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Meerut News: मौनी अमावस्या पर मौन, मंत्र और ग्रहों का भाग्यवर्द्धक महायोग
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मेरठ। जब अमावस्या की तिथि, सूर्य का तेज और ग्रहों की विशेष युति एक साथ आ जाए, तो वह दिन साधारण नहीं रह जाता। मौन की साधना, जल का स्पर्श और दान का संकल्प, ये तीनों मिलकर ऐसे दिव्य योग बनाते हैं, जो मनुष्य के कर्म और भाग्य दोनों को दिशा देते हैं। इस वर्ष 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर ग्रहों की चाल कुछ ऐसी है कि स्नान और दान करने वालों पर विशेष पुण्य वर्षा होने की शास्त्रोक्त मान्यता है। यह दिन न केवल पितरों की कृपा दिलाने वाला है, बल्कि जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला भी माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी के अनुसार अमावस्या तिथि के स्वामी पितर माने जाते हैं, इसलिए इस दिन पितर और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध करना अत्यंत शुभ होता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि मकर राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ विराजमान रहेंगे, जिससे निर्मित चतुर्ग्रही योग सभी राशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग और शिववास योग जैसे शुभ संयोग पितृ दोष निवारण, आध्यात्मिक उन्नति, धन, स्वास्थ्य और करियर में प्रगति के लिए श्रेष्ठ माने जा रहे हैं।
संगम स्नान और मौन व्रत का महत्व
प्रयागराज के संगम में मौनी अमावस्या का स्नान को विशेष पुण्यदायी माना गया है, जहां देव और पितरों का संगम माना जाता है। ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी के अनुसार इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्नान और दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना फल देता है। मान्यता है कि मौन रहकर व्रत पूर्ण करने से आत्मशुद्धि होती है और आत्ममंथन के माध्यम से साधक ईश्वर के और निकट पहुंचता है।
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दान से मिलती है ग्रह शांति
इस दिन दान का विशेष महत्व है। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मछलियों को आटे की गोलियां, चींटियों को शक्कर मिला आटा, गाय को हरा चारा और पेड़ा, कुत्ते व कौओं को रोटी तथा कबूतरों को बाजरा खिलाना शुभ है। अनाज, वस्त्र, तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, कंबल, सर्दी के वस्त्र और गौशाला में गायों के लिए दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं।
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ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी के अनुसार अमावस्या तिथि के स्वामी पितर माने जाते हैं, इसलिए इस दिन पितर और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध करना अत्यंत शुभ होता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि मकर राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ विराजमान रहेंगे, जिससे निर्मित चतुर्ग्रही योग सभी राशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग और शिववास योग जैसे शुभ संयोग पितृ दोष निवारण, आध्यात्मिक उन्नति, धन, स्वास्थ्य और करियर में प्रगति के लिए श्रेष्ठ माने जा रहे हैं।
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संगम स्नान और मौन व्रत का महत्व
प्रयागराज के संगम में मौनी अमावस्या का स्नान को विशेष पुण्यदायी माना गया है, जहां देव और पितरों का संगम माना जाता है। ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी के अनुसार इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्नान और दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना फल देता है। मान्यता है कि मौन रहकर व्रत पूर्ण करने से आत्मशुद्धि होती है और आत्ममंथन के माध्यम से साधक ईश्वर के और निकट पहुंचता है।
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दान से मिलती है ग्रह शांति
इस दिन दान का विशेष महत्व है। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मछलियों को आटे की गोलियां, चींटियों को शक्कर मिला आटा, गाय को हरा चारा और पेड़ा, कुत्ते व कौओं को रोटी तथा कबूतरों को बाजरा खिलाना शुभ है। अनाज, वस्त्र, तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, कंबल, सर्दी के वस्त्र और गौशाला में गायों के लिए दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं।