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दो-दो बार एक मुश्त समाधान योजना लागू, लेकिन सात हजार परिवारों को नहीं मिला लाभ

Sat, 10 Dec 2016 01:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 10 Dec 2016 01:38 PM IST
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saat hazar aavaas
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार ने दो-दो बार एक मुश्त समाधान योजना लागू तो कर दी, लेकिन मेरठ में सात हजार परिवारों को इसका सही लाभ नहीं मिल पाया। कारण ये परिवार ईडब्लूएस के आवासों में रहते हैं। दरअसल इनके मूल आवंटियों ने इन्हें मकान बेच दिए थे अब ये कब्जेधारक किश्तें पूरी देकर रजिस्ट्री कराना चाह रहे हैं। उधर एमडीए नियम के तहत मूल आवंटी के ही नाम रजिस्ट्री करने पर अड़ा है। शासन ने भी इनकी समस्या के समाधान का कोई तरीका नहीं सुझाया है।
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यह है प्रकरण
मेरठ विकास प्राधिकरण ने अपनी आवासीय योजना सैनिक विहार, पल्लवपुरम, लोहियानगर, शताब्दीनगर, गंगानगर, श्रद्धापुरी तथा वेदव्यासपुरी आदि में दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए आवास बनाए थे। ये आवास किश्तों पर दिए गए थे। इनमें से काफी आवास यहां के आवंटियों ने बेच दिए। इन मकानों की पूरी किश्तें जमा नहीं थी। इसलिए रजिस्ट्री न होने पर पावर ऑफ अटार्नी के जरिए ही मकान बेचा गया। खरीदार इन आवासों की किश्तें अदा करते रहे। हालांकि काफी खरीदारों की किश्तें टूट भी गईं और उस पर भारी भरकम ब्याज भी थोपा गया पर एक मुश्त समाधान योजना में उन्हें भी लाभ मिल रहा है। सरकार ने अब फिर से 31 मार्च 2017 तक ओटीएस स्कीम लागू की है।
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कैसे हो रजिस्ट्री
इस योजना से भी इन मकानों के कब्जाधारकों की समस्या समाप्त नहीं हो पा रही है। दरअसल पूरा पैसा जमा करने पर भी एमडीए उनके नाम रजिस्ट्री नहीं करेगा। वह मूल आवंटी के नाम ही रजिस्ट्री करेगा। ऐसे में एक खतरा यह भी हो गया है कि कहीं मूल आवंटी किसी दूसरे को ही आवास न बेच दे। इन खरीदारों के पास या तो पावर ऑफ अटार्नी है या केवल सौ रुपये के स्टांप पर क्रय विक्रय पत्र। लगभग सात हजार आवंटी इस स्थिति से जूझ रहे हैं।
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शासन ने नहीं लिया संज्ञान
लोगों ने यहां जोरदार तरीके से आवाज उठाई तो एमडीए अधिकारियों ने इस बाबत शासन को प्रस्ताव भेजा। कहा कि जो इन आवासों पर लंबे समय से कब्जे दार हैं और पावर ऑफ अटार्नी होल्डर हैं उनके नाम रजिस्ट्री की जा सकती है। इस बाबत शासन ने कोई संज्ञान अभी तक नहीं लिया है। उधर ईडब्लूएस आवंटी आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। एमडीए अधिकारी कहते हैं कि शासन से कोई निर्णय आए तब समस्या का समाधान हो।
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