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विपदा में घिरे परिवार के लिए देवदूत बनीं महिलाएं
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विपदा में घिरे परिवार के लिए देवदूत बनीं महिलाएं
छपार (मुजफ्फरनगर)। लॉकडाउन के दौरान आर्थिक रूप से टूट चुके उत्तराखंड के परिवार के लिए महिलाएं देवदूत बनकर आगे आईं। परिवार के भूखे रहने की नौबत देख मकान मालिक ने किराया माफ कर दिया। रोजाना राशन एवं बीमार महिला की दवा भी उपलब्ध करा रही हैं।
गांव बरला में हाईवे पर स्थित एक मशहूर ढाबे पर उत्तराखंड के जनपद अल्मोड़ा के ग्राम चौसाला निवासी नवीन पांडे कारीगर है। वह अपनी पत्नी गीता व गंभीर बीमारी से पीड़ित अपनी मां मुन्नी देवी के साथ अमित त्यागी के मकान में किराये पर रहता है। लॉकडाउन के चलते ढाबा बंद है। कुछ दिन तो ढाबा मालिक ने खर्चा दिया, लेकिन फिर हाथ खड़े कर दिए। उसी मकान में उसका दूसरा साथी उत्तरकाशी के गांव फंडी निवासी राजू भी रहता है, उसका भी आर्थिक तंगी से बुरा हाल है। उनके पास खाने के लिए राशन व मां के इलाज के लिए पैसे नहीं बचे। तीन दिन भूखे रहने की स्थिति बन गई। मां बीमारी से कहराने लगी तो मकान मालिक अमित की पत्नी प्रियांशी सहयोग के लिए आगे आई। उनका मकान का किराया माफ कर दिया और खाने पीने का राशन भी दिया। पड़ोस की महिला मानशी त्यागी व इसरार की पत्नी शकीला भी उनकी मदद को पहुंच गईं। कारीगर की बीमार मां की दवा का खर्च भी तीनों महिलाएं वहन कर रही हैं। गांव के डाक्टर दिलशाद भी इस परिवार के सहयोग के लिए आगे आए हैं।
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छपार (मुजफ्फरनगर)। लॉकडाउन के दौरान आर्थिक रूप से टूट चुके उत्तराखंड के परिवार के लिए महिलाएं देवदूत बनकर आगे आईं। परिवार के भूखे रहने की नौबत देख मकान मालिक ने किराया माफ कर दिया। रोजाना राशन एवं बीमार महिला की दवा भी उपलब्ध करा रही हैं।
गांव बरला में हाईवे पर स्थित एक मशहूर ढाबे पर उत्तराखंड के जनपद अल्मोड़ा के ग्राम चौसाला निवासी नवीन पांडे कारीगर है। वह अपनी पत्नी गीता व गंभीर बीमारी से पीड़ित अपनी मां मुन्नी देवी के साथ अमित त्यागी के मकान में किराये पर रहता है। लॉकडाउन के चलते ढाबा बंद है। कुछ दिन तो ढाबा मालिक ने खर्चा दिया, लेकिन फिर हाथ खड़े कर दिए। उसी मकान में उसका दूसरा साथी उत्तरकाशी के गांव फंडी निवासी राजू भी रहता है, उसका भी आर्थिक तंगी से बुरा हाल है। उनके पास खाने के लिए राशन व मां के इलाज के लिए पैसे नहीं बचे। तीन दिन भूखे रहने की स्थिति बन गई। मां बीमारी से कहराने लगी तो मकान मालिक अमित की पत्नी प्रियांशी सहयोग के लिए आगे आई। उनका मकान का किराया माफ कर दिया और खाने पीने का राशन भी दिया। पड़ोस की महिला मानशी त्यागी व इसरार की पत्नी शकीला भी उनकी मदद को पहुंच गईं। कारीगर की बीमार मां की दवा का खर्च भी तीनों महिलाएं वहन कर रही हैं। गांव के डाक्टर दिलशाद भी इस परिवार के सहयोग के लिए आगे आए हैं।
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