{"_id":"67ddcb267dfa6b20540bb5d1","slug":"uproar-over-preventing-qari-shafiqur-rahman-from-delivering-speech-at-ma-masjid-meerut-news-c-14-1-mrt1001-812679-2025-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: मा मस्जिद में कारी शफीकुर्रहमान को तकरीर करने से रोकने पर हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: मा मस्जिद में कारी शफीकुर्रहमान को तकरीर करने से रोकने पर हंगामा
विज्ञापन
जामा मस्जिद में कारी शफीकुर्रहमान को तकरीर करने से रोका, हंगामा
मेरठ। शहर काजी के लिए चला आ रहा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। जुमे की नमाज में के बाद जामा मस्जिद में कारी शफीकुर्रहमान कासमी को तकरीर नहीं करने दी गई। उन्हें माइक नहीं दिया गया। इस दौरान उनके विरोध में काफी देर हंगामा भी हुआ। पुलिस और जिम्मेदारों ने विरोध कर रहे लोगों को समझाकर शांत किया।
प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के इंतकाल के बाद बड़े मुस्लिम तबके ने उनके बेटे डॉ. सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी की पगड़ी बांधी गई। शहर इमाम कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने इसका विरोध किया और इसके बाद अगले दिन हापुड़ रोड पर कुछ लोगों ने कारी शफीकुर्रहमान कासमी को शहर काजी की पगड़ी बांध दी। तब से ही यह विवाद चला आ रहा है। शहर में कारी शफीकुर्रहमान और डॉ. सालिकीन दोनों का ही शहर काजी के तौर पर स्वागत, समर्थन किया जा रहा है। साथ ही विवाद भी बढ़ता जा रहा है।
इस बार जामा मस्जिद में जुमे की नमाज कारी खुर्शीद ने पढ़ाई। इसके बाद तकरीर डॉ. सालिकीन ने तकरीर की, लेकिन जब तकरीर करने के लिए कारी शफीकुर्रहमान कासमी पहुंचे, तो उन्हें माइक देने से मना कर दिया गया। नमाजियों ने शोर मचा दिया। हंगामा होने लगा। माहौल बिगड़ने लगा तो कारी शफीकुर्रहमान खामोश हो गए। पुलिस और जिम्मेदार लोगों ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाया तब जाकर मामला शांत हुआ।
विज्ञापन
=======
गुंडों के दम पर शहर काजी कबूल नहीं : कारी शफीकुर्रहमान क़ासमी
कारी शफीकुर्रहमान का कहना है कि गुंडों के दम पर शहर काजी कहलवाया जा रहा है। मुझे नाअहल (अयोग्य) शहर काजी कबूल नहीं। नहीं है। मेरी नाराजगी उस डॉ.सालिकीन से नहीं, उनकी बतौर शहर काजी अयोग्य होने से है। आज जामा मस्जिद में मैंने अपमान सहा। कुछ लोगों ने मुझे अपशब्द कहे। मेरी तरफ कुछ झपटे, जिससे मेरा नियंत्रण बिगड़ा। मेरे पैर में चोट है, इससे पैर में दोबारा जख्म बढ़ गया।
=======
जकात और फितरा दें : डॉ. सालिकीन
शहर काजी ने डॉ. सालिकीन सिद्दीकी ने कहा कि रमजान का आखिरी अशरा चल रहा है। इबादत करें। जकात और फितरा दें। जिनके पास साढ़े सात तौले सोना हो या साढ़े 52 तौले चांदी हो या इसकी कीमत का पैसा हो और उसे एक साल गुजर गया हो, तो ढाई प्रतिशत के हिसाब से जकात देना चाहिए। इसी तरह हर व्यक्ति को फितरा देना चाहिए, जो करीब 50 से 55 रुपये बनता है। आपस में मिलजुल कर रहो और मस्जिद का एहतराम करो।
विज्ञापन
प्रो. जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के इंतकाल के बाद बड़े मुस्लिम तबके ने उनके बेटे डॉ. सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी की पगड़ी बांधी गई। शहर इमाम कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने इसका विरोध किया और इसके बाद अगले दिन हापुड़ रोड पर कुछ लोगों ने कारी शफीकुर्रहमान कासमी को शहर काजी की पगड़ी बांध दी। तब से ही यह विवाद चला आ रहा है। शहर में कारी शफीकुर्रहमान और डॉ. सालिकीन दोनों का ही शहर काजी के तौर पर स्वागत, समर्थन किया जा रहा है। साथ ही विवाद भी बढ़ता जा रहा है।
विज्ञापन
इस बार जामा मस्जिद में जुमे की नमाज कारी खुर्शीद ने पढ़ाई। इसके बाद तकरीर डॉ. सालिकीन ने तकरीर की, लेकिन जब तकरीर करने के लिए कारी शफीकुर्रहमान कासमी पहुंचे, तो उन्हें माइक देने से मना कर दिया गया। नमाजियों ने शोर मचा दिया। हंगामा होने लगा। माहौल बिगड़ने लगा तो कारी शफीकुर्रहमान खामोश हो गए। पुलिस और जिम्मेदार लोगों ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाया तब जाकर मामला शांत हुआ।
विज्ञापन
=======
गुंडों के दम पर शहर काजी कबूल नहीं : कारी शफीकुर्रहमान क़ासमी
कारी शफीकुर्रहमान का कहना है कि गुंडों के दम पर शहर काजी कहलवाया जा रहा है। मुझे नाअहल (अयोग्य) शहर काजी कबूल नहीं। नहीं है। मेरी नाराजगी उस डॉ.सालिकीन से नहीं, उनकी बतौर शहर काजी अयोग्य होने से है। आज जामा मस्जिद में मैंने अपमान सहा। कुछ लोगों ने मुझे अपशब्द कहे। मेरी तरफ कुछ झपटे, जिससे मेरा नियंत्रण बिगड़ा। मेरे पैर में चोट है, इससे पैर में दोबारा जख्म बढ़ गया।
=======
जकात और फितरा दें : डॉ. सालिकीन
शहर काजी ने डॉ. सालिकीन सिद्दीकी ने कहा कि रमजान का आखिरी अशरा चल रहा है। इबादत करें। जकात और फितरा दें। जिनके पास साढ़े सात तौले सोना हो या साढ़े 52 तौले चांदी हो या इसकी कीमत का पैसा हो और उसे एक साल गुजर गया हो, तो ढाई प्रतिशत के हिसाब से जकात देना चाहिए। इसी तरह हर व्यक्ति को फितरा देना चाहिए, जो करीब 50 से 55 रुपये बनता है। आपस में मिलजुल कर रहो और मस्जिद का एहतराम करो।