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गणित की गड़बड़ी से गड़बड़ाई स्मार्ट सिटी
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
Updated Sat, 19 Sep 2015 01:26 AM IST
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अच्छों-अच्छों की बुद्धि शून्य कर देने वाले गणित ने मेरठ के स्मार्ट सिटी बनने का गणित ही गड़बड़ा दिया। निगम के अधिकारियों का गणित इतना कच्चा रहा कि जलकल विभाग के व्यय को ही बढ़ाकर दिखा दिया। अब नए सिरे से गुणा-भाग हुआ तो इस गड़बड़ी का पता चला कि व्यय तो कम है।
नगरायुक्त द्वारा तैयार कराई गई इस नई रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है कि मेरठ का दावा अब रायबरेली से और भी कहीं ज्यादा सशक्त है। अब देखना है कि 21 सितंबर को लखनऊ में होने वाली बैठक में अफसर मेरठ के काटे गए नंबरों को बढ़ाते हैं या नहीं।
कैसे हुई ये गड़बड़ी
विगत 29 जुलाई को लखनऊ में स्मार्ट सिटी के चयन को लेकर बैठक में नगर निगम मेरठ की तरफ से दी गई रिपोर्ट में जलकल विभाग के आय-व्यय का लेखा-जोखा भी दिया गया था। उसमें आय से ज्यादा खर्च दिखाया गया था। इसमें आय 604.97 लाख जबकि व्यय दर्शाया गया था 1791.31 लाख।
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आय से कहीं ज्यादा व्यय होने के कारण चयन कमेटी ने पांच नंबर काट लिए थे। अब नगरायुक्त ने जब दोबारा से लेखा-जोखा कराया तो पता चला कि आय तो उतनी ही है, लेकिन व्यय तो 1491.64 लाख ही है। जबकि इसे गलती से 1791.31 लाख दर्शाया गया था। अब व्यय घटा है तो जाहिर है कि नंबर भी बढ़ेंगे।
माना जा रहा है कि इस नए गुणा-भाग से मेरठ नगर निगम अब 10 नंबरों का हकदार है। यदि अधिकारी 10 में से पांच नंबर भी दे देते हैं तो मेरठ का दावा वैसे ही रायबरेली से और ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
75 नहीं 85 का हकदार
स्मार्ट सिटी के लिए मेरठ 75 नहीं, 85 अंकों का हकदार है। निगम अधिकारियों की बड़ी लापरवाही ने मेरठ को स्मार्ट सिटी की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
नंबरों की इस गड़बड़ी से मेरठ-रायबरेली को 75-75 अंक थमाए गए थे। यही कारण रहा कि मेरठ को स्मार्ट सिटी के लिए स्वयं को साबित करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। शहर की जनता सड़कों पर है। जनप्रतिनिधियों को घेरा जा रहा है।
अब शासन पर निर्भर
21 सितंबर को लखनऊ में स्मार्ट सिटी को लेकर होने वाली बैठक में अगर मेरठ नगर निगम प्रशासन को अपनी सही आंकड़ेबाजी समझाने और लेखाजोखा रखने का अवसर मिला तो मजबूर होकर उप्र सरकार को मेरठ के पक्ष में ही निर्णय लेना होगा।
कोट
गत 29 जुलाई को लखनऊ में आयोजित प्रजेंटेशन के दौरान नगर निगम मेरठ द्वारा जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। उसमें जलकल विभाग की आय और व्यय का ब्यौरे में थोड़ी त्रुटि थी। जिसको अब ठीक कर लिया गया है। अगर 21 सितंबर को पक्ष रखने का अवसर मिला तो जरूर रखा जाएगा। क्योंकि मेरठ कम से कम 80 अंकों का हकदार है।
-उमेश प्रताप, नगरायुक्त।
----
29 जुलाई को बैठक में तत्कालीन नगरायुक्त द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में त्रुटि थी। अब रिपोर्ट का अवलोकन किया गया तो त्रुटि सामने आ गयी। नगरायुक्त ने पूरी फाइल तैयार करा ली है। इसकी एक कॉपी हमने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और उप्र नगर विकास सचिव को भी भेज दी है। 21 सितंबर को बैठक में हम स्वयं भी पहुंच रहे हैं। अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। वैसे हम 85 अंक के हकदार हैं। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने अंक कम करने का प्रयास भी किया तो 80 अंक से कम नहीं दे पाएंगे। स्मार्ट सिटी के लिए पहला हकदार मेरठ ही है।
-हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
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नगरायुक्त द्वारा तैयार कराई गई इस नई रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है कि मेरठ का दावा अब रायबरेली से और भी कहीं ज्यादा सशक्त है। अब देखना है कि 21 सितंबर को लखनऊ में होने वाली बैठक में अफसर मेरठ के काटे गए नंबरों को बढ़ाते हैं या नहीं।
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कैसे हुई ये गड़बड़ी
विगत 29 जुलाई को लखनऊ में स्मार्ट सिटी के चयन को लेकर बैठक में नगर निगम मेरठ की तरफ से दी गई रिपोर्ट में जलकल विभाग के आय-व्यय का लेखा-जोखा भी दिया गया था। उसमें आय से ज्यादा खर्च दिखाया गया था। इसमें आय 604.97 लाख जबकि व्यय दर्शाया गया था 1791.31 लाख।
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आय से कहीं ज्यादा व्यय होने के कारण चयन कमेटी ने पांच नंबर काट लिए थे। अब नगरायुक्त ने जब दोबारा से लेखा-जोखा कराया तो पता चला कि आय तो उतनी ही है, लेकिन व्यय तो 1491.64 लाख ही है। जबकि इसे गलती से 1791.31 लाख दर्शाया गया था। अब व्यय घटा है तो जाहिर है कि नंबर भी बढ़ेंगे।
माना जा रहा है कि इस नए गुणा-भाग से मेरठ नगर निगम अब 10 नंबरों का हकदार है। यदि अधिकारी 10 में से पांच नंबर भी दे देते हैं तो मेरठ का दावा वैसे ही रायबरेली से और ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
75 नहीं 85 का हकदार
स्मार्ट सिटी के लिए मेरठ 75 नहीं, 85 अंकों का हकदार है। निगम अधिकारियों की बड़ी लापरवाही ने मेरठ को स्मार्ट सिटी की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
नंबरों की इस गड़बड़ी से मेरठ-रायबरेली को 75-75 अंक थमाए गए थे। यही कारण रहा कि मेरठ को स्मार्ट सिटी के लिए स्वयं को साबित करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। शहर की जनता सड़कों पर है। जनप्रतिनिधियों को घेरा जा रहा है।
अब शासन पर निर्भर
21 सितंबर को लखनऊ में स्मार्ट सिटी को लेकर होने वाली बैठक में अगर मेरठ नगर निगम प्रशासन को अपनी सही आंकड़ेबाजी समझाने और लेखाजोखा रखने का अवसर मिला तो मजबूर होकर उप्र सरकार को मेरठ के पक्ष में ही निर्णय लेना होगा।
कोट
गत 29 जुलाई को लखनऊ में आयोजित प्रजेंटेशन के दौरान नगर निगम मेरठ द्वारा जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। उसमें जलकल विभाग की आय और व्यय का ब्यौरे में थोड़ी त्रुटि थी। जिसको अब ठीक कर लिया गया है। अगर 21 सितंबर को पक्ष रखने का अवसर मिला तो जरूर रखा जाएगा। क्योंकि मेरठ कम से कम 80 अंकों का हकदार है।
-उमेश प्रताप, नगरायुक्त।
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29 जुलाई को बैठक में तत्कालीन नगरायुक्त द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में त्रुटि थी। अब रिपोर्ट का अवलोकन किया गया तो त्रुटि सामने आ गयी। नगरायुक्त ने पूरी फाइल तैयार करा ली है। इसकी एक कॉपी हमने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और उप्र नगर विकास सचिव को भी भेज दी है। 21 सितंबर को बैठक में हम स्वयं भी पहुंच रहे हैं। अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। वैसे हम 85 अंक के हकदार हैं। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने अंक कम करने का प्रयास भी किया तो 80 अंक से कम नहीं दे पाएंगे। स्मार्ट सिटी के लिए पहला हकदार मेरठ ही है।
-हरिकांत अहलूवालिया, महापौर