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पुलिस ही लगा रही सरकारी तेल में ‘आग’
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 09 Sep 2016 02:32 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस महकमे में सरकारी तेल की जमकर कालाबाजारी हो रही है। पुलिस ड्राइवर थाने की जीप से लेकर पुलिस अफसरों की गाड़ियों में पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप से डीजल और पेट्रोल डलवाते हैं। उसके बाद सरकारी गाड़ी को प्राइवेट दुकान पर ले जाकर तेल बेच देते हैं।
मेरठ पुलिस के पास 128 गाड़ी और 141 फैंटम बाइक हैं। प्रदेश सरकार हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये का पुलिस को डीजल, पेट्रोल और गाड़ियों के मरम्मत के लिए देती है। पुलिस की सुविधा को देखते पुलिस लाइन परिसर में ही पेट्रोल पंप बनवाया हुआ है। जहां से पुलिस की गाड़ियों में डीजल व पेट्रोल भरा जाता है। वहीं पुलिस के ड्राइवर खुलेआम तेल की काला बाजारी कर रहे हैं। दिन निकलते ही एक के बाद एक सरकारी गाड़ियों में तेल भरवाकर पुलिसकर्मी प्राइवेट दुकान पर गाड़ी लेकर पहुंचते हैं। जहां पर गाड़ियों से तेल निकालाकर बेच दिया जाता है। इनमें थाने की गाड़ी से लेकर बंदी वाहन, गश्त की मोबाइल और पुलिस अफसरों की सरकारी गाड़ियां होती हैं। पुलिसकर्मियों की कालाबाजारी से पुलिस विभाग को हर महीने लाखों रुपये का चूना लगा रहा है। पुलिस के ड्राइवरों के साथ पुलिस लाइन के अधिकारी भी इस खेल में शामिल हैं। पुलिसकर्मियों के इस कारनामों को अमर उजाला ने कैमरे में कैद किया और उसकी वीडियो भी हमारे पास है।
ऐसा करते हैं खेल
रोजाना सुबह सात बजे से पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप से ड्राइवर सरकारी गाड़ियों में तेल लेकर मवाना बस स्टैंड समेत शहर के अलग अलग पांच जगहों पर प्राइवेट दुकान पर पहुंचते हैं। मवाना बस स्टैंड के पास एक पेट्रोल पंप है। जिसके पीछे नगर निगम की दुकानें बनी हुई है, जोकिराये पर दी हुई है। पुलिसकर्मी सरकारी गाड़ी दुकान पर लाते हैं, जिसको देखते ही दुकानदार तेल की केन और पाइप लेकर आता है। पुलिसकर्मी दुकान के बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठता है और दुकानदार सरकारी गाड़ी से तेल निकाल लेता है। उसके बाद पुलिसकर्मी गाड़ी को फिर पुलिस लाइन में लाकर खड़ी कर देता है। दिनभर शहर की कई दुकानों पर एक के बाद एक पुलिस विभाग की सरकारी गाड़ियां आकर तेल देती हैं।
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माफ कर दो, गलती हो गई
अमर उजाला टीम ने गाड़ी से तेल निकालने का खेल अपने कैमरे में कैद किया तो वहां अफरातफरी मच गई। दुकान पर काम करने वाले बच्चों ने आनन-फानन में पुलिस की गाड़ी से पाइप निकाला और तेल से भरी केन को लेकर दुकान में रखने लगे। जबकि पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। पुलिसकर्मी बोला कि गलती हो गई माफ कर दो। पुलिसकर्मी खुद ही बताने लगा कि पुलिस के सभी ड्राइवर तेल बेचते हैं।
ऑफिस में बैठे पुलिसकर्मी भी शामिल
इस कालाबाजारी में केवल पुलिस ड्राइवर ही नहीं, बल्कि पुलिस लाइन में ऑफिस में तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। ऑफिस के पुलिसकर्मी से सेटिंग के बगैर इतनी बड़ी काला बाजारी संभव नहीं। ऑफिस के पुलिसकर्मियों से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि ड्राइवरों नेे तेल चोरी के स्टिंग के बारे में उनको बताया है। इससे साफ हो गया कि ऑफिस के पुलिसकर्मी भी इस काला बाजारी में शामिल हैं। पुलिस ड्राइवर ने ऑफिस के पुलिसकर्मियों से साफ कहा कि अगर वो फंसा तो वह सबका नाम उजागर कर देगा।
