्य संक्रामक बीमारियों से भी बच्चे को पूरी तरह से महफूज रखता है। इसलिए स्तनपान के फायदे को जानना हर महिला के लिए बहुत जरूरी है। इसके प्रति जागरूकता के लिए ही हर साल एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है।

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स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए ही इस साल इस सप्ताह की थीम है ‘स्तनपान सुरक्षा की जिम्मेदारी, साझा जिम्मेदारी’ है। स्तनपान सप्ताह के दौरान मां के दूध के महत्व की जानकारी दी जाती है। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध अमृत के समान है।
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स्तनपान को बढ़ावा देकर शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। शिशुओं को जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने के लिए महिलाओं को इस सप्ताह के दौरान विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाता है। स्तनपान की सही जानकारी न होने के कारण बच्चों में कुपोषण का रोग एवं संक्रमण से दस्त हो जाते हैं। 

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मां का दूध जिन बच्चों को को नहीं मिलता, उनमें मधुमेह की बीमारी हो सकती है। बुद्धि का विकास कम होता है। अगर बच्चा समय से पूर्व जन्मा (प्रीमेच्योर) हो, तो उसे बड़ी आंत का घातक रोग हो सकता है। मां का दूध छह-आठ महीने तक बच्चे के लिए श्रेष्ठ ही नहीं, जीवन रक्षक भी होता है।

मां के दूध में होते हैं जरूरी पोषक तत्व
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय बताते हैं कि मां के दूध में जरूरी पोषक तत्व, एंटी बाडीज, हार्मोन, प्रतिरोधक कारक और ऐसे आक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो नवजात शिशु के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं।

छह माह तक केवल मां का  दूध पिलाएं 
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम सिरोही का कहना है कि मां के दूध में शिशु के लिए पौष्टिक तत्वों के साथ पर्याप्त पानी भी होता है। इसलिए छह माह तक शिशु को मां के दूध के अलावा कुछ भी न दें। दूध का बहाव अधिक रखने के लिए जरूरी है कि मां चिंता और तनाव से मुक्त रहे। कामकाजी  महिलाएं अपने स्तन से दूध निकालकर रखें।

कुपोषण की समस्या नहीं होती 
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अंजुम का कहना है कि शिशु को सही समय और पर्याप्त मात्रा में मां का दूध न मिल पाना भी कुपोषण की समस्या का एक प्रमुख कारण है। शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत, शिशु और 5 साल से कम आयु के बच्चों की मृत्यु के अनुपात को कम कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अमृत के समान है स्तनपान
महिला जिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा अग्रवाल का कहना है कि शिशु के लिए स्तनपान अमृत के समान है। मां का दूध शिशु को निमोनिया, डायरिया और कुपोषण के जोखिम से भी बचाता है।
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