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नागर इकाई को प्लांट संचालन का अधिकार नहीं
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मेरठ। अपर गंगनहर स्थित भोला की झाल पर 400 करोड़ रुपये की लागत से बनी गंगाजल परियोजना के संचालन और रखरखाव में बड़ा खेल है। नगर निगम के महाप्रबंधक जलकल के निरीक्षण में प्लांट में मिली खामियों ने जल निगम की नागर इकाई की पोल खोल दी है। उन्होंने जल निगम की यांत्रिकी शाखा से प्लांट संचालन और रखरखाव का प्रस्ताव मांगा है। वहीं, नगर आयुक्त अरविंद कुमार चौरसिया भी पूर्व में प्लांट को नगर निगम के हैंडओवर करने की मांग जल निगम के प्रबंध निदेशक से कर चुके हैं। इसके चलते नगर निगम ने दूसरी तिमाही के 81 लाख रुपये नागर इकाई को नहीं दिए हैं।
शहर के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जेएनएनयूआरएम के तहत करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से भोला झाल पर 100 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया। वहीं, 21 किलोमीटर लंबी मुख्य पेयजल लाइन के साथ नौ भूमिगत जलाशय बनाए गए। प्लांट संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जल निगम की यांत्रिकी शाखा की होती है। हालांकि प्लांट को स्थापित करने वाली जल निगम की सिविल शाखा संचालन और रखरखाव एक अन्य कंपनी से करा रही है। इसकी एवज नगर निगम से हर महीने 27 लाख रुपये का भुगतान पिछले तीन वर्षों से लिया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल पा रहा है। वहीं, महापौर सुनीता वर्मा ने मई में प्लांट का आकस्मिक निरीक्षण किया था। उन्हें 24 बिंदुओं पर खामी और अनियमितता मिली थीं। इसके बाद नागर इकाई को खामियां दूर करने के लिए कहा था। इस बीच नगर आयुक्त ने जल निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर प्लांट को नगर निगम के हैंडओवर करने की मांग की थी। हालांकि इसका समाधान नहीं हो सका है। दो दिन पहले महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने टीम के साथ प्लांट का निरीक्षण किया। उन्हें 24 बिंदुओं पर कोई सुधार नहीं मिला। इस पर रतन लाल ने प्लांट को नागर इकाई से वापस लेकर यांत्रिकी शाखा को सौंपने का प्रस्ताव रखा। यांत्रिकी शाखा को पत्र भेजकर संचालन और रखरखाव का प्रस्ताव भेजने के लिए भी कहा। इस बारे में नगर निगम के महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने बताया कि नागर इकाई को प्लांट संचालन और रखरखाव का अधिकार नहीं है। इसे शुरूआत से ही यांत्रिकी शाखा को दिया जाना चाहिए था। प्लांट के निरीक्षण में भारी कमियां मिली हैं। इन्हें दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, यांत्रिकी शाखा से इसके संचालन एवं रखरखाव का प्रस्ताव मांगा है।
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शहर के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जेएनएनयूआरएम के तहत करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से भोला झाल पर 100 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया। वहीं, 21 किलोमीटर लंबी मुख्य पेयजल लाइन के साथ नौ भूमिगत जलाशय बनाए गए। प्लांट संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जल निगम की यांत्रिकी शाखा की होती है। हालांकि प्लांट को स्थापित करने वाली जल निगम की सिविल शाखा संचालन और रखरखाव एक अन्य कंपनी से करा रही है। इसकी एवज नगर निगम से हर महीने 27 लाख रुपये का भुगतान पिछले तीन वर्षों से लिया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल पा रहा है। वहीं, महापौर सुनीता वर्मा ने मई में प्लांट का आकस्मिक निरीक्षण किया था। उन्हें 24 बिंदुओं पर खामी और अनियमितता मिली थीं। इसके बाद नागर इकाई को खामियां दूर करने के लिए कहा था। इस बीच नगर आयुक्त ने जल निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर प्लांट को नगर निगम के हैंडओवर करने की मांग की थी। हालांकि इसका समाधान नहीं हो सका है। दो दिन पहले महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने टीम के साथ प्लांट का निरीक्षण किया। उन्हें 24 बिंदुओं पर कोई सुधार नहीं मिला। इस पर रतन लाल ने प्लांट को नागर इकाई से वापस लेकर यांत्रिकी शाखा को सौंपने का प्रस्ताव रखा। यांत्रिकी शाखा को पत्र भेजकर संचालन और रखरखाव का प्रस्ताव भेजने के लिए भी कहा। इस बारे में नगर निगम के महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने बताया कि नागर इकाई को प्लांट संचालन और रखरखाव का अधिकार नहीं है। इसे शुरूआत से ही यांत्रिकी शाखा को दिया जाना चाहिए था। प्लांट के निरीक्षण में भारी कमियां मिली हैं। इन्हें दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, यांत्रिकी शाखा से इसके संचालन एवं रखरखाव का प्रस्ताव मांगा है।
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