फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   shabdo me kranti

शब्दों में पिरो दी क्रांतिकारियों की गाथा

Tue, 24 May 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 24 May 2016 01:48 AM IST
विज्ञापन
shabdo me kranti
कंकरखेड़ा के दंपत्ति ने दिखाया किताबों में दिखा देश भक्ति का जज्बा - फोटो : अमर उजाला
 देश के लिए कुछ अलग करने का जज्बा लिए एक दंपति क्रांतिकारियों की गाथाओं को कागज के पन्नों पर उकेरने में मशगूल है। उम्र के जिस पड़ाव पर आकर लोग अक्सर स्वयं को अपने तक ही सीमित कर लेते हैं, उस उम्र में यह दंपति अब तक 65 किताबें लिख चुका है। डिफेंस एंक्लेव निवासी इस दपंति की हर पुस्तक देश भक्ति की भावना को समर्पित है।
विज्ञापन

सरधना रोड स्थित डिफेंस एंक्लेव निवासी 70 वर्षीय रामपाल सिंह रघुवीर सिंह किसान इंटर कॉलेज सिंभावली से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुए हैं। रामपाल सिंह का कहना है कि बचपन से ही उन्हें क्रांतिकारियों की जीवन गाथा पढ़ने का शौक था।
विज्ञापन

देश की आजादी के लिए हुए स्वतंत्रता आंदोलन को पढ़ने से उन्हें प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कई ऐतिहासिक स्थानों का भ्रमण कर स्वतंत्रता आंदोलन को समझने का प्रयास किया। सन् 2006 में वह अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्टब्लेयर गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहां उन्होंने सेल्युलर जेल का भ्रमण किया। जहां मात्र 5 गुणा 4 फीट की काल कोठरी देखकर उन्होंने क्रांतिकारियों के दर्द को समझा। उन्होंने अनुभाव किया कि वर्तमान में युवा पीढ़ी क्रांतिकारियों की जीवन गाथा से अपरिचित सी होती जा रही है।
इस पर उन्होंने क्रांतिकारियों के जीवन गाथा को अपने शब्दों में पिरोने का निर्णय किया। उनका कहना है कि उनके पास क्रांतिकारियों के जीवन से संबंधित लगभग 20 हजार किताबों का संग्रह है। रामपाल सिंह द्वारा लिखित प्रथम पुस्तक सजा ए काला पानी है।
इस किताब को पाठकों ने काफी पसंद किया था। उनकी एक अन्य पुस्तक जलियावाला बाग हत्याकांड को भी काफी पसंद किया गया। वह अब तक 65 किताबें लिख चुके हैं। लेखन कार्य में उनकी पत्नी विमला देवी ने भी सहयोग किया है। कई अध्याय उन्होंने भी लिखे हैं। विमला देवी का कहना है कि उन्हें अच्छा लगता है कि वह उम्र के अंतिम पड़ाव पर होने के बाद भी युवाओं को आजादी के लिए कुर्बान होने वाले क्रांतिकारियों के जीवन से परिचित कराने का प्रयास कर रहीं हैं।

हर किताब बेटे के समान
रामपाल सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे अजय चौधरी और दिग्विजय सिंह हैं। अजय एयर फोर्स में ग्रुप कैप्टन है। दिग्विजय सिंह आर्मी में ले. कर्नल है। दोनों बेटों के फोर्स में होने से वह संतुष्ट हैं, लेकिन इससे ज्यादा संतुष्टि उन्हें अपनी किताबों को देखकर होती है। उनका कहना है कि उनकी हर किताब उनके लिए एक पुत्र के बराबर है।


यह हैं प्रमुख पुस्तकें
रामपाल सिंह ने बताया कि उनकी प्रमुख पुस्तकों में सजा ए काला पानी, जलियावाला बाग हत्याकांड, क्रांतिकारी महिलाएं, इंडियन आर्मी, भारत पाक विभाजन एवं कश्मीर, प्रथम हिंदु सम्राट पृथ्वीराज चौहान, आजाद हिंद फौज, इस्लामिक आतंकवाद एवं राजनीति, अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर, अफगानिस्तान आतंकवाद की सराय, पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़, मुद्दा, क्रांतिवीर उधम सिंह आदि हैं। इन दिनों वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर नामक पुस्तक लिख रहे हैं। सेना के अफसरों ने उनके कार्य की कई बार सराहना की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed