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छह जिलों में फैली हस्तिनापुर सेंक्चुरी की अब ब्रांडिंग, जानिए खास क्या है ?
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:35 PM IST
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छह जिलों में फैली हस्तिनापुर सेंक्चुरी की अब ब्रांडिंग होगी। वन विभाग ने इसी रूपरेखा तैयार की है। सेंक्चुरी में खास क्या है? यह कितनी बड़ी है? इसके अंदर कौन-कौन से जानवर और पक्षी रहते हैं। ऐसे सवालों के जवाब दिए जाएंगे। सेंक्चुरी के आसपास के धार्मिक और ऐतिहासिक पहलुओं से भी रूबरू कराया जाएगा।
विभाग एक तरह ‘सेंक्चुरी को जानो’ अभियान शुरू करने जा रहा है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह सब किया जा रहा है। सर्दी में प्रवासी पक्षी देखने के लिए सेंक्चुरी में 16 बर्ड वॉचिंग साइट चिह्नित कर ली गई हैं। इनको तैयार किया जा रहा है।
ईको टूरिज्म की कवायद
हस्तिनापुर सेंक्चुरी को प्रदेश सरकार ने ईको टूरिज्म के स्पॉट में शामिल कर लिया है। वन निगम ईको टूरिज्म के लिए ऑनलाइन बुकिंग करता है। सेंक्चुरी में एक दिन के टूरिज्म की इजाजत मिल गई है। वन विभाग स्पॉट तैयार कर रहा है। कछुआ ब्रीडिंग सेंटर, घड़ियाल, डॉल्फिन, पक्षी आदि दिखाने के अलावा नेचर का नजारा भी कराया जाएगा। ईको टूरिज्म स्पॉट बनने के बाद विभाग ने सेंक्चुरी की ब्रांडिंग करने का फैसला किया है। सेंक्चुरी का एक कांस्पेट नोट बनाया जा रहा है, जिसमें तमाम जानकारी होेगी।
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बिल्डर्स, स्कूलों के साथ होगी बैठक
सेंक्चुरी की ब्रांडिंग के लिए बैठक और कार्यक्रम किए जाएंगे। इसकी शुरुआत 24 दिसंबर से होने जा रही है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक 24 दिसंबर को बिल्डर्स और स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। जिसमें सेंक्ुचरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। विभाग को ब्रांडिंग के लिए बजट की जरूरत पड़ेगी। इसमें लोगों से मदद ली जाएगी। जो मदद करना चाहेगा वह सीधे सेंक्चुरी में कर सकेगा। धरोहर को सजाने और संवारने का काम उससे होगा।
धार्मिक, ऐतिहासिक, वन्य जीव
ब्रांडिंग में विभाग धार्मिक और ऐतिहासिक पहलु को भी शामिल करेगा। धार्मिक में हस्तिनापुर महाभारत से सीधा जुड़ा है। जंबू द्वीप बस चुका है। आसपास में कई धर्मों के प्रमुख स्थान हैं। उनके बारे में जानकारी दी जाएगी। महाभारत का इतिहास हस्तिनापुर से जुड़ा है। ऐतिहासिक महत्व की चीजों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सेंक्चुरी की ब्रांडिंग सोशल साइट्स पर भी की जाएगी। पहले क्षेत्रीय लोगों को जोड़ा जाएगा। उसके बाद क्रमश: दूरदराज तक पहुंच बनाएंगे।
16 बर्ड वॉचिंग प्वाइंट तय किए
बर्ड वॉचिंग के लिए सेंक्चुरी में 16 प्वाइंट तैयार किए गए हैं। जंगल से लेकर गंगा के किनारे तक इसमें शामिल हैं। इन प्वाइंटों पर आजकल पक्षियों की भरमार है। प्रवासी पक्षी आए हुए हैं। इन साइटों पर लोगों को बर्ड वॉचिंग कराई जाएगी।
सेंक्चुरी के बारे में
हस्तिनापुर सेंक्चुरी मेरठ और सहारनपुर मंडल के छह जिलों के 2073 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। जिलों में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, बुलंदशहर शामिल है। सेंक्चुरी की खास बात यह है कि इसमें स्टेट एनिमल बारहसिंघा और स्टेट बर्ड सारस दोनों मौजूद हैं। सेंक्चुरी बारहसिंघा के संरक्षण के लिए बनाई गई थी। प्रवासी पक्षी हर साल यहां आते हैं। डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुआ का प्रोजेक्ट यहां चल रहे हैं। गैंडों को फिर से स्थापित करने की तैयारी चल रही है।
बर्ड वॉचिंग के 16 प्वाइंट
सामना लेक, केलापुर मार्शलैंड, हैदरपुर लेक, कल्याणपुर झील, सोनाली रिवर, भीकुंड झील, नंदनपुर झील, सैदाबाद झील, हरिनगर झील, कली ढाब, बिजनौर बैराज, चेतावाला, मखदूमपुर, जलापुर, कुंडा, खरकली।
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विभाग एक तरह ‘सेंक्चुरी को जानो’ अभियान शुरू करने जा रहा है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह सब किया जा रहा है। सर्दी में प्रवासी पक्षी देखने के लिए सेंक्चुरी में 16 बर्ड वॉचिंग साइट चिह्नित कर ली गई हैं। इनको तैयार किया जा रहा है।
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ईको टूरिज्म की कवायद
हस्तिनापुर सेंक्चुरी को प्रदेश सरकार ने ईको टूरिज्म के स्पॉट में शामिल कर लिया है। वन निगम ईको टूरिज्म के लिए ऑनलाइन बुकिंग करता है। सेंक्चुरी में एक दिन के टूरिज्म की इजाजत मिल गई है। वन विभाग स्पॉट तैयार कर रहा है। कछुआ ब्रीडिंग सेंटर, घड़ियाल, डॉल्फिन, पक्षी आदि दिखाने के अलावा नेचर का नजारा भी कराया जाएगा। ईको टूरिज्म स्पॉट बनने के बाद विभाग ने सेंक्चुरी की ब्रांडिंग करने का फैसला किया है। सेंक्चुरी का एक कांस्पेट नोट बनाया जा रहा है, जिसमें तमाम जानकारी होेगी।
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बिल्डर्स, स्कूलों के साथ होगी बैठक
सेंक्चुरी की ब्रांडिंग के लिए बैठक और कार्यक्रम किए जाएंगे। इसकी शुरुआत 24 दिसंबर से होने जा रही है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक 24 दिसंबर को बिल्डर्स और स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। जिसमें सेंक्ुचरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। विभाग को ब्रांडिंग के लिए बजट की जरूरत पड़ेगी। इसमें लोगों से मदद ली जाएगी। जो मदद करना चाहेगा वह सीधे सेंक्चुरी में कर सकेगा। धरोहर को सजाने और संवारने का काम उससे होगा।
धार्मिक, ऐतिहासिक, वन्य जीव
ब्रांडिंग में विभाग धार्मिक और ऐतिहासिक पहलु को भी शामिल करेगा। धार्मिक में हस्तिनापुर महाभारत से सीधा जुड़ा है। जंबू द्वीप बस चुका है। आसपास में कई धर्मों के प्रमुख स्थान हैं। उनके बारे में जानकारी दी जाएगी। महाभारत का इतिहास हस्तिनापुर से जुड़ा है। ऐतिहासिक महत्व की चीजों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सेंक्चुरी की ब्रांडिंग सोशल साइट्स पर भी की जाएगी। पहले क्षेत्रीय लोगों को जोड़ा जाएगा। उसके बाद क्रमश: दूरदराज तक पहुंच बनाएंगे।
16 बर्ड वॉचिंग प्वाइंट तय किए
बर्ड वॉचिंग के लिए सेंक्चुरी में 16 प्वाइंट तैयार किए गए हैं। जंगल से लेकर गंगा के किनारे तक इसमें शामिल हैं। इन प्वाइंटों पर आजकल पक्षियों की भरमार है। प्रवासी पक्षी आए हुए हैं। इन साइटों पर लोगों को बर्ड वॉचिंग कराई जाएगी।
सेंक्चुरी के बारे में
हस्तिनापुर सेंक्चुरी मेरठ और सहारनपुर मंडल के छह जिलों के 2073 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। जिलों में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, बुलंदशहर शामिल है। सेंक्चुरी की खास बात यह है कि इसमें स्टेट एनिमल बारहसिंघा और स्टेट बर्ड सारस दोनों मौजूद हैं। सेंक्चुरी बारहसिंघा के संरक्षण के लिए बनाई गई थी। प्रवासी पक्षी हर साल यहां आते हैं। डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुआ का प्रोजेक्ट यहां चल रहे हैं। गैंडों को फिर से स्थापित करने की तैयारी चल रही है।
बर्ड वॉचिंग के 16 प्वाइंट
सामना लेक, केलापुर मार्शलैंड, हैदरपुर लेक, कल्याणपुर झील, सोनाली रिवर, भीकुंड झील, नंदनपुर झील, सैदाबाद झील, हरिनगर झील, कली ढाब, बिजनौर बैराज, चेतावाला, मखदूमपुर, जलापुर, कुंडा, खरकली।