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यूपी: खाकी को दागदार करने वाले दो ASI सस्पेंड, मिलकर की थी ये खतरनाक प्लानिंग

Fri, 30 Mar 2018 01:45 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 30 Mar 2018 01:45 PM IST
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up: two ASI suspend, this dangerous plan was made
साहिबाबाद में सोने की लूट का खुलासा करते एडीजी प्रशांत कुमार - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली पुलिस के एएसआई पर जिम्मा था अपराध रोकने का। लेकिन लालच के दलदल में उतरकर खुद ही अपराधी बन गए। दोनों एएसआई ने मेडिकल लीव लेकर सोना लूट की वारदात को अंजाम देकर खाकी का दामन दागदार कर दिया। मेडिकल लीव पर होने की वजह से भी पुलिस को उन पर शक हुआ और अंत में वे ही लूट के मास्टरमाइंड निकले। दोनों को सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है। हालांकि अमर उजाला ने 26 व 29 मार्च के अंक में ही घटना का खुलासा कर दिया था।

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घटना और सफलता
एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि दिल्ली पुलिस के एएसआई सतेंद्र निवासी खालौर बुलंदशहर और ब्रह्मपाल सिंह निवासी भटौना बुलंदशहर ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर बीती 18 मार्च को साहिबाबाद में मुंबई के राकेश संघवी की यूनियन चेंस एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के सेल्स मैनेजर रोहित जैन से नौ किलो सोना लूट लिया था। मेरठ में शहर सराफा बाजार में ज्वेलर्स के यहां काम करने वाले रवि कश्यप उर्फ पहलवान निवासी स्वरूप नगर दिल्ली और शैलेंद्र यादव निवासी ग्राम पट्टी, कन्नौज ने एएसआई सतेंद्र को भारी मात्रा में सोना मेरठ से दिल्ली जाने की मुखबिरी की थी। इस मामले में एएसआई सतेंद्र, ब्रह्मपाल सिंह, रवि उर्फ पहलवान व शैलेंद्र यादव को गिरफ्तार कर छह किलो सोना बरामद किया गया।
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ये हुए नए खुलासे
आरोपी एएसआई सतेंद्र दिल्ली के गाजीपुर और ब्रह्मपाल सिंह कल्याणपुरी थाने में तैनात थे। दोनों अक्सर छुट्टी लेते रहते थे। वारदात के वक्त भी दोनों ही मेडिकल लीव पर थे। जैसे ही मेरठ से मुखबिरी हुई, दोनों एएसआई अपने दो साथियों के साथ लूट करने मेरठ पहुंच गए थे। चारों ने मेरठ से सराफा कारोबारी के कर्मचारियों का पीछा किया और साहिबाबाद थाना क्षेत्र में वारदात को अंजाम दिया।
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‘हाफ एनकाउंटर’ शब्द से मिला क्लू

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फाइल फोटो

वारदात के बाद पुलिस टीम पीड़ितों को लेकर साहिबाबाद स्थित घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लुटेरों ने जब सराफा कारोबारी के मैनेजर रोहित जैन को करनगेट पुलिस चौकी के पास कार से उतारा, तो इससे पहले उन्होंने बोला था कि इसका हाफ एनकाउंटर कर दो। बदमाशों ने यह भी बोला था कि यहां हम पहले भी एनकाउंटर कर चुके हैं। इसके बाद जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों के शक की सुई बदमाशों के गैंग से हटकर पुलिसकर्मियों के ‘गैंग’ पर टिक गई। पुलिस अधिकारी आश्वस्त थे कि वारदात में कोई पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो पुलिस की भाषा में बात कर रहा था। इसके बाद जांच कर रही टीमों ने पुलिस के एंगल पर तफ्तीश की।

नाट्य रूपांतरण से भी मिले सुराग
पुलिस अधिकारियों ने लूट की इस वारदात का नाट्य रूपांतरण किया था। इसके तहत कुछ लोगों को कारोबारी बनाकर कार में बैठाकर भेजा गया। अधिकारियों की मानें तो वारदात करने के तरीके से भी उन्हें कई सुराग मिल गए थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस के पास पहले से मौजूद डाटा बेस को खंगाला और कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच गए। पुलिस को सराफा बाजार मेरठ से अहम सीसीटीवी फुटेज मिले थे। इसमें शैलेंद्र और कुछ अन्य संदिग्ध लोग दिखाई दिए थे।

पूर्व में कर चुके बड़ी लूट
एएसआई सतेंद्र व ब्रह्मपाल सिंह ने करीब 10 साल पूर्व दिल्ली के गाजीपुर में पुलिस की वर्दी में ही सराफा कारोबारी से ज्वेलरी से भरा बैग लूटा था। तब भी उन्होंने मेरठ से ही कारोबारी का पीछा किया था और गाजीपुर में बस से उतारकर लूट की थी। इन्होंने सात-आठ साल पूर्व मोहननगर में व्यापारी को रोडवेज बस से उतारकर 20 लाख रुपये लूट लिए थे। इसके अलावा दोनों एएसआई करीब 20-25 वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। लेकिन पकड़े नहीं गए थे। एएसआई सतेंद्र वर्ष 2006 में जंहागीराबाद बुलंदशहर से हत्या के प्रयास में जेल जा चुका है। वर्ष 2000 में उसके खिलाफ दिल्ली तिलकनगर थाने में आबकारी अधिनियम का केस भी दर्ज है। लूट में शामिल इनके दो फरार साथियों की तलाश है।

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ये लगी थी ज्वाइंट टीम

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फाइल फोटो

इस केस के खुलासे में क्राइम ब्रांच, बुलंदशहर और गाजियाबाद पुलिस की चार टीमें लगी थीं। एडीजी जोन ने वारदात का खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की। टीम में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम मुख्यमंत्री पुरस्कार के लिए प्रस्तावित कर लखनऊ भेज दिए हैं।

गुर्गों से मिलने आते थे दोनों एएसआई
मेरठ। शहर सराफा बाजार में बैठे गुर्गों से मुलाकात करने के लिए दिल्ली पुलिस के दोनों आरोपी एएसआई मेरठ आते रहते थे। लंबे समय से चल रहे इस सिलसिले का खुलासा दोनों एएसआई के नए नंबरों से हुआ है। शहर सराफा में आठ दुकानों पर इन एएसआई के करीब 12 गुर्गे नौकरी कर रहे हैं। जो नौकरी कम, इस पर ज्यादा ध्यान रखते हैं कि कब, कौन सोने के जेवर लेकर दुकान पर आएगा। इसके एवज में उन्हें मोटा पैसा मिलता था।

आधा सोना लूटते तो बच जाते
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों ने बताया कि अगर वह आधा सोना लूटते तो हल्ला नहीं मचता। क्योंकि इससे पहले भी वह कई सराफ से लूट कर चुके हैं, जिन्होंने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई। आरोपी कहते हैं कि थोड़ी गलती हो गई, नहीं तो पकड़े नहीं जाते।

खुद आए, हाथ नहीं लगा
दोनों एएसआई को गिरफ्तार करने में नाकाम हो चुकी गाजियाबाद पुलिस ने दोनों के परिजनों व रिश्तेदारों की महिलाएं हिरासत में ली तो तब जाकर दोनों खुद ही गाजियाबाद जाकर सरेंडर हो गए।

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