मेरठ पुलिस के पास 128 गाड़ी और 141 फैंटम बाइक हैं। प्रदेश सरकार हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये का पुलिस को डीजल, पेट्रोल और गाड़ियों के मरम्मत के लिए देती है। पुलिस की सुविधा को देखते पुलिस लाइन परिसर में ही पेट्रोल पंप बनवाया हुआ है। जहां से पुलिस की गाड़ियों में डीजल व पेट्रोल भरा जाता है। वहीं पुलिस के ड्राइवर खुलेआम तेल की काला बाजारी कर रहे हैं। दिन निकलते ही एक के बाद एक सरकारी गाड़ियों में तेल भरवाकर पुलिसकर्मी प्राइवेट दुकान पर गाड़ी लेकर पहुंचते हैं। जहां पर गाड़ियों से तेल निकालाकर बेच दिया जाता है। इनमें थाने की गाड़ी से लेकर बंदी वाहन, गश्त की मोबाइल और पुलिस अफसरों की सरकारी गाड़ियां होती हैं। पुलिसकर्मियों की कालाबाजारी से पुलिस विभाग को हर महीने लाखों रुपये का चूना लगा रहा है। पुलिस के ड्राइवरों के साथ पुलिस लाइन के अधिकारी भी इस खेल में शामिल हैं। पुलिसकर्मियों के इस कारनामों को अमर उजाला ने कैमरे में कैद किया और उसकी वीडियो भी हमारे पास है।
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ऐसा करते हैं खेल
रोजाना सुबह सात बजे से पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप से ड्राइवर सरकारी गाड़ियों में तेल लेकर मवाना बस स्टैंड समेत शहर के अलग अलग पांच जगहों पर प्राइवेट दुकान पर पहुंचते हैं। मवाना बस स्टैंड के पास एक पेट्रोल पंप है। जिसके पीछे नगर निगम की दुकानें बनी हुई है, जोकिराये पर दी हुई है। पुलिसकर्मी सरकारी गाड़ी दुकान पर लाते हैं, जिसको देखते ही दुकानदार तेल की केन और पाइप लेकर आता है। पुलिसकर्मी दुकान के बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठता है और दुकानदार सरकारी गाड़ी से तेल निकाल लेता है। उसके बाद पुलिसकर्मी गाड़ी को फिर पुलिस लाइन में लाकर खड़ी कर देता है। दिनभर शहर की कई दुकानों पर एक के बाद एक पुलिस विभाग की सरकारी गाड़ियां आकर तेल देती हैं।
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माफ कर दो, गलती हो गई
अमर उजाला टीम ने गाड़ी से तेल निकालने का खेल अपने कैमरे में कैद किया तो वहां अफरातफरी मच गई। दुकान पर काम करने वाले बच्चों ने आनन-फानन में पुलिस की गाड़ी से पाइप निकाला और तेल से भरी केन को लेकर दुकान में रखने लगे। जबकि पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। पुलिसकर्मी बोला कि गलती हो गई माफ कर दो। पुलिसकर्मी खुद ही बताने लगा कि पुलिस के सभी ड्राइवर तेल बेचते हैं।
ऑफिस में बैठे पुलिसकर्मी भी शामिल
इस कालाबाजारी में केवल पुलिस ड्राइवर ही नहीं, बल्कि पुलिस लाइन में ऑफिस में तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। ऑफिस के पुलिसकर्मी से सेटिंग के बगैर इतनी बड़ी काला बाजारी संभव नहीं। ऑफिस के पुलिसकर्मियों से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि ड्राइवरों नेे तेल चोरी के स्टिंग के बारे में उनको बताया है। इससे साफ हो गया कि ऑफिस के पुलिसकर्मी भी इस काला बाजारी में शामिल हैं। पुलिस ड्राइवर ने ऑफिस के पुलिसकर्मियों से साफ कहा कि अगर वो फंसा तो वह सबका नाम उजागर कर देगा।