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सपाइयों का आरोप, डीएम ने तोड़ा प्रोटोकाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 31 May 2017 02:17 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिलाधिकारी को ज्ञापन देने गये सपाइयों ने अब नया मुद्दा खड़ा कर दिया। उनका आरोप है कि ज्ञापन देने गए विधायक और एमएलसी से डीएम ने बैठे-बैठेे ज्ञापन लिया। जबकि प्रोटोकाल के तहत उन्हें खड़े होकर ज्ञापन लेना चाहिए था। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकार का हनन किया है। उन्होंने मामले को विधानसभा और विधान परिषद में उठाने की बात कही है।
सोमवार को सपा जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह के नेतृत्व में सपाई प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर डीएम को ज्ञापन सौंपने गये थे। राज्यपाल को संबोधित इस ज्ञापन को देने वालों में शहर विधायक रफीक अंसारी, एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल, पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद, पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान सहित करीब 40 कार्यकर्ता शामिल थे।
जिलाध्यक्ष राजपाल का आरोप है कि सभी ने डीएम को खड़े होकर ज्ञापन दिया, लेकिन वह बैठे रहे। इस पर उन्होंने डीएम से कहा कि विधायक और एमएलसी का प्रोटोकाल मुख्य सचिव से बड़ा होता है, इसलिए वह खड़े होकर ज्ञापन लें। लेकिन डीएम ने उनकी बात अनसुनी कर दी। जो कि जनप्रतिनिधियों का अपमान है और उन पर विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। राजपाल सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को सपा विधायक और एमएलसी अपने सदनों में उठाएंगे।
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यदि सांसद, विधायक, एमएलसी मुझसे मिलने आते तो निश्चित रूप से प्रोटोकाल बनता है। लेकिन वह भीड़ के साथ नारेबाजी करते हुए कार्यालय में घुसे और ज्ञापन दिया। ऐसे मेें उनकी भूमिका बदली हुई थी। इसमें प्रोटोकाल का मामला नहीं बनता है। - समीर वर्मा, जिलाधिकारी, मेरठ।
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सोमवार को सपा जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह के नेतृत्व में सपाई प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर डीएम को ज्ञापन सौंपने गये थे। राज्यपाल को संबोधित इस ज्ञापन को देने वालों में शहर विधायक रफीक अंसारी, एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल, पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद, पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान सहित करीब 40 कार्यकर्ता शामिल थे।
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जिलाध्यक्ष राजपाल का आरोप है कि सभी ने डीएम को खड़े होकर ज्ञापन दिया, लेकिन वह बैठे रहे। इस पर उन्होंने डीएम से कहा कि विधायक और एमएलसी का प्रोटोकाल मुख्य सचिव से बड़ा होता है, इसलिए वह खड़े होकर ज्ञापन लें। लेकिन डीएम ने उनकी बात अनसुनी कर दी। जो कि जनप्रतिनिधियों का अपमान है और उन पर विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। राजपाल सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को सपा विधायक और एमएलसी अपने सदनों में उठाएंगे।
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यदि सांसद, विधायक, एमएलसी मुझसे मिलने आते तो निश्चित रूप से प्रोटोकाल बनता है। लेकिन वह भीड़ के साथ नारेबाजी करते हुए कार्यालय में घुसे और ज्ञापन दिया। ऐसे मेें उनकी भूमिका बदली हुई थी। इसमें प्रोटोकाल का मामला नहीं बनता है। - समीर वर्मा, जिलाधिकारी, मेरठ।