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सोगवारों के मातम के बीच ताजिये करबला में दफन
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 13 Oct 2016 02:37 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मोहर्रम की की दस तारीख को अब्दुल्लापुर गांव में शिया सोगवारों ने जुलुस ए ताजिया बरामद कर जंजीरों से मातम किया। मौलाना हुसैन साहब की शहादत में नौहेख्वानी के बीच देशभक्ति का जज्बा भी देखने को मिला। जुलूस में तिरंगा लहराया गया और हिंदुस्तान जिंदाबाद, आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे लगे। शहर क्षेत्र के छोटी कर्बला चौड़ा कुआं से ताजिये और जुलजुनाह का बड़ा जुलूस गमगीन माहौल में बरामद हुआ। सोगवारों के मातम के बीच ताजिये करबला में दफनाए गए।
अब्दुल्लापुर में मौलाना मेराज मेहंदी ने तकरीर में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सैनिकों की कार्रवाई की हौसला अफजाई की। बुधवार सुबह रोजे आशूर की नमाज व आमाले आशूर सभी शिया सोगवारों ने किए। दोपहर में जुलूस ए ताजिया इमामबारगाह सैयद असगर हुसैन से बरामद हुआ। गश्ती ताजिये का जुलूस मोहल्ला कोट, हंडिया, गुप्ता चौक, इमामबाड़ा बाजार से होता हुआ चौक अब्बास मोहल्ला गढ़ी पहुंचा। दोपहर नमाज ए जौहर के बाद जुलूस ए ताजिया फिर बरामद हुआ।
इसमें मुख्तार हुसैन ने मरसिया पढ़ते हुए कहा ‘अबन कासिम मेरा बाकी है न अकबर बाकी है, ना अलमदार मेरा बाकी है और असगर बाकी है, कत्ल असगर हो मेरा सर भी जुदा हो जाए, इस अमानत से भी शब्बीर अदा हो जाये।’ वहीं अब्दुल्लापुर की रहने वाली 12 वर्षीय हिंदु छात्रा मानसी ने जुलूस में मौलाना की तकरीर से पहले देश प्रेम की कविता पढ़ी। वहीं दूसरा जुलूस ए जुलजुनाह अजाखाना शाकिर महल से बरामद हुआ। जुलूस कड़ी सुरक्षा में आगे बढ़ा और ताजिये करबला में दफन किए गए। जियारत हुसैन पढ़ी गई। रोशन अब्बास, पीरू गय्यूर, मौ. अब्बास, नवाब अली, तनसीर, अम्मार, जामिन, नईम, खुर्शीद ने भी अपने कलाम से इमामे हुसैन को पुरा पेश किया। हसन मेहंदी, हाजी जफर अब्बास, सरफराज अली, रजा अहमद, नदीम, जाफर, तसद्दुक, जहूर मेहंदी, चांद हुसैन, फिरोज अब्बास, रहबर और फैज आदि मौजूद रहे।
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छोटी कर्बला घंटाघर से बड़ा जुलूस बरामद
मेरठ। मो. हैदर जावेद, इमामबारगाह इनायत हुसैन, कोटला स्थित अजाखाने से ताजिये बरामद किए। तंजीम-ए-अब्बास के साहिबे-ब्याज सफदर हिंदुस्तानी ने नौहा पढ़ा:- हुसैन जीत गये और यजीद हार गया, हुसैन ही ने नमाजों को जिंदगी दी है। दारैन जैदी, कासिफ जैदी, हिलाल आब्दी, अतीक उल हसनैन नकवी ने भी नौहेख्वानी की। संचालन अध्यक्ष डॉ. सरदार हुसैन जैदी, अंजुमन के महासचिव मो. अली जैदी ने किया। जुलूस में तिरंगा भी लहराया गया। अंजुमन के संस्थापक सैय्यद तालिब अली जैदी ने बताया कि हम यह साबित करना चाहते हैं कि धर्म के साथ-साथ अपने देश से भी उन्हें मुहब्बत है।
अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन कमर अहमद जैदी सहित एडवोकेट फजल हसनैन जैदी, खुर्शीद हैदर जैदी, अजहर रिजवी, शमशाद अली जैदी, अलहाज इफ्तिखार हुसैन जैदी हुसैनी सोगवार शामिल रहे। अंजुमन इमामिया के जावेद अली गप्पू, चांद मियां रविश, मीसम व अंजुमन दस्ताए हुसैनी के हुमायूं अब्बास ताबिश, जिया जैदी, गिजाल रजा आदि ने भी नौहें पढ़े। सोगवारों ने छुरियों से मातम किया। मातमी दस्तों ने शौहदाए कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया। जुलूस मनसबिया से घंटाघर, रेलवे रोड चौपला, ईदगाह चौराहा से होता हुआ कर्बला मनसबिया पहुंचा जहां ताजिये एवं तबर्रूकात दफन किए। शाह अब्बास सफवी, अली हैदर रिजवी, नियाज हुसैन गुड्डू, हामिद अली जमाल, हैदर अब्बास, हसन बहादुर, वसी हैदर, हसन अब्बास, रईसुल हसन, सिकंदर अब्बास, सिरोही जाफरी, गुलाम अब्बास आदि ने शिरकत की।
