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न्यूट्रिमा हॉस्पिटल में टेक्नीशियन की मौत, हत्या का आरोप लगाकर परिजनों का हंगामा
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मेरठ। न्यूट्रिमा हॉस्पिटल में टेक्नीशियन की मौत पर बखेड़ा हो गया। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। वहीं अस्पताल मैनेजर और स्टाफ ने मामले को खुदकुशी बताया। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कार्रवाई करने की बात कही है। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
बिजनौर के शेरकोट थानाक्षेत्र के कांधला शहजादपुर गांव निवासी फतेह सिंह सैनी (25) पुत्र परशुराम गढ़ रोड पर न्यूट्रिमा हॉस्पिटल में दो साल से लैब टेक्नीशियन था। शुक्रवार सुबह फतेह सिंह का शव ऑपरेशन थिएटर में पड़ा मिला। सूचना पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। बाद में परिजन भी अस्पताल पहुंचे। स्टाफ ने बताया कि फतेह सिंह ने रात में खुद को बेहोश होने का इंजेक्शन लगा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने हत्या का आरोप लगा हंगामा कर दिया। सीओ सिविल लाइन देवेश सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
फोन पर मंगेतर से कर रहा था बात
अस्पताल के एमडी डॉ. संदीप गर्ग का कहना है कि फतेह सिंह ने रात में अपनी मंगेतर से 30 बार फोन पर बात की। रात 1:30 बजे जब स्टाफ सोने के लिए जाने लगा तो उसने कहा कि मुझे निजी बातें करनी है। इसके बाद वह ओटी में चला गया। वहां उसने बेहोशी वाला इंजेक्शन लगा लिया। मरीज को यह इंजेक्शन देने के बाद कृत्रिम रूप से सांस दिलाई जाती है। सांस लेने की मशीन ना लगाई जाए तो व्यक्ति पैरालाइज हो जाता है। उसकी मौत भी हो सकती है। फतेह सिंह लैब टेक्नीशियन था, उसे इस बात की जानकारी थी। इंजेक्शन और सिरिंज मौके पर पड़े मिले हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
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बिजनौर के शेरकोट थानाक्षेत्र के कांधला शहजादपुर गांव निवासी फतेह सिंह सैनी (25) पुत्र परशुराम गढ़ रोड पर न्यूट्रिमा हॉस्पिटल में दो साल से लैब टेक्नीशियन था। शुक्रवार सुबह फतेह सिंह का शव ऑपरेशन थिएटर में पड़ा मिला। सूचना पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। बाद में परिजन भी अस्पताल पहुंचे। स्टाफ ने बताया कि फतेह सिंह ने रात में खुद को बेहोश होने का इंजेक्शन लगा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने हत्या का आरोप लगा हंगामा कर दिया। सीओ सिविल लाइन देवेश सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
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फोन पर मंगेतर से कर रहा था बात
अस्पताल के एमडी डॉ. संदीप गर्ग का कहना है कि फतेह सिंह ने रात में अपनी मंगेतर से 30 बार फोन पर बात की। रात 1:30 बजे जब स्टाफ सोने के लिए जाने लगा तो उसने कहा कि मुझे निजी बातें करनी है। इसके बाद वह ओटी में चला गया। वहां उसने बेहोशी वाला इंजेक्शन लगा लिया। मरीज को यह इंजेक्शन देने के बाद कृत्रिम रूप से सांस दिलाई जाती है। सांस लेने की मशीन ना लगाई जाए तो व्यक्ति पैरालाइज हो जाता है। उसकी मौत भी हो सकती है। फतेह सिंह लैब टेक्नीशियन था, उसे इस बात की जानकारी थी। इंजेक्शन और सिरिंज मौके पर पड़े मिले हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
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