फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   tyohaaro par ruthi khushi

त्योहार पर रूठीं खुशियां, कलेजे को चीरता विलाप

Thu, 03 Nov 2016 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Thu, 03 Nov 2016 01:56 AM IST
विज्ञापन
tyohaaro par ruthi khushi
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बुधवार दोपहर 1:00 बजे का समय। रोहटा रोड स्थित गगन एंकलेव में आकाशवाणी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (रेडियो) नीरज गोयल का आवास गम में डूबा था। त्योहार पर सड़क हादसे में नीरज की मौत के बाद इस घर से मानों खुशियां रूठ गईं। रिश्तेदारों का सांत्वना देने के लिए तांता लगा था। नीरज की पत्नी और दोनों बेटियां का विलाप कलेजे को चीर रहा था। पड़ोसी एक सरकारी अफसर के सादगी पसंद जीवन को याद कर शोक जता रहे थे। आंसू थे कि थमने का नाम नहीं ले रहे थे। एक-दूसरे को आंसुओं के बीच ढांढस बंधा रहीं बेटियां मां को कह रही थीं कि हम सभी मिलकर पापा के सपने को पूरा करेंगी। अमर उजाला की टीम ने परिजनों की इस असीम पीड़ा को साझा किया।
विज्ञापन

मम्मी हमें आगे बढ़ाएंगी
नीरज गोयल की पत्नी अर्चना गोयल अपने पिता रिटायर्ड प्रोफेसर एसके दास और अपने भाई हेमंत गुप्ता के साथ बैठी रो रही थीं। इस बीच छोटी बेटी अक्षिता और बड़ी बेटी रितिका भी वहां आ गईं। उनके भी आंसू नहीं थम रहे थे। अक्षिता ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उनके पापा का सपना था कि वह डॉक्टर बने और उसी लक्ष्य को लेकर वह तैयारी कर रही थी। जबकि रितिका का सपना इंजीनियर बनने का है। पिता को याद कर दोनों बिलखते हुए बोलीं कि भाई और पिता के बिना ही वह सपनों को पूरा करेंगी। पापा नहीं हैं तो मम्मी हैं। मम्मी हमें आगे बढ़ाएगी। इतना कहते ही मां और नाना फूट फूटकर रो पड़े। कुछ देर बाद रुंधे गले से बोले कि हम बेटियों को कामयाब बनाने में पूरा सहयोग करेंगे।
विज्ञापन


व्यक्तित्व था बेहद सादगी भरा
परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे पड़ोसियों की आंखें भी नीरज गोयल का व्यक्तित्व बेहद सादगी भरा बताते हुए नम थीं। अर्चना बोलीं कि अधिकांश पड़ोसी तो यह भी जानते थे कि नीरज जी आकाशवाणी दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर जनरल थे। खुद उन्होंने भी तो कभी किसी को इस बारे में बताया भी नहीं। अगर वे मेरे साथ बैंक भी जाते थे तो एक कॉमन मैन की तरह लाइन में लगना पसंद करते थे। मैंने कई बार कहा भी कि आप तो अधिकारी हैं। लेकिन फिर भी वह अपने पद के बारे में नहीं बताते थे। बड़ा पद होने के बावजूद भी उनका स्वभाव बहुत ही सरल था। परिजन, पड़ोसी, रिश्तेदार हर कोई नीरज गोयल की अच्छाईयां बताते नहीं थक रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे बड़ा गम और क्या
जिस पिता की अंगुली पकड़कर चलना सीखा, उन्हीं हाथों से उन्हें मुखाग्नि देने का दर्द तो जिंदगी भर रहेगा। ऐसा कहते हुए बड़ी बेटी रितिका रो पड़ीं। कहा कि हमारे पापा बहुत अच्छे थे। कभी ऐसा नहीं लगता था कि वह पापा है, हमेशा दोस्त की तरह व्यवहार करते थे। रोते हुए रितिका बस यही कह रही थीं कि भाई की कमी तो हमेशा खलती थी। लेकिन मुझे क्या पता था कि यह दिन भी देखना पड़ेगा कि अपने पापा को अपने हाथों से ही मुखाग्नि देनी पड़ेगी। एक बेटी के लिए इससे बड़ा गम और क्या हो सकता है।

नाना ने किया था गाड़ी देने का वादा
रिटायर्ड प्रोफेसर एसके दास का कहना  है कि उन्होंने अपनी दोनों नातिन से वादा किया था कि जब वह इंजीनियर और डॉक्टर बनेंगी तो उन्हें गिफ्ट में कार देंगे। लेकिन उन्हें यह नहंी पता था कि अपने सामने ही दामाद को खोने का का दर्द झेलना पडे़गा। उनके मामा हेमंत गुप्ता ने कहा कि वह दोनों बच्चियों को आगे बढ़ाने के लिए पूरा सहयोग करेंगे।


बेटियों को आगे बढ़ाना ही मकसद  
अर्चना गोयल परतापुर स्थित एक पॉलीटेक्निक इंस्टीट्यूट में विभागाध्यक्ष हैं। उन्होंने आंसुओं के बीच संकल्प लेते हुए कहा कि दोनों बेटियों को कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दूंगी। मैं उन्हें उच्च शिक्षा देकर आगे बढ़ाऊंगी। पति के जो सपने थे, उन्हें पूरा करने में कोई भी बाधा आए, पीछे नहीं हटूंगी। उनका सपना पूरा कराऊंगी। मुझे अपनी बेटियों से बहुत प्यार है। पूरी उम्मीद है कि पति के बाद अब ये ही मेरा सहारा बनेगी और ऊंचा मुकाम हासिल करेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed