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कहीं बीमार पशुओं का मीट तो नहीं खा रहे आप 

Sat, 10 Jun 2017 02:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 10 Jun 2017 02:42 PM IST
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sick animals meat produced in front of you
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शहर में जिन पशुओं का मीट बिक रहा है, उन पशुओं की न तो स्वास्थ्य जांच हो रही है और न ही बिकने वाली दुकानों पर सफाई का ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में मीट विक्रेता खुलेआम जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। इन मीट विक्रेताओं के पास न तो नगर निगम की एनओसी है और न ही खाद्य विभाग से जारी लाइसेंस। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा बिना लाइसेंस कमेला या दुकान चलाना निषेध है। दुकान चलाने के लिए संचालक को जन स्वास्थ्य से जुड़े कई बिंदुओं को भी पूरा करना होता है। फिलहाल शहर में बिना लाइसेंस के करीब 400 दुकानों पर मीट बेचा जा रहा है। इन दुकानों पर साफ-सफाई के नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बाद भी जिला प्रशासन, खाद्य विभाग, नगर निगम और प्रदूषण विभाग चुप्पी साधे हैं। शायद प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई करने के लिए शहर में किसी बड़ी बीमारी के फैलने का इंतजार कर रहे है।  
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31 मार्च को निरस्त हो चुके लाइसेंस 
नगर निगम ने 2016 में एक साल के लिए शहर में 250 से अधिक फुटकर मीट विक्रेताओं को लाइसेंस दिए थे। यह 31 मार्च 2017 को निरस्त हो चुके हैं। वहीं प्रदेश में नई सरकार करने के बाद मीट दुकानों के लिए कुछ मानक भी निर्धारित किए गए थे। इसके बाद अवैध कमेलों पर छापेमारी हुई थी। शहर में मीट की सभी दुकानें बंद हो गयी थी। इसके बाद मीट विक्रेताओं के लाइसेंस बनाने का अधिकार खाद्य विभाग को दिया गया है। 
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बिना लाइसेंस खोल दी दुकानें 
खाद्य विभाग ने अभी तक शहर में एक भी मीट विक्रेता को लाइसेंस जारी नहीं किया है। नियमानुसार क्षेत्रीय थाना पुलिस, नगर निगम की एनओसी के बाद ही खाद्य विभाग लाइसेंस बना सकता है। कमेला संचालन के लिए प्रदूषण विभाग की एनओसी भी जरूरी है। बिना एनओसी और लाइसेंस शहर में कमेले चल रहे हैं। 
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गली मोहल्लों में काट रहे पशु 
शहर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र की गली मोहल्लों में पशुओं का अवैध कटान शुरू हो गया है। ओडियन नाले में बहने वाले पशुओं के अवशेष खून आदि इसकी सच्चाई बयां कर रहे हैं। इसके बाद भी नगर निगम प्रशासन गंभीर नहीं है। न ही जिम्मेदार अन्य विभाग। सभी विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। प्रदूषण विभाग का स्पष्ट कहना है कि अवैध कमेलों के संचालन को बंद कराने की जिम्मेदारी नगर निगम और पुलिस की है।  

मीट की दुकानों के मानक 
- मीट की दुकानें सब्जी, मछली बाजार और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री स्थल से पर्याप्त दूरी पर होनी चाहिए। 
- मीट की दुकान धार्मिक स्थल से कम से कम 50 मीटर दूर होनी चाहिए। 
- दुकान में मीट अवशेष के निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। 
- दुकान में पानी की उपलब्धता होनी चाहिए। 
- दुकान धुलाई से निकलने वाला पानी सीधे सीवर लाइन में पहुंचना चाहिए। 
- मीट की दुकान चलाने के लिए क्षेत्रीय थाना पुलिस की सहमति भी जरूरी। 
- दुकानों पर शीशा अथवा चिक पड़ी हो ताकि मीट पर गंदी मक्खी न बैठें।
- कचरा डालने के लिए दुकान पर डस्टबिन हो। 

खाद्य विभाग के पास सभी अधिकार
जब लाइसेंस जारी करने का अधिकार खाद्य विभाग के पास है तो बगैर लाइसेंस के मीट की दुकानों को बंद कराने का अधिकार भी खाद्य विभाग के पास ही होना चाहिए। कुछ बिंदुओं पर नगर निगम से एनओसी मांगी जा रही है। हम उन बिंदुओं के आधार पर एनओसी जारी कर रहे हैं। अब किसी भी स्तर पर नगर निगम जिम्मेदार नहीं रहा है।
डॉ. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी। 

सख्ती से होगी कार्रवाई 
शहर में जिन दुकानों को जिला प्रशासन से लाइसेंस जारी किया गया है, वही मीट की दुकानें नियमानुसार खुल रही हैं। यदि उसके बाद भी मीट की अवैध दुकानें खुलने का मामला है तो पुलिस सख्ती से कार्रवाई करेगी। जल्द ही ऐसी दुकानों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

एमएस चौहान, एसपी सिटी

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने छोड़ा चार्ज 
मामले में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आनंद देव से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने चार्ज छोड़ने की बात कही और मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। 
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