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नौचंदी मेले में मुशायरे का आयोजन
Sat, 15 Jun 2019 03:09 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Sat, 15 Jun 2019 03:09 AM IST
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मुशायरा
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ। 'ये काम कितना सलीके से कर गया कोई, नजर के रास्ते दिल में उतर गया कोई' अनवर अरमान के इस शेर ने पटेल मंडप में बैठे सभी श्रोताओं के दिल पर दस्तक दी और पूरा हाल तालियांे से गूंज उठा। शुक्रवार रात नौचंदी मेले में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन हुआ। इसमें दूरदराज से आए कई शायरों ने शिरकत की। इससे पूर्व महफिल की शमा राज्यसभा सांसद कांता कर्दम, जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह, विधायक जितेंद्र सतवाई, मुखिया गुर्जर, संगीता दोहरे, निखिल त्यागी, नरेंद्र राष्ट्रवादी आदि अतिथियों ने की।
किस पे क्या गुजरेगी इतना भी न सोचा तूने..
देररात तक शेर ओ शायरी और गजलों का सिलसिला चलता रहा। इस महफिल में जमील मजहर ने मजहर फक्त सरों से न दुस्वारी.. सुनाकर श्रोताओं की दाद पाई। हसनैन दिलकश ने सुलगती रेत पर आंखें निचोड़ देते हैं.. पर श्रोताओं को हालातों का आइना दिखाया। नगाजिश खान ने किस पे क्या गुजरेगी इतना भी न सोचा तूने.. गजल पर खूब तालियां बटोरीं। वहीं तरन्नुम ने बख्श कर वो मोहब्बत का गम मुझपे एहसान कर जा.. से श्रोताओं की वाहवाही लूटी। हामिद भूसावली ने जन जीत होती न ये जश्न ही मनाते हम जरा ही हार से डरते तो हार जाते हम सुनाकर हालातों में हौसला रखने का संदेश दिया। दानिश गजल और तरन्नुम नाज के तराने भी श्रोताओं को खूब भाए। इसके अलावा इकबाल अशहर, डॉ. अदना मेरठी, वारिस वारसी, खुर्शीद हैदर, अनवर अमान, अज्म शाकरी, असरार उल हक, नूर धौलपुरी, राकेश मिश्रा, आदेश त्यागी, नदीम, दिलशाद जख्मी की शायरी ने देररात तक श्रोताओं को बांधे रखा। इस दौरान किसी ने समाज सुधार का संदेश दिया तो कोई राजनीति पर कटाक्ष और अफसरशाही पर तंज कसते नजर आया। शायरों ने अपने अंदाज में हर पहलू को छुआ।
किस पे क्या गुजरेगी इतना भी न सोचा तूने..
देररात तक शेर ओ शायरी और गजलों का सिलसिला चलता रहा। इस महफिल में जमील मजहर ने मजहर फक्त सरों से न दुस्वारी.. सुनाकर श्रोताओं की दाद पाई। हसनैन दिलकश ने सुलगती रेत पर आंखें निचोड़ देते हैं.. पर श्रोताओं को हालातों का आइना दिखाया। नगाजिश खान ने किस पे क्या गुजरेगी इतना भी न सोचा तूने.. गजल पर खूब तालियां बटोरीं। वहीं तरन्नुम ने बख्श कर वो मोहब्बत का गम मुझपे एहसान कर जा.. से श्रोताओं की वाहवाही लूटी। हामिद भूसावली ने जन जीत होती न ये जश्न ही मनाते हम जरा ही हार से डरते तो हार जाते हम सुनाकर हालातों में हौसला रखने का संदेश दिया। दानिश गजल और तरन्नुम नाज के तराने भी श्रोताओं को खूब भाए। इसके अलावा इकबाल अशहर, डॉ. अदना मेरठी, वारिस वारसी, खुर्शीद हैदर, अनवर अमान, अज्म शाकरी, असरार उल हक, नूर धौलपुरी, राकेश मिश्रा, आदेश त्यागी, नदीम, दिलशाद जख्मी की शायरी ने देररात तक श्रोताओं को बांधे रखा। इस दौरान किसी ने समाज सुधार का संदेश दिया तो कोई राजनीति पर कटाक्ष और अफसरशाही पर तंज कसते नजर आया। शायरों ने अपने अंदाज में हर पहलू को छुआ।
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