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Meerut News: वैकल्पिक व्यवस्था के बिना झोपड़ी तोड़ी, प्रशासन पर आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। नगर के मोहल्ला भाटवाड़ा में अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति ने उसकी झोपड़ी तोड़ने और सामान नष्ट करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने डीएम को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
मोहल्ला भाटवाड़ा निवासी फेरू सिंह ने बताया कि उनके परिवार के नाम मोहल्ले में 20 गज पुश्तैनी मकान है, जिसमें पहले से ही नौ सदस्य रह रहे हैं। भूमिहीन होने के कारण वह पिछले करीब 30 वर्षों से तालाब की भूमि पर झोपड़ी बनाकर अपने परिवार के साथ रह रहे थे। उनके अनुसार, इस निवास का उल्लेख वर्ष 2017 की नगर पालिका सूची में भी दर्ज है। पीड़ित का आरोप है कि नगर पालिका अधिकारियों ने पहले उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन देकर झोपड़ी किनारे करने को कहा था। इसके बावजूद 20 फरवरी को नगर पालिका की एक अधिकारी और कर्मचारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर उनकी झोपड़ी और उसमें रखा सामान तोड़ दिया गया।
फेरू सिंह ने आरोप लगाया कि आसपास मौजूद अन्य कच्चे-पक्के मकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया, जबकि केवल उनकी झोपड़ी को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि अप्रैल माह में एक पुलिसकर्मी बयान दर्ज करने आया लेकिन उसने उनकी बात पूरी तरह दर्ज करने से इन्कार कर दिया और अपनी मर्जी से बयान लिखने की बात कही।
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पीड़ित के अनुसार इस घटना में उनका घरेलू सामान, फर्नीचर, कपड़े, खाद्य सामग्री और पशुओं का चारा भी नष्ट हो गया। पीड़ित ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।
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सरधना। नगर के मोहल्ला भाटवाड़ा में अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति ने उसकी झोपड़ी तोड़ने और सामान नष्ट करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने डीएम को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
मोहल्ला भाटवाड़ा निवासी फेरू सिंह ने बताया कि उनके परिवार के नाम मोहल्ले में 20 गज पुश्तैनी मकान है, जिसमें पहले से ही नौ सदस्य रह रहे हैं। भूमिहीन होने के कारण वह पिछले करीब 30 वर्षों से तालाब की भूमि पर झोपड़ी बनाकर अपने परिवार के साथ रह रहे थे। उनके अनुसार, इस निवास का उल्लेख वर्ष 2017 की नगर पालिका सूची में भी दर्ज है। पीड़ित का आरोप है कि नगर पालिका अधिकारियों ने पहले उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन देकर झोपड़ी किनारे करने को कहा था। इसके बावजूद 20 फरवरी को नगर पालिका की एक अधिकारी और कर्मचारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर उनकी झोपड़ी और उसमें रखा सामान तोड़ दिया गया।
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फेरू सिंह ने आरोप लगाया कि आसपास मौजूद अन्य कच्चे-पक्के मकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया, जबकि केवल उनकी झोपड़ी को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि अप्रैल माह में एक पुलिसकर्मी बयान दर्ज करने आया लेकिन उसने उनकी बात पूरी तरह दर्ज करने से इन्कार कर दिया और अपनी मर्जी से बयान लिखने की बात कही।
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पीड़ित के अनुसार इस घटना में उनका घरेलू सामान, फर्नीचर, कपड़े, खाद्य सामग्री और पशुओं का चारा भी नष्ट हो गया। पीड़ित ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।