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रेल हादसा : स्टेशन अधीक्षक और कंट्रोल रूम के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल

Thu, 24 Aug 2017 02:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Thu, 24 Aug 2017 02:28 PM IST
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Train incident another audio VIRAL: Sir! 20 minute blocks demand ... but
मुजफ्फरनगर रेल हादसा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे की गाज रेलवे बोर्ड अधिकारियों से लेकर सेक्शन इंजीनियरों तक भले ही गिर गई हो, लेकिन अभी भी मामले के नए-नए राज खुलते जा रहे हैं। मुजफ्फरनगर रेल हादसे से जुड़ा एक और ऑडियो वॉयरल हुआ। ऑडियो में बीस मिनट का ब्लॉक मांगा जा रहा है। जिस पर रेल ट्रैफिक ज्यादा होने की मजबूरी बताते हुए ब्लॉक देने से मना किया जा रहा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि बगैर इजाजत के ही ट्रैक पर काम हो रहा था।

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रविवार को गेटमैन और उसके साथी कर्मचारी की बातचीत का ऑडियो सामने आने के बाद सोमवार को खतौली स्टेशन अधीक्षक और कंट्रोल रूम के बीच हुई बेहद महत्वपूर्ण बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया। 2 मिनट 17 सेकेंड के इस ऑडियो में टपरी और देवबंद आदि स्टेशनों से लेकर खतौली स्टेशन की कंट्रोल रूम कर्मचारियों से बातचीत रिकार्ड है। ऑडियो में स्टेशन अधीक्षक और पावर केबिन के बीच बातचीत हो रही है। ऑडियो में बातचीत रेल कर्मी बताता है कि साहब, पीडब्ल्यूआई बीस मिनट का ब्लॉक मांग रहे हैं। उन्हें कोई ग्लूड ज्वाइंट बदलना है। लेकिन इससे मेन लाइन और लूप लाइन दोनों बंद हो जाएगी। जबकि इस समय गाड़ियों का पूरा ग्रुप (रेल ट्रैफिक) है। ऐसी हालत में कैसे ब्लॉक मिल जाएगा। कंट्रोल रूम इस बात से सहमति जताते हुए फोन काट देता है। 
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इससे आशंका जाहिर की जा रही है कि बगैर इजाजत के पीडब्ल्यूआई ने काम शुरू कर दिया। वहीं, इसकी जानकारी भी रेलवे स्टेशन को नहीं दी गई। बताया जाता हैं कि कई बार ट्रैक पर अचानक काम करने की जरूरत पड़ जाती है। इस दौरान पीडब्ल्यूआई स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी देकर उस वक्त ट्रैक पर काम करता है, जब दो ट्रेनों के गुजरने के बीच का समय लंबा होता है। काम के वक्त पीडब्ल्यूआई न सिर्फ स्टेशन मास्टर के साथ समन्वय बनाए रखता है। बल्कि काम की जगह से करीब 500 मीटर पहले साइट बैनर लगाया जाता है। जिससे चालक को इसकी सूचना दी जा सके।
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रेलवे के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक पाथवे इंजीनियरिंग के लोगों ने ब्लाक मिलने से पहले ही ग्लूड ज्वाइंट्स जोड़ने के लिए पटरी खोल दी थी। सेक्शन के लोगों को उम्मीद थी अधीक्षक से ब्लाक मिल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं होने पर उत्कल धड़धड़ाती हुई मंजिल की तरफ बढ़ने लगी। इस दौरान गैंग न तो ग्लूड ज्वाइंट्स चेंज कर सका और न ही इसके लिए खोली गई पटरी को ही बांध सका। धड़धड़ाती हुई उत्कल एक्सप्रेस टूटे ट्रैक पर डिरेल हो गई।

ऐसे मिलता है काम के लिए ब्लाक 

Train incident another audio VIRAL: Sir! 20 minute blocks demand ... but
मुजफ्फरनगर रेल हादसा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

अगर ट्रैक पर दोहरीकरण कार्य अंतिम चरण में है तो इसके लिए डीआरएम कार्यालय से अनुमति लेकर ट्रेनों का संचालन रोकना होता है। इसके बाद ही कार्य शुरू होगा। अगर एक या दो दिन कार्य करना है तो संबंधित स्टेशन को सूचित करना होता है। काम को पूरा करने के लिए पूरी मैन पावर और मशीनरी होना अनिवार्य है। इसकी जानकारी गैंगमैन और की-मैन तक के पास होती है। ट्रैक पर इमरजेंसी कार्य के लिए सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेल पथ अपनी जिम्मेदारी पर कार्य शुरू कराता है, लेकिन ट्रैक पर लाल झंडी, डेटोनेटर, पटाखा और अन्य संरक्षा उपकरण साथ रखने होते हैं। 

ऐसे लगता है पटरी पर कॉशन 
ट्रैक ठीक करने के लिए पीडब्लूआई को संबंधित स्टेशन अधीक्षक को लिखित में देना होता है कि अमुक जगह पर पटरी को रिपेयर किया जाना है, जिसके लिए 10, 15, 20 या 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड का कॉशन चाहिए। पीडब्लूआई की लिखित सूचना के बाद स्टेेशन अधीक्षक कंट्रोल रूम को अवगत कराता है। इसके बाद कॉशन मिलने पर स्टेशन मास्टर सभी ट्रेनों के चालक और गार्ड को लिखित में कॉशन देकर ट्रेन चलवाता है। रिपेयर कार्य स्थल के दोनों और पीडब्लूआई को कॉशन संकेतक बोर्ड लगाने पड़ते हैं और लाल झंडी लेकर कर्मचारी भी खड़े करने पड़ते हैं।

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