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पांच साल बाद भी कॉलेज को नहीं मिली मान्यता
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 03 Feb 2016 02:50 AM IST
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सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को शुरू हुए पांच साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक मान्यता नहीं मिली है। कॉलेज में शिक्षक केवल खानापूर्ति के लिए हैं। केवल नाम के लिए कक्षाएं चल रही हैं। मानक से कम नियुक्ति के चलते वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया ने अभी तक संस्थान को मान्यता नहीं दी है। कुलपति की लापरवाही के कारण डिग्री पूरी कर चुके 23 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
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कृषि विवि में जब वेटनरी कॉलेज की शुरुआत हुई तो लगा कि विवि को नयी पहचान मिलेगी। वेटनरी के क्षेत्र में वेस्ट यूपी ही नहीं अन्य प्रदेशों के बच्चे भी यहां शिक्षा लेने आएंगे। जो छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर यहां आए थे, उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि बिना मान्यता के उनकी डिग्री पूरी हो जाएगी।
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अपने जीवन के चार अहम साल और लाखों रुपये खर्च करने बाद भी छात्र वैध और अवैध डिग्री की लड़ाई लड़ रहे हैं। कॉलेज में शैक्षिक सत्र 2011 में शुरू हो गया। उस समय वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सशर्त मान्यता दे दी। लेकिन इसके बावजूद भी विवि प्रशासन मानकों को पूरा नहीं कर सका।
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वर्ष 2008 में टीचिंग और नॉन टीचिंग की 122 पोस्ट स्वीकृत की गई थी, वह पोस्ट भी अभी तक नहीं भरी गईं। शासन ने एक माह पहले ही 23 पोस्ट और स्वीकृत कर दी हैं। विवि के पास तमाम संसाधन होने के बाद भी पदों को नहीं भरा जा रहा है।
ये हैं मानक
वीसीआई के मानक के अनुसार मान्यता के लिए 87 का स्टाफ होना चाहिए। इतना स्टाफ होने से भी कॉलेज को मान्यता मिल जाती है। सबसे ज्यादा अहम रोल प्रोफेसर का है। वेटनरी कॉलेज में अगर एक प्रोफेसर की भी नियुक्ति हो जाए तो यहां पर मान्यता का रास्ता साफ हो जाएगा।
एचएस गौड़ भी हो गए फेल
वर्तमान वीसी डॉ. एचएस गौड़ का कार्यालय 18 फरवरी को समाप्त हो रहा है। उन्होंने भी तीन साल में पद भरने के लिए कोई पहल नहीं की। शासन स्तर से पद स्वीकृत होने के बाद भी नियुक्ति नहीं कर सके। वीसी को इतनी पावर होती है कि वह अधिकार सीज होने पर भी राजभवन से अनुमति लेकर ऐसी स्थिति में नियुक्ति कर सकता है। लेकिन वह भी छात्रों के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं।