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सिस्टम की लापरवाही : शहर के नाले बने मौत के कुएं

Sun, 25 Jan 2026 03:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 03:03 AM IST
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Systemic negligence: City drains become death wells
सम्राट पैलेस की पुलिया के पास नाले के किनारे नहीं है बनी बाउंड्री। .......... संवाद.......... क
आबूलेन पर शुक्रवार को ई-रिक्शा चालक सनी की मौत महज एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। इस घटना के अगले ही दिन शनिवार को जब अमर उजाला टीम ने शहर के प्रमुख नालों की पड़ताल की तो स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। शहरभर में खुले, जर्जर और असुरक्षित नाले राहगीरों के लिए जानलेवा बने हुए हैं लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
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आबूनाला: सुरक्षा के नहीं हैं इंतजाम, अंधेरे ने ली जान
टीम ने सबसे पहले उस आबूनाले का जायजा लिया जहां सिस्टम की नाकामी ने सनी की जान ले ली। यहां नाले की दीवारें कई जगहों से पूरी तरह ध्वस्त हैं। न कोई रेलिंग, न कोई चेतावनी बोर्ड और न ही सुरक्षा की कोई दीवार। रात होते ही यह पूरा इलाका घुप अंधेरे में डूब जाता है। शुक्रवार को यही अंधेरा और सुरक्षा इंतजामों का अभाव सनी के लिए काल बन गया।
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ओडियन नाला: सड़क कहां खत्म, नाला कहां शुरू... पता ही नहीं

ओडियन नाले की स्थिति तो और भी भयावह और शर्मनाक है। यहां नाला सड़क से इस कदर सटा हुआ है कि एक इंच की भी चूक जिंदगी खत्म कर सकती है। सुरक्षा के नाम पर यहां शून्य है। बरसात में जब नाला उफनता है तो सड़क और नाले का फर्क मिट जाता है। राहगीर सड़क पर नहीं बल्कि मौत के मुहाने पर चल रहे होते हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यहां आए दिन लोग फिसलकर चोटिल होते हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।
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दिल्ली रोड : बच्चों की जान जा चुकी, फिर भी नहीं जागा सिस्टम

दिल्ली रोड की स्थिति प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यह वही इलाका है जहां पहले भी नाले में गिरकर मासूम बच्चों की जान जा चुकी है लेकिन सालों बाद भी हालात जस के तस हैं। नालों पर रखे स्लैब टूटे हुए हैं जो किसी भी वक्त एक और हादसे को न्योता दे रहे हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यहां पैदल चलना जान हथेली पर रखने जैसा है।



हादसे के बाद ही जागते हैं जिम्मेदार

शहर के लोगों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि नगर निगम केवल हादसा होने के बाद जागता है। लोगों का कहना है कि हादसे के बाद अधिकारियों का निरीक्षण और बयानबाजी होती है लेकिन कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। नालों की नियमित मरम्मत, ढक्कन लगवाना और रेलिंग जैसी बुनियादी जरूरतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।




शहर के नालों की सफाई के दौरान क्षतिग्रस्त दीवारों का भी मुआयना किया गया था। जहां-जहां पर नाले के किनारे दीवार या रेलिंग नहीं है वहां सुरक्षा की दृष्टि से कार्य कराया जाएगा। निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करा दिया। - डॉ. अमर सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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