यूपी: पहले लॉकडाउन ने तोड़ी कमर, अब कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से बड़ा संकट, ऐसा है कारोबारियों का हाल
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पश्चिमी यूपी में पहले लॉकडाउन ने कारोबारियों की कमर तोड़ कर रख दी और अब बढ़ती कच्चे माल की कीमतों से कारोबारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वहीं कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन क्षमता पर भी प्रभाव पड़ा है। ऐसे में एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नोएडा ने प्रधानमंत्री मोदी से कच्चे माल के भाव को नियंत्रित करने की मांग उठाई है।
वहीं आर्थिक बोझ के तले दबी हजारों की संख्या में औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं। यही नहीं बल्कि कुछ बंद होने की कबार पर हैं। कच्चा माल आयात नहीं होने से घरेलू बाजार में भी कच्चा माल का भाव तेजी से बढ़ रहा है।
कोरोना की दूसरी लहर फिर से कारोबार को अपनी चपेट में लेने लगी है। यूरोप में पुन: तालाबंदी से भारतीय पेपर मिलों के सामने कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया है। पेपर मिलों को नया कागज बनाने के लिए पुराने, खराब कागज की जरूरत होती है। जो विदेशों से आयात किया जाता है। लेकिन बंदी के कारण कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो रही। बंदरगाहों पर ही कंसाइनमेंट रुके हैं। माल भारत तक नहीं आ रहा। पेपर मिलों के सामने कच्चे माल की आपूर्ति की मुश्किल खड़ी हो गई है।
मेरठ सहित एनसीआर की पेपर मिलों में पैकिंग पेपर, स्टेशनरी, लिफाफा, क्राफ्ट और प्रिंटिंग पेपर बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है। यहां की पेपर मिलों में तैयार पेपर चीन सहित अन्य देशों में निर्यात भी होता है। पेपर मिलें नया पेपर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में विदेशों से पुराने इस्तेमाल किए हुए पेपर को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करती हैं। मगर लॉकडाउन से विदेशों से कच्चे माल की सप्लाई ठप हो चुकी है।
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15 फीसद तक महंगा हुआ कच्चा माल
कोरोना सीजन के बाद से ही पेपर मिलों के लिए कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया है। मेरठ की पेपर मिलें स्क्रैप पेपर से फ्रेश पेपर तैयार करती हैं। नया पेपर बनाने में इस्तेमाल होने वाले पुराने पेपर को मिलें यूरोप से आयात करती हैं। क्योंकि वहां के स्क्रैप की गुणवत्ता भारतीय पेपर से अच्छी होती है। कोरोना के कारण भारतीय, विदेशी दोनों ही कच्चे माल की कीमतों में 15 फीसद तक का इजाफा हुआ है। यूरोप से कच्चा माल आने में दिक्कत के कारण भारतीय कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
ये कहना कारोबारियों का
रबर कारोबारी अनिल पुंडीर कहते हैं कि कच्चे माल का संकट आ रहा है, इसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है, कच्चा माल न मिलने से उत्पादन नहीं हो रहा और सप्लाई प्रभावित हो रही है।
पसवाड़ा पेपर मिल के एमडी और एनसीआर पेपर मिल एसोसिएशन के अध्य्क्ष अरविंद अग्रवाल के अनुसार पेपर मिलों के सामने कच्चे माल का भारी संकट आ गया है। स्क्रेप पेपर की कीमत में सीधे 15 फीसद की बढ़त हुई है। उस पर भी माल नहीं मिल रहा।
स्पोर्ट्स उद्यमी शेखर भल्ला कहते हैं कि खेल उपकरण बनाने के लिए धागा, कपड़ा, रबर, धातु सब महंगे हो गए हैं। पहले जो कच्चा माल चीन से आता था अब वो भारत या अन्य देशों से मंगा रहे हैं उसकी कीमत बड़ी है। कन्साइनमेंट न मिलने के कारण माल का आयात नहीं हो रहा। बंदरगाहों पर ही माल फंसा है।
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