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वेस्ट यूपी में फैला फर्जी मदरसों का जाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2016 01:40 AM IST
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फर्जी मदरसे का जाल
- फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी में फर्जी मदरसों का जाल फैल रहा है। एक ऑडियो टेप से यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। एक ऐसा ऑडियो अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के हाथ लगा है, जिसमें ऐसे मदरसे चलाने वाले दावा कर रहे हैं कि उनके कई जिलों में मदरसे हैं। उन पर मुकदमे हैं, पर किसी ने क्या बिगाड़ लिया? इस टेप को विभाग आईजी जोन को देगा, ताकि जांच कर इस काम को अंजाम देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
आधुनिक मदरसों के नाम पर जहां फर्जी 14 मदरसों के खिलाफ मेरठ में तो बागपत में 16 मदरसे फर्जी पाए जाने पर मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। ये सभी ऐसे मदरसे पाए गए जो केवल कागजों में थे और धरातल पर इनका कोई अस्तित्व नहीं था। न मौके पर भवन मिला, न अध्यापक और न ही बच्चे। मदरसे चलाने वाले अध्यापकों की तनख्वाह, बच्चों की छात्रवृत्ति तथा शुल्क प्रतिपूर्ति सभी को खुद ही ले रहे थे। उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एसएन पांडे ने इसकी जांच के बाद मेरठ में मुकदमे दर्ज कराए तो बागपत में डीएम ने एसडीएम के माध्यम से जांच कराकर सभी पर मुकदमे दर्ज कराए हैं।
करोड़ाें का है खेल
दरअसल ऐसे आधुनिक मदरसों में परास्नातक बीएड शिक्षक को 15 हजार जबकि स्नातक शिक्षक को आठ हजार रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। इसके अलावा कक्षा पांच तक के बच्चे को एक हजार रुपये सालाना छात्रवृत्ति मिलती है। कक्षा आठ तक के बच्चे को एक हजार रुपये छात्रवृत्ति के अलावा एक से चार हजार रुपये तक शुल्क प्रतिपूर्ति भी मिलती है। बागपत में ही इनसे 61 लाख तो इतनी ही रिकवरी मेरठ में करने की बात की जा रही है।
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ऑडियो टेप कर रही बड़े स्कैंडल का भंडाफोड़
उप निदेशक कार्यालय अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को फोन पर दो लोगों के बीच की गई बातचीत का एक ऑडियो टेप हाथ लगा है। इसमें फर्जी मदरसा चलाने के आरोपी सेवाराम तथा इश्तियाक के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
इसमें इश्तियाक चिंता जता रहा है कि अब जांच हो रही तो क्या होगा? इस पर सेवाराम आश्वस्त कर रहा है कि क्या फर्क पड़ता है। उस पर 16 मुकदमे हैं। पांच मुकदमे तो हत्या के ही हैं। फिर ऐसे मुकदमों से क्या फर्क पड़ता है। सेवाराम इश्तियाक की चिंता पर दिलासा दे रहा है कि बच्चा-बच्चा जानता है। सेवाराम मदरसे चलाता है। गाजियाबाद, बागपत, शामली, नोएडा आदि में इसी तरह से मदरसे चला रखे हैं। इश्तियाक ने चिंता जताई कि वह बिना वजह फंस रहा है।
उसने तो अपनी समिति के कागज की बस प्रति सेवाराम को दी तो सेवाराम ने फिर उसे आश्वस्त किया कि कोई साइन, कोई फोटो तो उसका नहीं लिया। बस कागज लिया और मदरसे चला दिए। इश्तियाक कह रहा है कि उसे लिखकर दे दे कि उनका इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। ऐसे में सेवाराम उसे लिखकर देने का भी आश्वासन दे रहा है।
आईजी को सौंपी जाएगी यह टेप
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग यह ऑडियो टेप आईजी जोन को सौंपेगा, ताकि यह पता चल सके कि वास्तव में यह टेप कब का है? और कहां-कहां ऐसे मदरसे हैं? यह वास्तविक है या नहीं? समिति के कागजों को सत्यापित किया जाएगा।
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आधुनिक मदरसों के नाम पर जहां फर्जी 14 मदरसों के खिलाफ मेरठ में तो बागपत में 16 मदरसे फर्जी पाए जाने पर मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। ये सभी ऐसे मदरसे पाए गए जो केवल कागजों में थे और धरातल पर इनका कोई अस्तित्व नहीं था। न मौके पर भवन मिला, न अध्यापक और न ही बच्चे। मदरसे चलाने वाले अध्यापकों की तनख्वाह, बच्चों की छात्रवृत्ति तथा शुल्क प्रतिपूर्ति सभी को खुद ही ले रहे थे। उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एसएन पांडे ने इसकी जांच के बाद मेरठ में मुकदमे दर्ज कराए तो बागपत में डीएम ने एसडीएम के माध्यम से जांच कराकर सभी पर मुकदमे दर्ज कराए हैं।
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करोड़ाें का है खेल
दरअसल ऐसे आधुनिक मदरसों में परास्नातक बीएड शिक्षक को 15 हजार जबकि स्नातक शिक्षक को आठ हजार रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। इसके अलावा कक्षा पांच तक के बच्चे को एक हजार रुपये सालाना छात्रवृत्ति मिलती है। कक्षा आठ तक के बच्चे को एक हजार रुपये छात्रवृत्ति के अलावा एक से चार हजार रुपये तक शुल्क प्रतिपूर्ति भी मिलती है। बागपत में ही इनसे 61 लाख तो इतनी ही रिकवरी मेरठ में करने की बात की जा रही है।
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ऑडियो टेप कर रही बड़े स्कैंडल का भंडाफोड़
उप निदेशक कार्यालय अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को फोन पर दो लोगों के बीच की गई बातचीत का एक ऑडियो टेप हाथ लगा है। इसमें फर्जी मदरसा चलाने के आरोपी सेवाराम तथा इश्तियाक के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
इसमें इश्तियाक चिंता जता रहा है कि अब जांच हो रही तो क्या होगा? इस पर सेवाराम आश्वस्त कर रहा है कि क्या फर्क पड़ता है। उस पर 16 मुकदमे हैं। पांच मुकदमे तो हत्या के ही हैं। फिर ऐसे मुकदमों से क्या फर्क पड़ता है। सेवाराम इश्तियाक की चिंता पर दिलासा दे रहा है कि बच्चा-बच्चा जानता है। सेवाराम मदरसे चलाता है। गाजियाबाद, बागपत, शामली, नोएडा आदि में इसी तरह से मदरसे चला रखे हैं। इश्तियाक ने चिंता जताई कि वह बिना वजह फंस रहा है।
उसने तो अपनी समिति के कागज की बस प्रति सेवाराम को दी तो सेवाराम ने फिर उसे आश्वस्त किया कि कोई साइन, कोई फोटो तो उसका नहीं लिया। बस कागज लिया और मदरसे चला दिए। इश्तियाक कह रहा है कि उसे लिखकर दे दे कि उनका इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। ऐसे में सेवाराम उसे लिखकर देने का भी आश्वासन दे रहा है।
आईजी को सौंपी जाएगी यह टेप
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग यह ऑडियो टेप आईजी जोन को सौंपेगा, ताकि यह पता चल सके कि वास्तव में यह टेप कब का है? और कहां-कहां ऐसे मदरसे हैं? यह वास्तविक है या नहीं? समिति के कागजों को सत्यापित किया जाएगा।