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यूं वक्त की कैंची ने पर उसके कतर डाले...
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यूं वक्त की कैंची ने पर उसके कतर डाले...
फलावदा। कस्बे में चेयरमैन अब्दुस समद के निवास पर एक मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम तथा संचालन उस्ताद शायर अनवारुल हक शादा ने किया।
उस्ताद शायर अनवारुल हक शादा ने पढ़ा अल्लाह उस परिंदे का एहसास ए बेबसी, बैठा है अपनी चोंच में जो पर लिए हुए। मास्टर फैयाज अली नादिर ने कहा यूं वक्त की कैंची ने पर उसके कतर डाले, अब बूढ़े परिंदे से परवाज नहीं होती। मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम ने अपने ख्यालात यूं पेश किए जिंदगी ने मौत की दहलीज पर पहुंचा दिया, मिलने वाले मेरे जीने की दुआ करते रहे।
चेयरमैन अब्दुस समद ने कुछ यूं बयां किया आई हुईं तमाम बलाएं गुजर गईं, चादर हमारे सर पे जो मां की दुआ की थी। देवबंद से तशरीफ लाए मेहमान शायर नईम अख्तर नईम ने कहा ये क्या खबर थी कि बेटे के वास्ते एक दिन, खुद अपना बाप ही लेकर शराब आएगा। खलील अहमद खलील ने कुछ यू पेश किया जंग हालात के दम पर ही नहीं है मोकूफ, हिम्मते मर्द ए मुजाहिद भी हो तलवार के साथ। श्रोताओं को गुदगुदाते हुए निसार अहकर फरीदी ने कहा कि थाने में सिर्फ इसलिए लाया गया मुझे, अल्लाह दिया है नाम बिजेंद्र नहीं हूं मैं। हाफिज महफूज माहिर ने कहा कि तीरे अहद ए सितम में इक परिंदा, कफस में दाना-दाना कह रहा है। जियाउद्दीन रोशन ने कुछ यूं बयां किया कि खुद बुरे हैं तो बुरे लोगों से नफरत कैसी, घर हैं शीशे के तो पत्थर से अदावत कैसी। मुशायरे में डॉ. सलीम खान सलीम, जफर अब्बास, ताज मोहम्मद ताज ने भी अपनी कविताओं से मन मोह लिया।
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सैयद सहबानउद्दीन, जमील उस्मानी, नीरज राणा, हाफिज इरफान, शराफत अली, आसिफ रिजवी, वकील, मतीन, यूसुफ आदि रहे।
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फलावदा। कस्बे में चेयरमैन अब्दुस समद के निवास पर एक मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम तथा संचालन उस्ताद शायर अनवारुल हक शादा ने किया।
उस्ताद शायर अनवारुल हक शादा ने पढ़ा अल्लाह उस परिंदे का एहसास ए बेबसी, बैठा है अपनी चोंच में जो पर लिए हुए। मास्टर फैयाज अली नादिर ने कहा यूं वक्त की कैंची ने पर उसके कतर डाले, अब बूढ़े परिंदे से परवाज नहीं होती। मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम ने अपने ख्यालात यूं पेश किए जिंदगी ने मौत की दहलीज पर पहुंचा दिया, मिलने वाले मेरे जीने की दुआ करते रहे।
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चेयरमैन अब्दुस समद ने कुछ यूं बयां किया आई हुईं तमाम बलाएं गुजर गईं, चादर हमारे सर पे जो मां की दुआ की थी। देवबंद से तशरीफ लाए मेहमान शायर नईम अख्तर नईम ने कहा ये क्या खबर थी कि बेटे के वास्ते एक दिन, खुद अपना बाप ही लेकर शराब आएगा। खलील अहमद खलील ने कुछ यू पेश किया जंग हालात के दम पर ही नहीं है मोकूफ, हिम्मते मर्द ए मुजाहिद भी हो तलवार के साथ। श्रोताओं को गुदगुदाते हुए निसार अहकर फरीदी ने कहा कि थाने में सिर्फ इसलिए लाया गया मुझे, अल्लाह दिया है नाम बिजेंद्र नहीं हूं मैं। हाफिज महफूज माहिर ने कहा कि तीरे अहद ए सितम में इक परिंदा, कफस में दाना-दाना कह रहा है। जियाउद्दीन रोशन ने कुछ यूं बयां किया कि खुद बुरे हैं तो बुरे लोगों से नफरत कैसी, घर हैं शीशे के तो पत्थर से अदावत कैसी। मुशायरे में डॉ. सलीम खान सलीम, जफर अब्बास, ताज मोहम्मद ताज ने भी अपनी कविताओं से मन मोह लिया।
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सैयद सहबानउद्दीन, जमील उस्मानी, नीरज राणा, हाफिज इरफान, शराफत अली, आसिफ रिजवी, वकील, मतीन, यूसुफ आदि रहे।