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फोन नंबर डिलीट कर देहरादून में कंपनी से निकाला, चार दिन से भूखे-प्यासे रेलवे ट्रैक के किनारे महाराजगंज निकल पड़े मजदूर, बिजनौर में कराए क्वारंटीन

Tue, 28 Apr 2020 05:30 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 28 Apr 2020 05:30 PM IST
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workers were removed from the company without any money by deleting their phone number
धामपुर के मनभावन बैँक्वेट हाल में दुखड़ा बताते गैर जिलों से आए मजदूर - फोटो : amar ujala
उत्तरांखड के देहरादून में च्यवनप्रास बनाने वाली एक कंपनी में काम करने वाले मजदूूरों को लॉकडाउन लागू होने के बाद न तो मजदूरी दी और न ही आश्रय दिया। यहां तक कि उनके फोन लेकर कंपनी के अधिकारियों ने उनके सभी नंबरों को डिलीट कर दिया और कंपनी से निकाल दिया।
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मजदूर किसी तरह से रात में वहां से घर के लिए निकले। यूपी की पुलिस के प्रयास की सराहना करते हुए इन मजदूरों ने कहा कि रास्ते में पुलिस ने उनकी चेकिंग तो की। चेकिंग में पुलिस ने उन्हें यही कहा कि वह किसी तरह से ट्रक आदि पकड़ कर अपने घरों को निकल जाएं।
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ट्रक तो नहीं मिला। वह रेल की पटरी पटरी अपने गृह जनपद महाराजगंज जाने का प्रयास कर रहे थे तो धामपुर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मेडिकल परीक्षण कराकर उन्हें यहां आइसोलेट कर दिया।
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महराज गंज के लालपुरा निवासी करन चौरसिया, अनुज कुमार, अनिल कुमार, मनीष कुमार आदि ने बताया कि वह देहरादून में नौकरी करने पहले भी गए थे। वहां पर उन्हें प्रति मजदूर 15 हजार का वेतन मिल रहा था। उनका काम च्यवन प्रास की पैकिंग करने का था।

इस बार वह लॉकडाउन लागू होने के 10 दिन पहले ही देहरादून गए थे। लॉकडाउन होने से कंपनी बंद हो गई। कंपनी मालिक ने सभी मजूदरों को वहां से भगा दिया। उनकी मजदूरी भी नहीं दी। लॉकडाउन होने के कारण पुलिस ने उन्हें वहां से भागने नहीं दिया। वह जैसे-तैसे वहां रहे।

जब रोटी के लाले पड़ गए तो वह चार दिन पहले वहां से किसी तरह से निकले। रास्ते में पुलिस ने कई जगह चेकिंग की। लेकिन रास्ते में उन्हें कहीं पर रोटी नहीं मिली। उन्होंने नमकीन और बिस्किट से गुजारा किया। वे चार दिन तक भूखे रहे। जब धामपुर पुलिस ने पकड़ लिया और मेडिकल कराने के बाद यहां पर आइसोलेट किया तो उन्हें भरपेट भोजन मिला।

अब बढ़ कर संख्या हुई 44
धामपुर के मनभावन बैंक्वेट हाल में सोमवार को आइसोलेट लोगों की संख्या बढ़ कर 44 हो गई है। इनमें से एक महिला है। तीन मजदूर बिहार के मधुबनी निवासी अजय कुमार, राहुल व अरविंद कुुमार शामिल हैं। एक राजस्थान के भरतपुर निवासी पुष्पेंद्र कुमार शर्मा व दो उत्तराखंड निवासी मनीष थापा व अनुज मौर्य शामिल हैं।  

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