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Meerut News: बलिदान नायक जनेश्वर कुमार के अंतिम दर्शन को उमड़े ग्रामीण

Fri, 17 Jul 2026 09:37 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 09:37 PM IST
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Villagers thronged to pay their last respects to the martyred hero Janeshwar Kumar.
- रछौती गांव में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
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- भारत माता की जय के गगनभेदी नारो से गूंजा आसमान
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
माछरा। रछौती गांव में शुक्रवार को उस समय माहौल अत्यंत गमगीन और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गया जब कुमाऊं रेजिमेंट की 11वीं बटालियन के वीर जवान बलिदान नायक जनेश्वर कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास पर पहुंचा। हिमाचल प्रदेश के समीप एक सैन्य वाहन दुर्घटना में करीब 18 दिनों पहले गंभीर रूप से घायल होने के बाद मिलिट्री अस्पताल में उपचाराधीन जनेश्वर कुमार ने बीते बुधवार को अंतिम सांस ली। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर सैन्य वाहन में गांव पहुंचा, तो उमड़े ग्रामीणों ने मोटरसाइकिल जुलूस निकालकर गगनभेदी भारत माता की जय के नारों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

वीर जवान का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान पर पहुंचा, वहां का दृश्य अत्यंत भावुक और हृदयविदारक हो गया। बलिदान जनेश्वर की पत्नी नीतू, वयोवृद्ध मां कृष्णा देवी और बहन सरिता पार्थिव शरीर से लिपट कर बिलख पड़े। परिजनों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था, जिन्हें सगे संबंधियों ने किसी तरह संभाला। वही वीर सपूत को खोने का गम पूरे गांव की आंखों से आंसुओं के रूप में छलक रहा था।
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अंतिम संस्कार से पहले बलिदान नायक जनेश्वर को सेना के अधिकारियों में सूबेदार राम रतन, नायब सूबेदार सचिन कुमार, सतीश कुमार तथा पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी, अमित कसाना फौजी, देवेंद्र गुर्जर, राजकुमार भड़ाना, अभिषेक भाटी, बबलू फौजी आदि ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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इस दौरान पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी ने कहा कि जनेश्वर कुमार का परिवार राष्ट्र सेवा की मिसाल है। तीन भाइयों में मंझले जनेश्वर जहां देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गए, वहीं उनका छोटा भाई प्रदीप उर्फ मोनू भी इस समय भारतीय सेना में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहा है।
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बड़े बेटे हिमांशु ने रोते हुए दी मुखाग्नि
-अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच वह क्षण सबसे ज्यादा भावुक करने था, जब बड़े बेटे हिमांशु ने रोते हुए अपने वीर पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। अपने पिता को इस विदा करते देख वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम थीं। शहीद अपने पीछे पत्नी नीतू, बड़े बेटे हिमांशु उर्फ चीनू, बेटी मन्नो, छोटे बेटे चीकू को छोड़ गए हैं।
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जुलूस के साथ सैन्य वाहन की अगवानी
- बलिदान जनेश्वर कुमार के पार्थिव शरीर को लेकर आ रहे सैन्य वाहन की अगवानी के लिए सुबह से ही ग्रामीणों की भीड़ लगी थी। सैन्य वाहन गांव में दाखिल हुआ, युवाओं का विशाल हुजूम मोटरसाइकिल से उसके पीछे-पीछे चलने लगा। हवा में लहराते तिरंगे और भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारे तथा जब तक सूरज चांद रहेगा जनेश्वर तेरा नाम रहेगा के गगनभेदी नारों से रछौती गांव गुंजायमान हो उठा।


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गार्ड ऑफ ऑनर और तीन राउंड हवाई फायरिंग
- गांव में अंतिम दर्शन के उपरांत पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ गांव के श्मशान घाट ले जाया गया। सेना की टुकड़ी ने पहले जांबाज साथी को शस्त्र झुकाकर और तीन राउंड फायरिंग करके शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

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