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स्मॉग का वार...आंखों में हो रही जलन, फूलने लगीं सांसें, चिकित्सकों ने दी ये सावधानियां बरतने की सलाह

Fri, 06 Nov 2020 01:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 06 Nov 2020 01:35 AM IST
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Smog attack ... burning sensation in eyes, breath taking
रात 10 बजे भी छाया रहा धुआं। - फोटो : amar ujala
दिनोंदिन बढ़ रही स्मॉग की चादर लोगों की सेहत के लिए खतरनाक होती जा रही है। स्मॉग से आंखों में जलन, सांस संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी बीमारियां भी होती हैं।
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स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ ओजोन की गहरी परत बना लेते हैं।
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सर्दियों के दौरान जब भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है और हवा की गति कम होती है, यह धुआं और धुंध एक जगह स्थिर होकर स्मॉग बनाती है। सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है।
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जिला अस्पताल के नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ (ईएनटी) डॉ. बीपी कौशिक ने बताया कि स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर बुखार भी हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह होते हैं।

मेडिकल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेश कुमार ने बताया कि स्मॉग से आंखों की नमी प्रभावित होती है। इससे आंखों में चिकनाहट कम होने लगती है और सूखापन आने लगता है। आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना, सूजन, जलन, खुजली जैसी तमाम समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इससे बचने के लिए दिन में आंखों को कई बार धोएं। घर से निकलते समय गॉगल्स का प्रयोग जरूर करें। आई ड्रॉप के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें।

ये सावधानियां बरतें
- सुबह- शाम टहलने से बचें, घरों की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें
- बाहर से आने पर गुनगुने पानी से मुंह-आंखें और नाक साफ करें। हो सके तो भाप लें
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और रेग्युलर लें
 
आयुर्वेद में घरेलू नुस्खे अपनाएं
वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. बृज भूषण ने बताया कि आयुर्वेद के सहारे स्मॉग और प्रदूषण से आसानी से लड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि दूध या चाय में तुलसी, अदरक, लौंग, काली मिर्च उबाल कर पीने से गले की खराश ठीक हो जाएगी और प्रदूषित कण शरीर से बाहर निकल जाएंगे।

इसी तरह दूध में खजूर, छोटी पीपल, काली मिर्च और सौंठ उबाल कर पीने से इम्युनिटी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पहले से बने-बनाए 10-15 मिलीलीटर तुलसी के जूस को पानी मिलाकर दिन में दो बार लें। जूस आपकी सांस की नली या श्वसन तंत्र से प्रदूषक तत्व हटाने में सहायक होता है। रात के वक्त शहद के साथ त्रिफला लेना भी प्रदूषण के नुकसान से निपटने में कारगर होता है।

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