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अब्दुल्लापुर में मौलाना मेराज मेहंदी ने तकरीर में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सैनिकों की कार्रवाई की हौसला अफजाई की। बुधवार सुबह रोजे आशूर की नमाज व आमाले आशूर सभी शिया सोगवारों ने किए। दोपहर में जुलूस ए ताजिया इमामबारगाह सैयद असगर हुसैन से बरामद हुआ। गश्ती ताजिये का जुलूस मोहल्ला कोट, हंडिया, गुप्ता चौक, इमामबाड़ा बाजार से होता हुआ चौक अब्बास मोहल्ला गढ़ी पहुंचा। दोपहर नमाज ए जौहर के बाद जुलूस ए ताजिया फिर बरामद हुआ।
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इसमें मुख्तार हुसैन ने मरसिया पढ़ते हुए कहा ‘अबन कासिम मेरा बाकी है न अकबर बाकी है, ना अलमदार मेरा बाकी है और असगर बाकी है, कत्ल असगर हो मेरा सर भी जुदा हो जाए, इस अमानत से भी शब्बीर अदा हो जाये।’ वहीं अब्दुल्लापुर की रहने वाली 12 वर्षीय हिंदु छात्रा मानसी ने जुलूस में मौलाना की तकरीर से पहले देश प्रेम की कविता पढ़ी। वहीं दूसरा जुलूस ए जुलजुनाह अजाखाना शाकिर महल से बरामद हुआ। जुलूस कड़ी सुरक्षा में आगे बढ़ा और ताजिये करबला में दफन किए गए। जियारत हुसैन पढ़ी गई। रोशन अब्बास, पीरू गय्यूर, मौ. अब्बास, नवाब अली, तनसीर, अम्मार, जामिन, नईम, खुर्शीद ने भी अपने कलाम से इमामे हुसैन को पुरा पेश किया। हसन मेहंदी, हाजी जफर अब्बास, सरफराज अली, रजा अहमद, नदीम, जाफर, तसद्दुक, जहूर मेहंदी, चांद हुसैन, फिरोज अब्बास, रहबर और फैज आदि मौजूद रहे।
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छोटी कर्बला घंटाघर से बड़ा जुलूस बरामद
मेरठ। मो. हैदर जावेद, इमामबारगाह इनायत हुसैन, कोटला स्थित अजाखाने से ताजिये बरामद किए। तंजीम-ए-अब्बास के साहिबे-ब्याज सफदर हिंदुस्तानी ने नौहा पढ़ा:- हुसैन जीत गये और यजीद हार गया, हुसैन ही ने नमाजों को जिंदगी दी है। दारैन जैदी, कासिफ जैदी, हिलाल आब्दी, अतीक उल हसनैन नकवी ने भी नौहेख्वानी की। संचालन अध्यक्ष डॉ. सरदार हुसैन जैदी, अंजुमन के महासचिव मो. अली जैदी ने किया। जुलूस में तिरंगा भी लहराया गया। अंजुमन के संस्थापक सैय्यद तालिब अली जैदी ने बताया कि हम यह साबित करना चाहते हैं कि धर्म के साथ-साथ अपने देश से भी उन्हें मुहब्बत है।
अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन कमर अहमद जैदी सहित एडवोकेट फजल हसनैन जैदी, खुर्शीद हैदर जैदी, अजहर रिजवी, शमशाद अली जैदी, अलहाज इफ्तिखार हुसैन जैदी हुसैनी सोगवार शामिल रहे। अंजुमन इमामिया के जावेद अली गप्पू, चांद मियां रविश, मीसम व अंजुमन दस्ताए हुसैनी के हुमायूं अब्बास ताबिश, जिया जैदी, गिजाल रजा आदि ने भी नौहें पढ़े। सोगवारों ने छुरियों से मातम किया। मातमी दस्तों ने शौहदाए कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया। जुलूस मनसबिया से घंटाघर, रेलवे रोड चौपला, ईदगाह चौराहा से होता हुआ कर्बला मनसबिया पहुंचा जहां ताजिये एवं तबर्रूकात दफन किए। शाह अब्बास सफवी, अली हैदर रिजवी, नियाज हुसैन गुड्डू, हामिद अली जमाल, हैदर अब्बास, हसन बहादुर, वसी हैदर, हसन अब्बास, रईसुल हसन, सिकंदर अब्बास, सिरोही जाफरी, गुलाम अब्बास आदि ने शिरकत की।