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450 करोड़ खर्च, फिर भी सड़कों पर बह रहा सीवर
Mon, 06 May 2019 03:37 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Mon, 06 May 2019 03:37 AM IST
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18 लाख की आबादी वाले शहर से प्रतिदिन 310 एमएलडी सीवर निकलता है, जिसमें से लगभग 25 एमएलडी पाइप लाइन में बहता है और बाकी खुले नालों में बह रहा है। सीवर के कारण ही बरसात के दिनों में शहर टापू बन जाता है। बारिश के पानी के साथ नालों में बहता सीवर सीधे काली नदी पहुंचता है, जो गंगा तक जाता है। इससे सीधे-सीधे सरकार की नमामि गंगे परियोजना को पलीता लग रहा है। सरकारी मशीनरी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) परियोजना को चलाने की बजाय धराशायी करने में जुटी है। महानगर में अकेले जल निगम की सीवर परियोजना की बात करें तो 450 करोड़ से अधिक खर्च होने के बाद भी व्यवस्था चौपट है।
सरकार ने महानगर को सीवर से मुक्त कराने के लिए जागृति विहार में काली नदी किनारे 72 एमएलडी का एसटीपी लगाया है। प्लांट तक सीवर पहुंचाने के लिए शहर में सीवर लाइन भी डाली गयी, जिस पर लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च हुए। उसके बाद भी एसटीपी तक 25 एमएलडी सीवर भी नहीं पहुंच रहा है। जल निगम द्वारा प्लांट तक पर्याप्त मात्रा में सीवर पहुंचाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है।
नहीं जुड़ी लोहियानगर में पाइप लाइन
लोहियानगर में एक किसान ने पिछले छह साल से सीवर की पाइप लाइन रोकी हुई है। प्रदेश की सरकार बदली, अधिकारी बदले, लेकिन सीवर सिस्टम नहीं बदला। इसके लिए जल निगम के साथ जिला प्रशासन भी जिम्मेदार है। इसी प्रकार सीवर की कई पाइपलाइन आठ-आठ साल से दबी पड़ी हैं, लेकिन संचालित नहीं हो रही हैं।
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पिछले साल प्रमुख सचिव ने खोली थी पोल
काली नदी किनारे लगे एसटीपी के संचालन की पोल पिछले साल अक्तूबर माह में निरीक्षण के लिए आए प्रमुख सचिव नगर विकास ने खोली थी। उन्हें एसटीपी के कई स्टार्टर पर जंग लगा मिला था। संचालन ठीक से नहीं होता पाया था। साल में दो-तीन बार बिजली के अभाव में प्लांट बंद होने की भी शिकायत हुई थी। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को फटकार लगाई, लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ।
बीमार पड़े एमडीए के एसटीपी
एमडीए ने श्रद्धापुरी फेज वन और टू, गंगानगर, मेजर ध्यानचंद नगर, पल्लवपुरम, लोहियानगर आदि कालोनियों में 12 एसटीपी लगा रखे हैं, जिनकी क्षमता 107 एमएलडी सीवर को ट्रीट करने की है। इन प्लांट को लगाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए। संचालन में भी लाखों रुपये प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद कई सीवर लाइन बंद पड़ी हैं। गंगानगर में तो सीवर प्लांट तक नहीं पहुंच पाता, बाहर बह रहा है।
कमेला जोन में सीवर लाइन डाली जा रही है। यह बात सही है कि 72 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी तक पर्याप्त सीवर नहीं पहुंच रहा है। लोहियानगर में रुकी सीवर लाइन विवादों में है। कमेला जोन से मिलने वाला सीवर शीघ्र ही एसटीपी तक पहुंच जाएगा, काम चल रहा है।
- रमेश चंद्र, परियोजना प्रबंधक जल निगम
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सरकार ने महानगर को सीवर से मुक्त कराने के लिए जागृति विहार में काली नदी किनारे 72 एमएलडी का एसटीपी लगाया है। प्लांट तक सीवर पहुंचाने के लिए शहर में सीवर लाइन भी डाली गयी, जिस पर लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च हुए। उसके बाद भी एसटीपी तक 25 एमएलडी सीवर भी नहीं पहुंच रहा है। जल निगम द्वारा प्लांट तक पर्याप्त मात्रा में सीवर पहुंचाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है।
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नहीं जुड़ी लोहियानगर में पाइप लाइन
लोहियानगर में एक किसान ने पिछले छह साल से सीवर की पाइप लाइन रोकी हुई है। प्रदेश की सरकार बदली, अधिकारी बदले, लेकिन सीवर सिस्टम नहीं बदला। इसके लिए जल निगम के साथ जिला प्रशासन भी जिम्मेदार है। इसी प्रकार सीवर की कई पाइपलाइन आठ-आठ साल से दबी पड़ी हैं, लेकिन संचालित नहीं हो रही हैं।
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पिछले साल प्रमुख सचिव ने खोली थी पोल
काली नदी किनारे लगे एसटीपी के संचालन की पोल पिछले साल अक्तूबर माह में निरीक्षण के लिए आए प्रमुख सचिव नगर विकास ने खोली थी। उन्हें एसटीपी के कई स्टार्टर पर जंग लगा मिला था। संचालन ठीक से नहीं होता पाया था। साल में दो-तीन बार बिजली के अभाव में प्लांट बंद होने की भी शिकायत हुई थी। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को फटकार लगाई, लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ।
बीमार पड़े एमडीए के एसटीपी
एमडीए ने श्रद्धापुरी फेज वन और टू, गंगानगर, मेजर ध्यानचंद नगर, पल्लवपुरम, लोहियानगर आदि कालोनियों में 12 एसटीपी लगा रखे हैं, जिनकी क्षमता 107 एमएलडी सीवर को ट्रीट करने की है। इन प्लांट को लगाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए। संचालन में भी लाखों रुपये प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद कई सीवर लाइन बंद पड़ी हैं। गंगानगर में तो सीवर प्लांट तक नहीं पहुंच पाता, बाहर बह रहा है।
कमेला जोन में सीवर लाइन डाली जा रही है। यह बात सही है कि 72 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी तक पर्याप्त सीवर नहीं पहुंच रहा है। लोहियानगर में रुकी सीवर लाइन विवादों में है। कमेला जोन से मिलने वाला सीवर शीघ्र ही एसटीपी तक पहुंच जाएगा, काम चल रहा है।
- रमेश चंद्र, परियोजना प्रबंधक जल निगम