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एसपी सिटी करेंगे सवाल पर बवाल की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2016 02:44 AM IST
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मंडलायुक्त से शिकायत करने पहुंचे भाजपाई
- फोटो : अमर उजाला
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जिला पंचायत कार्यालय में बोर्ड बैठक के दौरान सवाल को लेकर हुए बवाल प्रकरण की जांच एसएसपी ने एसपी सिटी को सौंपी है। एसपी सिटी को जांच मिलने पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की नींद उड़ने लगी है। माना जा रहा है कि एक सप्ताह में वे अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।
सीओ ने किए जांच से हाथ खड़े:
इस बवाल के बाद जिपं सदस्य कुलविंदर सिंह ने सपा नेता अतुल प्रधान, एएमए प्रदीप कुमार, राजदीप विकल, अनुज जावला और संजय विकल के अलावा पचास अज्ञात लोगों के खिलाफ नौचंदी थाने में तहरीर दी थी। जिसकी जांच सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार कर रहे थे। लेकिन अब सीओ ने उच्च अफसरों के सामने इसे राजनीतिक मामला बताकर जांच से इंकार कर दिया। जिसके बाद एसपी सिटी को जांच सौंपी गई है।
फंस सकते हैं एएमए
एक पुलिस अधिकारी की मानें तो जांच में एएमए की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। इंस्पेक्टर नौचंदी ने जब बाहरी लोगों के आने का विरोध किया था तो एएमए प्रदीप कुमार ने इंस्पेक्टर से कहा था कि यह दर्शक दीर्घा है। जिसमें बाहरी लोगों क ो आने से न रोका जाए। बवाल के बाद भी एएमए यह कहते रहे कि उनके सामने तो कुछ हुआ ही नहीं है। एसपी सिटी ने मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों के बयान लिए तो एएमए फंस सकते हैं।
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जांच के बिंदु
- बोर्ड बैठक के दौरान बाहरी लोग किसके आदेश पर अंदर घुसे
- क्या एएमए ने इंस्पेक्टर को बाहरी लोगों को रोकने के निर्देश दिए या नहीं
- सवाल करने पर सदस्यों से किन लोगों ने मारपीट कर हंगामा किया
- इंस्पेक्टर नौचंदी के रोकने पर हंगामा और हाथापाई करने वाले लोग कौन थे
- फोटो में जो लोग पुलिस से हाथापाई कर रहे हैं उनका जिपं क ार्यालय में क्या काम था
- पुलिस को यदि बखेड़ा का पहले से अंदेशा था तो कहां लापरवाही रही
भाजपाइयों ने जताया कमिश्नर से विरोध
जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में शनिवार को हुए हंगामे और बवाल पर आक्रोशित भाजपाइयों ने सोमवार को मंडलायुक्त से शिकायत दर्ज करायी। भाजपाइयों की मांग पर मंडलायुक्त ने जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजने और उनकी मांग से शासन को अवगत कराने का आश्वासन दिया।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक रविंद्र भड़ाना, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा के नेतृत्व में जिला पंचायत सदस्य कमिश्नर आलोक सिन्हा से मिले। सदस्यों ने उन्हें बैठक में जो कुछ हुआ, उसका वर्णन किया। सांसद ने आरोप लगाया कि यह सरासर सत्ता की दबंगई है। पुलिस देखती रही और सपा नेता अतुल प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान के इशारे पर बाहरी तत्व बैठक में गालीगलौज और मारपीट करते रहे।
जिलाध्यक्ष ने मांगपत्र देते हुए कहा कि बोर्ड बैठक में जो भी प्रस्ताव हुए हैं, उन्हें निरस्त किया जाये, क्योंकि बैठक शुरू होते ही हंगामा मारपीट शुरू हो गयी थी और सदस्य बैठक का बहिष्कार करके चले आये थे। इस मामले में जिपं सदस्य कुलविंदर सिह की तरफ से जो तहरीर दी गयी है, उस पर रिपोर्ट दर्ज करायी जाये।
जब तक जिला पंचायत का नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक बैठक बचत भवन या विकास भवन में करायी जाये और बैठक की वीडियो रिकार्डिंग भी होनी चाहिए। इस तमाम बवाल के पीछे अपर मुख्य अधिकारी प्रदीप गुप्ता की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध है, उनकी जांच कराने के साथ ही अविलंब यहां से हटाया जाये। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला, रोहताश पहलवान, मुकेश चरला, नितिन खटीक, अनुज वाल्मीकि, सत्यपाल सिंह और सपना हुड्डा के पति प्रदीप हुड्डा मौजूद रहे।
कमिश्नर से नहीं मिल सकीं सीमा प्रधान
