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पांच ब्लॉकों में तेजी से घटा जलस्तर, खरखौदा सबसे आगे
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मेरठ। भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिरने के कारण जिले के 12 ब्लॉकों में से पांच ब्लॉक खतरे में आ गए हैं। केंद्र सरकार ने इन पांच ब्लॉकों का चयन कर जल शक्ति अभियान में शामिल किया है। बृहस्पतिवार को मेरठ पहुंचे वाणिज्य मंत्रालय के उप सचिव आरएस वर्मा ने अधिकारियों के साथ विकास भवन में बैठक कर जल संरक्षण अभियान के बारे में विस्तार से बताया। जिले के खरखौदा, माछरा, मेरठ, परीक्षितगढ़ और रजपुरा में हालात ज्यादा खराब है। इन ब्लॉकों को डार्क जोन में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार के जल शक्ति अभियान में विशेष तौर पर 15 सितंबर तक अभियान चलाया जाएगा।
केंद्र सरकार की टीम ने पांचों ब्लाकों के बीडीओ से कहा कि सितंबर तक हमें प्वाइंट बनाकर कार्य करने हैं। जिससे इस गंभीर स्थिति को और गंभीर होने से रोका जा सके। इन बिन्दुओं में मुख्य तौर पर वर्षा के जल का संचयन, पौधरोपण, बॉडी एंड वॉटर शेड डेवलपमेंट, रियूज एंड बोरवेल डिस्चार्ज स्ट्रक्चर आदि शामिल हैं। अधिकारियों ने माछरा ब्लॉक के अल्लीपुर गांव का निरीक्षण किया। वहां पानी बचाने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी ली। तीन दिवसीय दौरे पर आए अधिकारी परीक्षितगढ़ का दौरा भी करेंगे।
पांच सालों में खरखौदा सबसे आगे
भूभर्ग विभाग के औसतन आकंड़ों के अनुसार, डार्क जोन में शामिल पांच ब्लॉकों में खरखौदा में जलस्तर तेजी से कम हुआ है। यहां पांच सालों में 3.18 मीटर जलस्तर गिरा है। वहीं, मवाना में सबसे कम 0.21 मीटर है। इसलिए इस ब्लॉक को डार्क जोन से बाहर रखा गया है।
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पांच सालों में इतना गिरा जलस्तर (मीटर में)
खरखौदा - 3.18
माछरा - 3.12
मेरठ - 1.39
परीक्षितगढ़ - 2.55
रजपुरा - 2.42
हस्तिनापुर - 0.83
दौराला - 0.49
जानीखुर्द - 0.31
मवाना - 0.21
रोहटा - 0.81
सरधना - 0.21
सरुरपुर - 0.33
ऐसे डार्क जोन घोषित हुए ब्लॉक
आठ मीटर से अधिक होने पर क्षेत्र को डार्क जोन में शामिल किया जाता है। छह मीटर तक के जलस्तर होने पर कोई समस्या नहीं होती है। छह से आठ मीटर तक जलस्तर होने पर भी स्थिति चिंताजनक होती है।
12 ब्लॉक का जलस्तर (मीटर में)
भूभर्ग विभाग के मुताबिक जल स्तर गिरने के बाद ब्लॉकों का जलस्तर भी बिगड़ गया है। इस डाटा को भी ब्लॉकवार जारी किया गया है। जिससे औसतन जलस्तर के बारे में पता चल सके।
खरखौदा - 19.24
माछरा - 14.03
मेरठ - 11.57
परीक्षितगढ़ - 9.42
रजपुरा - 20.36
सरुरपुर - 8.96
सरधना - 5.83
रोहटा - 10.82
मवाना - 8.71
जानीखुर्द - 7.14
हस्तिनापुर - 8.60
दौराला - 10.50
170 तालाबों का किया जा रहा जीर्णोंद्घार
प्रभारी सीडीओ ने बताया कि डार्क जोन को देखते हुए तालाबों का जीर्णोद्धार शुरू कर दिया गया है। जिससे बारिश के जल का संचयन किया जा सके। बारिश से पहले ही काफी काम पूरा कर लिया गया था। अब तालाबों के किनारे बैठने के लिए कुर्सी और पौधे लगाए जा रहे हैं।
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केंद्र सरकार की टीम ने पांचों ब्लाकों के बीडीओ से कहा कि सितंबर तक हमें प्वाइंट बनाकर कार्य करने हैं। जिससे इस गंभीर स्थिति को और गंभीर होने से रोका जा सके। इन बिन्दुओं में मुख्य तौर पर वर्षा के जल का संचयन, पौधरोपण, बॉडी एंड वॉटर शेड डेवलपमेंट, रियूज एंड बोरवेल डिस्चार्ज स्ट्रक्चर आदि शामिल हैं। अधिकारियों ने माछरा ब्लॉक के अल्लीपुर गांव का निरीक्षण किया। वहां पानी बचाने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी ली। तीन दिवसीय दौरे पर आए अधिकारी परीक्षितगढ़ का दौरा भी करेंगे।
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पांच सालों में खरखौदा सबसे आगे
भूभर्ग विभाग के औसतन आकंड़ों के अनुसार, डार्क जोन में शामिल पांच ब्लॉकों में खरखौदा में जलस्तर तेजी से कम हुआ है। यहां पांच सालों में 3.18 मीटर जलस्तर गिरा है। वहीं, मवाना में सबसे कम 0.21 मीटर है। इसलिए इस ब्लॉक को डार्क जोन से बाहर रखा गया है।
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पांच सालों में इतना गिरा जलस्तर (मीटर में)
खरखौदा - 3.18
माछरा - 3.12
मेरठ - 1.39
परीक्षितगढ़ - 2.55
रजपुरा - 2.42
हस्तिनापुर - 0.83
दौराला - 0.49
जानीखुर्द - 0.31
मवाना - 0.21
रोहटा - 0.81
सरधना - 0.21
सरुरपुर - 0.33
ऐसे डार्क जोन घोषित हुए ब्लॉक
आठ मीटर से अधिक होने पर क्षेत्र को डार्क जोन में शामिल किया जाता है। छह मीटर तक के जलस्तर होने पर कोई समस्या नहीं होती है। छह से आठ मीटर तक जलस्तर होने पर भी स्थिति चिंताजनक होती है।
12 ब्लॉक का जलस्तर (मीटर में)
भूभर्ग विभाग के मुताबिक जल स्तर गिरने के बाद ब्लॉकों का जलस्तर भी बिगड़ गया है। इस डाटा को भी ब्लॉकवार जारी किया गया है। जिससे औसतन जलस्तर के बारे में पता चल सके।
खरखौदा - 19.24
माछरा - 14.03
मेरठ - 11.57
परीक्षितगढ़ - 9.42
रजपुरा - 20.36
सरुरपुर - 8.96
सरधना - 5.83
रोहटा - 10.82
मवाना - 8.71
जानीखुर्द - 7.14
हस्तिनापुर - 8.60
दौराला - 10.50
170 तालाबों का किया जा रहा जीर्णोंद्घार
प्रभारी सीडीओ ने बताया कि डार्क जोन को देखते हुए तालाबों का जीर्णोद्धार शुरू कर दिया गया है। जिससे बारिश के जल का संचयन किया जा सके। बारिश से पहले ही काफी काम पूरा कर लिया गया था। अब तालाबों के किनारे बैठने के लिए कुर्सी और पौधे लगाए जा रहे हैं।