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जरूरतमंदों को समय पर भोजन पहुंचाना चुनौती
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मेरठ। जनपद में रसोई सिमटती जा रही हैं। लॉकडाउन की शुरूआत में 15 स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा खाना दिया जा रहा था परंतु ये अब बंद हो गया है। अब सारा दबाव प्रशासन पर है। जहां पहले एक लाख पैकेट तैयार होते थे। अब 75 हजार हो पा रहे हैं। वहीं, सरकारी रसोई की संख्या घटकर मात्र 19 रह गई है।
सिमटती रसोई के मद्देनजर जरूरतमंदों को समय पर भोजन पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। पिछले दिनों तीन टेंडरों से शुरू हुई रसोई में भी रोजाना समस्याएं आ रही हैं। इसके लिए सीडीओ ने तीन मजिस्ट्रेट तैनात किए हैं। ये कमलेश गोयल (एसीएम-प्रथम), सुनीता (एसीएम-द्वितीय), संदीप (एसीएम- तृतीय) रोजाना निरीक्षण की रिपोर्ट देंगे।
ये है प्रमुख समस्याएं
बढ़ती गर्मी के चलते एक रसोई में दस हजार पैकेट खाना तैयार करना मुश्किल हो रहा है। पिछले दिनों सीडीओ के निरीक्षण में अतिथि बैंक्वेट हॉल में पैकेट समय से तैयार नहीं होने की तथ्य सामने आया था। बढ़ते तापमान के कारण खाना खराब होने की शिकायतें आ रही हैं। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज वैन की प्रशासन योजना नहीं बना पाया है। हालांकि, इस समस्या को दूर करने के लिए खाद्य विभाग की टीम को सीडीओ ने निर्देश दिए हैं। वहीं, पैकिंग में उपयोग की जा रही थाली बहुत हल्की है। जिससे पैकिंग करते समय खाना नीचे गिर जाता है। वहीं, रसोई में जल्दी खाना बनाने के लिए 100 से अधिक लोगों को लगाया है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग नहीं बन पा रही है। हालांकि टेंडर में 100 की संख्या तय थी।
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42 में से रह गई मात्र 22
लॉकडाउन की शुरुआत में स्वयंसेवी और सरकारी संस्थाओं की 42 रसोई थीं। अब ये घटकर मात्र 22 रह गई हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं में सिर्फ चौधरी चरण सिंह विवि, राधा स्वामी सत्संग, सबकी रसोई में करीब पांच हजार पैकेट तैयार किए जा रहे हैं।
सोमवार को देनी है कोविड टेस्ट रिपोर्ट
चार में से तीन स्थानों पर शुरू हुई सामुदायिक रसोई के सभी कर्मियों के कोविड टेस्ट किए जाने हैं। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया है। सोमवार को सभी कर्मचारियों की रिपोर्ट सीडीओ को सौंपी जानी है।
बुधवार की रिपोर्ट
स्वयंसेवी संस्था -3 कुल पैकेट - 5260
सरकारी रसोई (ब्लॉक और शहर ) - 19 कुल पैकेट - 71446
पिछले तीन दिनों में काफी समस्याएं थीं परंतु इनका निस्तारण किया जा रहा है। मैंने नोटिस भी जारी किया है। अब इसके लिए मजिस्ट्रेट भी तैनात कर दिए हैं। ये रोजाना रिपोर्ट देंगे।- ईशा दुहन, मुख्य विकास अधिकारी
इनसेट
सामुदायिक रसोई का टेंडर जारी करने में प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है। ऐसे लोगों को टेंडर दिया जिन्हें खाना बनाने का अनुभव नहीं था। हालांकि अधिकारी इसके पीछे रेट कम होने की बात कर रहे हैं। हालांकि भोजन की क्वालिटी और सर्विस दोनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। टेंडर कमेटी के सामने एक प्रस्ताव रखा था कि 80,000 पैकेट खाना बनना है। कम से कम आठ रसोई संचालित कराई जाएं। जिससे सर्विस आसानी से हो सके।
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सिमटती रसोई के मद्देनजर जरूरतमंदों को समय पर भोजन पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। पिछले दिनों तीन टेंडरों से शुरू हुई रसोई में भी रोजाना समस्याएं आ रही हैं। इसके लिए सीडीओ ने तीन मजिस्ट्रेट तैनात किए हैं। ये कमलेश गोयल (एसीएम-प्रथम), सुनीता (एसीएम-द्वितीय), संदीप (एसीएम- तृतीय) रोजाना निरीक्षण की रिपोर्ट देंगे।
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ये है प्रमुख समस्याएं
बढ़ती गर्मी के चलते एक रसोई में दस हजार पैकेट खाना तैयार करना मुश्किल हो रहा है। पिछले दिनों सीडीओ के निरीक्षण में अतिथि बैंक्वेट हॉल में पैकेट समय से तैयार नहीं होने की तथ्य सामने आया था। बढ़ते तापमान के कारण खाना खराब होने की शिकायतें आ रही हैं। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज वैन की प्रशासन योजना नहीं बना पाया है। हालांकि, इस समस्या को दूर करने के लिए खाद्य विभाग की टीम को सीडीओ ने निर्देश दिए हैं। वहीं, पैकिंग में उपयोग की जा रही थाली बहुत हल्की है। जिससे पैकिंग करते समय खाना नीचे गिर जाता है। वहीं, रसोई में जल्दी खाना बनाने के लिए 100 से अधिक लोगों को लगाया है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग नहीं बन पा रही है। हालांकि टेंडर में 100 की संख्या तय थी।
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42 में से रह गई मात्र 22
लॉकडाउन की शुरुआत में स्वयंसेवी और सरकारी संस्थाओं की 42 रसोई थीं। अब ये घटकर मात्र 22 रह गई हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं में सिर्फ चौधरी चरण सिंह विवि, राधा स्वामी सत्संग, सबकी रसोई में करीब पांच हजार पैकेट तैयार किए जा रहे हैं।
सोमवार को देनी है कोविड टेस्ट रिपोर्ट
चार में से तीन स्थानों पर शुरू हुई सामुदायिक रसोई के सभी कर्मियों के कोविड टेस्ट किए जाने हैं। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया है। सोमवार को सभी कर्मचारियों की रिपोर्ट सीडीओ को सौंपी जानी है।
बुधवार की रिपोर्ट
स्वयंसेवी संस्था -3 कुल पैकेट - 5260
सरकारी रसोई (ब्लॉक और शहर ) - 19 कुल पैकेट - 71446
पिछले तीन दिनों में काफी समस्याएं थीं परंतु इनका निस्तारण किया जा रहा है। मैंने नोटिस भी जारी किया है। अब इसके लिए मजिस्ट्रेट भी तैनात कर दिए हैं। ये रोजाना रिपोर्ट देंगे।- ईशा दुहन, मुख्य विकास अधिकारी
इनसेट
सामुदायिक रसोई का टेंडर जारी करने में प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है। ऐसे लोगों को टेंडर दिया जिन्हें खाना बनाने का अनुभव नहीं था। हालांकि अधिकारी इसके पीछे रेट कम होने की बात कर रहे हैं। हालांकि भोजन की क्वालिटी और सर्विस दोनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। टेंडर कमेटी के सामने एक प्रस्ताव रखा था कि 80,000 पैकेट खाना बनना है। कम से कम आठ रसोई संचालित कराई जाएं। जिससे सर्विस आसानी से हो सके।