भाजपाइयों के कमिश्नर से मिलकर जाने के थोड़ी ही देर बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान भी कमिश्नर कार्यालय पहुंचीं, लेकिन जैसे ही उनकी गाड़ी कमिश्नर कार्यालय पहुंची, वैसे ही कमिश्नर वीडियो कांफ्रेंसिंग के निकल निकल चुके थे। जिस कारण उनकी मुलाकात कमिश्नर से नहीं हो सकी।
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सीओ ने किए जांच से हाथ खड़े:
इस बवाल के बाद जिपं सदस्य कुलविंदर सिंह ने सपा नेता अतुल प्रधान, एएमए प्रदीप कुमार, राजदीप विकल, अनुज जावला और संजय विकल के अलावा पचास अज्ञात लोगों के खिलाफ नौचंदी थाने में तहरीर दी थी। जिसकी जांच सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार कर रहे थे। लेकिन अब सीओ ने उच्च अफसरों के सामने इसे राजनीतिक मामला बताकर जांच से इंकार कर दिया। जिसके बाद एसपी सिटी को जांच सौंपी गई है।
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फंस सकते हैं एएमए
एक पुलिस अधिकारी की मानें तो जांच में एएमए की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। इंस्पेक्टर नौचंदी ने जब बाहरी लोगों के आने का विरोध किया था तो एएमए प्रदीप कुमार ने इंस्पेक्टर से कहा था कि यह दर्शक दीर्घा है। जिसमें बाहरी लोगों क ो आने से न रोका जाए। बवाल के बाद भी एएमए यह कहते रहे कि उनके सामने तो कुछ हुआ ही नहीं है। एसपी सिटी ने मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों के बयान लिए तो एएमए फंस सकते हैं।
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जांच के बिंदु
- बोर्ड बैठक के दौरान बाहरी लोग किसके आदेश पर अंदर घुसे
- क्या एएमए ने इंस्पेक्टर को बाहरी लोगों को रोकने के निर्देश दिए या नहीं
- सवाल करने पर सदस्यों से किन लोगों ने मारपीट कर हंगामा किया
- इंस्पेक्टर नौचंदी के रोकने पर हंगामा और हाथापाई करने वाले लोग कौन थे
- फोटो में जो लोग पुलिस से हाथापाई कर रहे हैं उनका जिपं क ार्यालय में क्या काम था
- पुलिस को यदि बखेड़ा का पहले से अंदेशा था तो कहां लापरवाही रही
भाजपाइयों ने जताया कमिश्नर से विरोध
जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में शनिवार को हुए हंगामे और बवाल पर आक्रोशित भाजपाइयों ने सोमवार को मंडलायुक्त से शिकायत दर्ज करायी। भाजपाइयों की मांग पर मंडलायुक्त ने जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजने और उनकी मांग से शासन को अवगत कराने का आश्वासन दिया।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक रविंद्र भड़ाना, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा के नेतृत्व में जिला पंचायत सदस्य कमिश्नर आलोक सिन्हा से मिले। सदस्यों ने उन्हें बैठक में जो कुछ हुआ, उसका वर्णन किया। सांसद ने आरोप लगाया कि यह सरासर सत्ता की दबंगई है। पुलिस देखती रही और सपा नेता अतुल प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान के इशारे पर बाहरी तत्व बैठक में गालीगलौज और मारपीट करते रहे।
जिलाध्यक्ष ने मांगपत्र देते हुए कहा कि बोर्ड बैठक में जो भी प्रस्ताव हुए हैं, उन्हें निरस्त किया जाये, क्योंकि बैठक शुरू होते ही हंगामा मारपीट शुरू हो गयी थी और सदस्य बैठक का बहिष्कार करके चले आये थे। इस मामले में जिपं सदस्य कुलविंदर सिह की तरफ से जो तहरीर दी गयी है, उस पर रिपोर्ट दर्ज करायी जाये।
जब तक जिला पंचायत का नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक बैठक बचत भवन या विकास भवन में करायी जाये और बैठक की वीडियो रिकार्डिंग भी होनी चाहिए। इस तमाम बवाल के पीछे अपर मुख्य अधिकारी प्रदीप गुप्ता की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध है, उनकी जांच कराने के साथ ही अविलंब यहां से हटाया जाये। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला, रोहताश पहलवान, मुकेश चरला, नितिन खटीक, अनुज वाल्मीकि, सत्यपाल सिंह और सपना हुड्डा के पति प्रदीप हुड्डा मौजूद रहे।
कमिश्नर से नहीं मिल सकीं सीमा प्रधान
भाजपाइयों के कमिश्नर से मिलकर जाने के थोड़ी ही देर बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान भी कमिश्नर कार्यालय पहुंचीं, लेकिन जैसे ही उनकी गाड़ी कमिश्नर कार्यालय पहुंची, वैसे ही कमिश्नर वीडियो कांफ्रेंसिंग के निकल निकल चुके थे। जिस कारण उनकी मुलाकात कमिश्नर से नहीं हो सकी।