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जेनेरिक दवाइयों को बढ़ावा देने के लिए शासन ने निकाला नया तरीका, आमजन को ये होंगे फायदे

Sun, 09 Sep 2018 09:56 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 09 Sep 2018 09:56 AM IST
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sarkaari chikitsak likhege dava, jan aushadhi kendra se khareede
file - फोटो : amarujala
जन औषधि केंद्रों और जेनेरिक दवाइयों को बढ़ावा देने के मकसद से शासन ने अब नया तरीका निकाला है। शासन ने सभी सरकारी चिकित्सालयों को आदेश भेजे हैं कि ऐसी दवाएं जिनकी चिकित्सालय की फार्मेसी या स्टोर में उपलब्धता नहीं है, उन्हें जेनेरिक नाम से प्रेस्क्राइब किया जाए। मरीजों को यह दवाएं चिकित्सालय में स्थित जन औषधि केंद्र से खरीदे जाने की सलाह दी जाए।
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शासन का मानना है कि जेनेरिक दवाइयों की उपलब्धता के लिए यह जरूरी है कि चिकित्सालयों में तैनात चिकित्साधिकारियों द्वारा आवश्यकता पड़ने पर ब्रांडेड दवाओं के स्थान पर जेनेरिक दवाइयां लिखी जाएं। इन सस्ती दवाओं की उपलब्धता से जन सामान्य को विशेष रूप से गरीब मरीजों को अत्यधिक लाभ होगा। उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने इस संबंध में सभी जिला चिकित्सालयों के प्रमुख अधीक्षकों को आदेश देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत राजकीय चिकित्सालयों में जन औषधि केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है।

अब तक प्रदेश में 100 से ज्यादा राजकीय चिकित्सालयों में जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू हो चुका है, जिनमें जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध करा दी गई हैं। जेनेरिक दवाइयों की कीमत ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में काफी कम होती है, लिहाजा ब्रांडेड की जगह जेनेरिक दवाइयां लिखी जाएं। इस संबंध में जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि शासन के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। अस्पताल में जन औषधि केंद्र खुला हुआ है, जिससे बाहर के चिकित्सकों को दिखाने वाले भी दवाइयां खरीद सकते हैं।

दवाओं की कमी की वजह से बंद करना पड़ा था जन औषधि केंद्र
दवाइयों की कमी की वजह से 15 जुलाई को जिला अस्पताल में खोला गया जन औषधि केंद्र 31 अगस्त को बंद करना पड़ा था। मामला शासन तक पहुंचा तो फिर 170 तरह की दवाइयां उपलब्ध कराई गई, तब एक सप्ताह बाद जन औषधि केंद्र फिर से खोला गया था। हालांकि तब से यह लगातार संचालित किया जा रहा है। शुरुआत में जन औषधि केंद के लिए 700 ब्रांड की दवाओं की लिस्ट दी गई थी। लेकिन केंद्रों पर सिर्फ 20-30 ब्रांड की दवाएं दी गई थी, जिससे संचालक काफी नाराज थे।

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