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टिकट बदलने से समीकरण भी बदले
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 04 Oct 2016 02:24 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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सपा प्रत्याशियों में अचानक फेरबदल से कैंट और सरधना विधानसभा के समीकरण पूरी बदल गए हैं। वैसे तो शहर सीट पर अंसारी के बदले अंसारी को ही टिकट दिया गया है, लेकिन यहां भी अब सपा के लिए राह आसान नहीं होगी। वहीं, एक वर्ग ऐसा भी है, जो मान रहा है कि सपा में चल रही उठापटक अभी थमने वाली नहीं है। आने वाले समय में संगठन स्तर पर भी कुछ फेरबदल हो सकते हैं।
सरधना सीट पर क्षत्रिय मतों की संख्या अच्छी-खासी है। ठाकुर चौबीसी में एकतरफा रुझान के कारण संगीत सोम के लिए जीत की राह आसान रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में अतुल प्रधान को गुर्जर के साथ मुस्लिम वोट भी अच्छी संख्या में मिले थे। अतुल के 48 हजार वोटों के कारण ही इस बार उन्हें सपा ने टिकट दिया था। अब अतुल का टिकट कटने के बाद गुर्जर मतों के रुख पर निगाह रहेगी। यह भी देखने वाली बात होगी कि पिंटू राणा क्षत्रिय मतों में कितनी सेंध लगा पाएंगे। पिंटू सर्मथकों का मानना है कि उन्हें क्षत्रिय, मुस्लिम और गुर्जर मतदाताओं का साथ मिलेगा। इससे यह सीट सपा के लिए और मजबूत हो गई है। गुर्जर वोटों पर दावा सपा की ओर से गुर्जर समाज को दिए गए पदों के कारण किया जा रहा है। दूसरे क्षत्रिय के चुनाव लड़ने के कारण संगीत सोम के लिए भी अब रणनीति बिल्कुल बदल गई है। हालांकि, अब सबसे ज्यादा अहम गुर्जर समाज का रुख हो गया है। गुर्जरों के वोट लेने के लिए सभी पार्टियां पूरा जोर लगा देंगी।
कैंट में कांग्रेस ला सकती है पंजाबी
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से पंजाबी समाज के प्रत्याशी ने अच्छे खासे वोट हासिल किए थे। अब सपा ने पंजाबी समाज के प्रत्याशी को बदलकर वैश्य पर दांव लगाया है। ऐसे में संभावना है कि अब कांग्रेस पंजाबी प्रत्याशी पर दांव चल सकती है। पिछली बार बसपा से भी पंजाबी समाज का दावेदार था। इस बार अब कांग्रेस का अकेला उम्मीदवार पंजाबी होने की संभावना से सारे समीकरण बदल गए हैं। वैश्य प्रत्याशी होने से भाजपा को कैंट में जरूर अपने वोट कटने का खतरा पैदा हो गया है। बसपा ने जाट को टिकट दिया है। ऐसे में पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार समीकरण बिल्कुल बदले हुए हैं। देखने वाली बात यह होगी कि आरती अग्रवाल वैश्य समाज को अपनी ओर किस तरह से ला पाती हैं।
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अयूब पर बड़ी जिम्मेदारी
पिछले विधानसभा चुनाव में शहर विधानसभा सीट पर रफीक अंसारी को लगभग 61 हजार वोट मिले थे। इसके बाद मेयर में भी उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे। ऐसे में नए प्रत्याशी अयूब अंसारी के लिए रफीक को मिले वोटों की छाया से बाहर आना आसान नहीं होगा। दूसरी पार्टियां भी अब सपा के नए प्रत्याशी होने का फायदा उठाने की कोशिश में रहेंगी। वैसे तो सपा ने अंसारी के बदले अंसारी को टिकट दिया है, लेकिन टिकट बदलने से कार्यकर्ता स्तर पर भी समीकरण बदल गए हैं।
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सरधना सीट पर क्षत्रिय मतों की संख्या अच्छी-खासी है। ठाकुर चौबीसी में एकतरफा रुझान के कारण संगीत सोम के लिए जीत की राह आसान रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में अतुल प्रधान को गुर्जर के साथ मुस्लिम वोट भी अच्छी संख्या में मिले थे। अतुल के 48 हजार वोटों के कारण ही इस बार उन्हें सपा ने टिकट दिया था। अब अतुल का टिकट कटने के बाद गुर्जर मतों के रुख पर निगाह रहेगी। यह भी देखने वाली बात होगी कि पिंटू राणा क्षत्रिय मतों में कितनी सेंध लगा पाएंगे। पिंटू सर्मथकों का मानना है कि उन्हें क्षत्रिय, मुस्लिम और गुर्जर मतदाताओं का साथ मिलेगा। इससे यह सीट सपा के लिए और मजबूत हो गई है। गुर्जर वोटों पर दावा सपा की ओर से गुर्जर समाज को दिए गए पदों के कारण किया जा रहा है। दूसरे क्षत्रिय के चुनाव लड़ने के कारण संगीत सोम के लिए भी अब रणनीति बिल्कुल बदल गई है। हालांकि, अब सबसे ज्यादा अहम गुर्जर समाज का रुख हो गया है। गुर्जरों के वोट लेने के लिए सभी पार्टियां पूरा जोर लगा देंगी।
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कैंट में कांग्रेस ला सकती है पंजाबी
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से पंजाबी समाज के प्रत्याशी ने अच्छे खासे वोट हासिल किए थे। अब सपा ने पंजाबी समाज के प्रत्याशी को बदलकर वैश्य पर दांव लगाया है। ऐसे में संभावना है कि अब कांग्रेस पंजाबी प्रत्याशी पर दांव चल सकती है। पिछली बार बसपा से भी पंजाबी समाज का दावेदार था। इस बार अब कांग्रेस का अकेला उम्मीदवार पंजाबी होने की संभावना से सारे समीकरण बदल गए हैं। वैश्य प्रत्याशी होने से भाजपा को कैंट में जरूर अपने वोट कटने का खतरा पैदा हो गया है। बसपा ने जाट को टिकट दिया है। ऐसे में पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार समीकरण बिल्कुल बदले हुए हैं। देखने वाली बात यह होगी कि आरती अग्रवाल वैश्य समाज को अपनी ओर किस तरह से ला पाती हैं।
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अयूब पर बड़ी जिम्मेदारी
पिछले विधानसभा चुनाव में शहर विधानसभा सीट पर रफीक अंसारी को लगभग 61 हजार वोट मिले थे। इसके बाद मेयर में भी उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे। ऐसे में नए प्रत्याशी अयूब अंसारी के लिए रफीक को मिले वोटों की छाया से बाहर आना आसान नहीं होगा। दूसरी पार्टियां भी अब सपा के नए प्रत्याशी होने का फायदा उठाने की कोशिश में रहेंगी। वैसे तो सपा ने अंसारी के बदले अंसारी को टिकट दिया है, लेकिन टिकट बदलने से कार्यकर्ता स्तर पर भी समीकरण बदल गए हैं।