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बाबा टिकैत की जयंती पर विशेष: पढ़िए महानायक के संघर्ष की पूरी कहानी, इस आंदोलन से दुनिया में छा गया था नाम

Fri, 06 Oct 2023 12:56 PM IST
कपिल kapil जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मेरठ
जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 06 Oct 2023 12:56 PM IST
सार

Meerut News : चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत वास्तव में किसानों के बहुत बड़े नेता थे। उनके जीवन का उद्देश्य किसानों को इतना जागरूक करना था कि किसान की आवाज भी हुक्मरानों तक पहुंच सके। किसानों को वाजिब हक दिलाने के लिए तमाम बड़े राजनेताओं से समय-समय पर टकराव मोल लिया।

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Special on birth anniversary: Read complete struggle story of Baba Chaudhary Mahendra Singh Tikait
बाबा महेंद्र सिंह टिकैत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को ‘महात्मा बाबा’ की उपाधि उनके संघर्षों के कारण मिली। देशभर में किसान, मजदूर और मजलूमों के हक के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया था, उन्हें हमेशा महानायक की भूमिका में याद किया जाता है। मेरठ कमिश्नरी पर 27 दिन तक चले आंदोलन ने दुनिया में बाबा को नई पहचान दी थी।

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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत वास्तव में किसानों के बहुत बड़े नेता थे। उनके जीवन का उद्देश्य किसानों को इतना जागरूक करना था कि किसान की आवाज भी हुक्मरानों तक पहुंच सके। किसानों को वाजिब हक दिलाने के लिए तमाम बड़े राजनेताओं से समय-समय पर टकराव मोल लिया।

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टिकैत ने अपने किसान आंदोलन को कभी भी किसी राजनीतिक दल से जोड़ने नहीं दिया, क्योंकि वे जानते थे कि आंदोलन को किसी राजनीतिक दल से जोड़ने से आंदोलन टूटेगा या उसमें हिंसा होगी। देश ही नहीं पूरी दुनिया में मेरठ और भाकियू एक साथ सुर्खियों में रहे थे। किसानों की दुर्दशा को देख कर टिकैत इतना व्यथित हुए थे कि उन्होंने 27 जनवरी 1988 को हजारों किसानों के साथ मेरठ में डेरा डाल दिया। यह आंदोलन 23 फरवरी 1988 तक चला। वो 27 दिन शायद ही कोई मेरठवासी भूल पाया हो।

आंदोलन की आंच लखनऊ और दिल्ली के हुक्मरानों तक पहुंची थी। कड़ाके की ठंड के कारण सात किसानों की मौत हो गई थी। इस आंदोलन से टिकैत किसानों के मसीहा बने और देश दुनिया में नाम बुलंद हुआ। मेरठ के लोगों के जहन में आज भी आंदोलन की याद ताजा है। इसके बाद टिकैत ने 25 अक्टूबर 1988 को नई दिल्ली स्थित वोट क्लब पर आंदोलन का बिगुल फूंका। हालांकि उनके नाम किसानों के हक के लिए अनगिनत आंदोलनों की किताब भरी है। लेकिन मेरठ और वोट क्लब के दो आंदोलनों से टिकैत की ख्याति दुनिया तक हुई।

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कंधे पर चादर और हुक्का ताउम्र रहीं पहचान
बालियान खाप के मुखिया चौहल सिंह टिकैत और माता मुख्त्यारी देवी के यहां छह अक्तूबर 1935 को जन्मे महेंद्र सिंह का जन्म सिसौली में हुआ था। पिता के निधन के बाद बचपन में बालियान खाप की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। उन्होंने 1950 से 2010 तक सर्वखाप की कई महापंचायतों में सामाजिक कुरीतियों नशाखोरी, भ्रूण हत्या, मृत्यु भोज और दहेज प्रथा पर नियंत्रण को अभियान चलाया। कंधे पर चादर, पैरों में हवाई चप्पल और सिर पर टोपी ने उन्हें खास पहचान दी। हुक्का जीवनभर उनका साथी रहा।

किसान मसीहा के महत्वपूर्ण आंदोलन
-एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी बिजलीघर पर हुंकार
-11 अगस्त 1987 को तत्कालीन यूपी के सीएम वीर बहादुर सिसौली आए
-27 जनवरी 1988 से मेरठ में 27 दिन का विशाल धरना
- 6 मार्च 1988 से रजबपुर मुरादाबाद में 110 दिवसीय धरना
- 25 अक्तूबर 1988 से 31 अक्तूबर तक वोट क्लब दिल्ली में धरना प्रदर्शन
-3 अगस्त 1989 को नईमा कांड में भोपा नहर पर 39 दिवसीय धरना

किसान बोले...
बाबा किसानों के मसीहा थे। उनकी एक आवाज पर हजारों किसान एकत्र हो जाते थे। उनके साथ करीब 33 बार आंदोलन को लेकर जेल में भी साथ गए। - विजयपाल घोपला, वरिष्ठ किसान नेता
बाबा के नाम से ही सरकारें हिल जाती थीं। कई बार तो प्रदेश के सीएम तक को उनसे आकर मिलना पड़ता था। उनके साथ सभी किसान आंदोलन में साथ दिया। - जगबीर सिंह, किसान नेता
बाबा को जाति धर्म से कोई मतलब नहीं था। वह किसानों के मसीहा थे। किसानों की जाति धर्म को उन्होंने कभी नहीं देखा। - बब्लू सिसौला, किसान
बाबा टिकैत की जयंती जागृति दिवस के रूप में मनाई जाएगी। इस मौके पर गन्ना भवन पर कार्यक्रम का आयोजन होगा। - अनुराग चौधरी, जिला अध्यक्ष भाकियू

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गन्ना भवन पर पंचायत आज, तैयारी में जुटे कार्यकर्ता
भारतीय किसान यूनियन की ओर से बाबा की जंयती जागृति दिवस के रूप में मनाई जाएगी। संगठन की ओर से गन्ना भवन पर हवन होगा। इसके बाद पंचायत होगी। कार्यक्रम की तैयारी को लेकर जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ता बृहस्पतिवार को भी गन्ना भवन पर जुटे रहे। हवन के उपंरात आयोजित पंचायत में किसानों की गन्ना भुगतान की समस्या, सट्टा प्रदर्शन में सही प्रकार से संशोधन न होने, मिलों के सेंटर बदलवाए जाने आदि मांगों को उठाया जाएगा।

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