बैंक घोटाले का यूपी पुलिस ने किया खुलासा, करोड़ों किए गबन, छह गिरफ्तार
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भूमि अध्याप्ति अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर एनएचएआई के इंडसइंड बैंक के खाते से चार करोड़ रुपये के गबन का सहारनपुर पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें चार आरोपियों को मुंबई से लेकर आई। आरोपियों से 32.02 लाख रुपये, कार, सोने का कड़ा, अंगूठी और चेक बुक बरामद की है। बनारस के एक आरोपी ने बैंक में कस्टमर सर्विस मैनेजर से दोस्ती कर पूरी घटना को अंजाम दिया। क्लोन चेक से धनराशि निकाली जाती रही।
मामले में जिलाधिकारी पीके पांडे एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने चार आरोपियों को मीडिया के सामने पेश कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण देहरादून के संचालित मुजफ्फरनगर की इंडसइंड बैंक के खाते से पांच दिसंबर, 12 दिसंबर, 17 दिसंबर, 20 दिसंबर तथा 27 दिसंबर को फर्जी चेक से भूमि अध्याप्ति अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर गबन किया गया। इस मामले में बैंक अधिकारियों, निमेश जैन, पंकज सिंह, पारस मकवाना, पवन कुमार जैन, दिव्यांग गांधी, एनएचएआई के कर्मचारियों तथा भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों की संलिप्तता मानते हुए मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने चार आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया। मुंबई में ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पुलिस सहारनपुर पहुंची।
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बता दें कि चार आरोपियों से पुलिस ने 7 लाख 2 हजार रुपये, एक कार, सोने का कड़ा, अंगूठी, 13 मोबाइल, 3 चेक बुक, 4 पेन कार्ड, 4 आधार कार्ड बरामद हुए। आरोपियों में ओमप्रकाश श्रीवास्तव निवासी भाबोला, मणिकपुर पालघर महाराष्ट्र, सलमान, मासूम अली निवासी थाना वालिब पालघर महाराष्ट्र, इस्लामुद्दीन निवासी डीबी कालोनी, ठाणे महाराष्ट्र शामिल हैं। ओमप्रकाश श्रीवास्तव मूलरूप से बनारस का रहने वाला है, जबकि अन्य तीनों मीरापुर मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं।
अफसरों ने बताया कि सहारनपुर से सदर कोतवाली पुलिस की टीम आरोपी इंडसइंड बैंक के कस्टमर सर्विस मैनेजर गौरव गर्ग एवं उनके चालक आसिफ को लेकर मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हुईं। वहां इनकी निशानदेही पर 25 लाख रुपये की बरामदगी की गई है। गौरव गर्ग ही आरोपियों को चेक की फोटो भेजता था और आरोपी उसका क्लोन बनाकर चेक के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करा लेते थे। अभी एक रैकेट में कई अन्य लोग भी शामिल हैं। उन तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपियों ने पहले मेरठ की बैंक में सीधे ही चेक लगाने का प्रयास किया। लेकिन मुआवजे का चेक सीधे नहीं लिया जा सकता। इसलिए मेरठ की बैंक ने सीधे भुगतान से इंकार कर दिया।
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