फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   so ki kursi par baithe

खुद को समझ बैठी थानेदार, थाने में बैठ सपा नेत्री ने चलाया हुक्म

Thu, 01 Sep 2016 02:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Thu, 01 Sep 2016 02:55 PM IST
विज्ञापन
so ki kursi par baithe
आयोग सदस्या - फोटो : अमर उजाला
 मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को शासन-प्रशासन के कार्यों में हस्तक्षेप न करने के निर्देश दिए हुए हैं। इस आदेश की धज्जियां सपा नेता ही उड़ा रहे हैं। ताजा मामला बुधवार का परीक्षितगढ़ थाने का है। जहां राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की सदस्य किरन आरसी जाटव ने थानाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर हुक्म चलाया। एसओ की गैर मौजूदगी में हेड मुंशी को तलब किया और दलित महिला की हत्या के केस की विवेचना से संबंधित अभिलेख देखे। करीब घंटेभर कुर्सी पर बैठकर पुलिसकर्मियों को निर्देश देने के बाद वह एस्कॉर्ट के साथ सिखेड़ा गांव चली गईं।
विज्ञापन

दरअसल, सिखेड़ा गांव निवासी दलित महिला की तीन दिन पूर्व ईख के खेत में गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। मृतका के पति ने अज्ञात में केस दर्ज कराया है। जबकि, महिला के मायके वाले पति पर ही हत्या का शक जता रहे हैं। मामला अभी उलझा हुआ है और विवेचना चल रही है। बुधवार को एससी-एसटी आयोग की सदस्य किरन अचानक थाने पहुंचीं। यहां जानकारी मिली कि थानाध्यक्ष किसी काम से कस्बे से बाहर हैं। इस पर वह थानाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ गईं। घंटी बजाकर हेड मुंशी और पुलिसकर्मियों को बुलाया। महिला हत्याकांड से संबंधित दस्तावेज दिखाने के निर्देश दिए। इस पर मुंशी ब्रह्मपाल सिंह ने पूरी रिपोर्ट दिखाते हुए केस की प्रगति बताई। किरन थानाध्यक्ष की कुर्सी पर करीब एक घंटे बैठी रहीं और तमाम सवाल किए। इसके बाद पुलिस एस्कॉर्ट के साथ ग्राम सिखेड़ा निकल गईं।
विज्ञापन


एसएसपी को किया फोन
सिखेड़ा गांव पहुंचकर किरन जाटव ने मृतका के परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी लेते हुए सांत्वना दी। मृतका के पति ने बताया कि पुलिस उस पर ही हत्या का शक जता रही है। हालांकि, उनमें कोई विवाद नहीं था। इस पर किरन ने एसएसपी को फोन कर घटना का सही खुलासा करने के लिए कहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह कहता है नियम
वरिष्ठ अधिवक्ता अमित दीक्षित के अनुसार हर अधिकारी की कुर्सी की मर्यादा होती है। पुलिस रेगुलेशन एक्ट भी कहता है कि किसी सियासी शख्स को थानाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार थाने के किसी सक्षम या भारसाधक अधिकारी या पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी को ही है। कोई जिम्मेदार राजनेता थाने पहुंचता है तो वह आगंतुक कक्ष में बैठकर जानकारी ले सकता है। थानाध्यक्ष के कार्यालय की बात हो तो आयोग का कोई सदस्य हो या अध्यक्ष या फिर मंत्री, थानाध्यक्ष की कुर्सी के दायें या बायें ही बैठ सकता है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed