फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   role in making history free from prejudices

इतिहास को पूर्वाग्रहों से मुक्त कराने में भूमिका निभाएं

Mon, 02 Dec 2019 02:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 02:24 AM IST
विज्ञापन
role in making history free from prejudices
मेरठ जिले के हस्तिनापुर में आयोजित भारतीय इतिहास संकलन योजना कार्यक्रम के दूसरे दिन राष्ट्रीय क - फोटो : MAWANA
हस्तिनापुर। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई। इसमें साउथ एंड साउथ ईस्ट एशिया के देशों के इतिहास एवं संस्कृति पर चर्चा की गई। यहां इतिहासविदें ने अपने-अपने प्रांत की कार्यकारिणी की उपलब्धियों की जानकारी दी। इसके बाद कार्यक्रम में भाग लेने वाले मेरठ प्रांत के पचास वालंटियरों को सम्मानित किया गया।
विज्ञापन

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के कार्यक्रम में दूसरे दिन जंबूद्वीप तीर्थ के हॉल में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें फरवरी में नव नालंदा बिहार प्रांत में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कराए जाने पर चर्चा की गई। इस अवसर पर संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बालमुकुंद पांडेय ने अगले वर्ष निर्धारित किए गए ऐतिहासिक बिंदुओं के आयोजन पर बल दिया। यहां कई योजनाएं बनाने का निर्णय भी किया गया। इसके बाद संकलन योजना के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इतिहासकार स्वर्गीय प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल के अभिनंदन ग्रंथ को स्मृति ग्रंथ के रूप में तीन बड़े खंडों में प्रकाशित कराने का निर्णय किया। वहीं, प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल एकेडमी के योगदान पर ग्रंथ प्रकाशित करने पर जोर दिया। यहां अखिल भारतीय इतिहास संकलन के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विघ्नेश कुमार त्यागी ने बताया कि आगामी पुस्तकों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने सभी केंद्रीय पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि वे संगठन में पूरी सेवाभाव के साथ कार्य करें और इतिहास को पूर्वाग्रहों से मुक्त कराने में भूमिका निभाएं। दूसरे सत्र में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के विभिन्न प्रांतों से आए इतिहासकारों ने आय-व्यय का विवरण केंद्रीय पदाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। वहीं, राष्ट्रीय साधारण सभा से अनुमोदन कराया। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बालमुकुंद पांडेय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. देवी प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफ़ेसर ईश्वर शरण, राष्ट्रीय मंत्री सुरेंद्र हंस, हिमाचल टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर एसपी बंसल एवं थाना नालंदा बिहार के कुलपति प्रोफेसर वेदनाथ लाभ मंच पर आसीन रहे।
विज्ञापन

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में स्थानीय वॉलिंटियरों को सम्मानित किया गया। संगठन महामंत्री बालमुकुंद पांडेय, ईश्वर शरण, देवी शरण आदि केंद्रीय पदाधिकारियों ने वालंटियर को बाबा साहब आप्टे का चित्र प्रदान कर सम्मानित किया। यहां देश के कोने-कोने से आए इतिहासकारों एवं जंबूद्वीप प्रबंधन कमेटी का मेरठ प्रांत के महासचिव डॉ. राजेश गर्ग ने आभार जताया।
विज्ञापन
विज्ञापन

कार्यकारिणी की उपलब्धियाें पर चर्चा
विभिन्न प्रांतों के इतिहासविदें ने कहा कि भारतीय अखिल इतिहास संकलन योजना के तहत इतिहास दिवस देश भर में मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया जाता है। जहां से इतिहासकार शोध करके प्रमाणित तथ्यों को खंगाल कर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। यहां केरल से डॉ. रत्नम, छत्तीसगढ़ से डॉ. छत्रपति, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से डॉ. जगदीश प्रसाद, महाराष्ट्र से शिल्पा वाडेकर, पुणे से चंद्रकांत तवोदास जोशी, तमिलनाडु से डॉ. सुब्रमण्यम, तेलंगाना से कृपाशंकर आदि इतिहासकारों ने द्वारा अपने-अपने प्रांतों के कार्यों पर विस्तार से चर्चा की तथा उपलब्धियां गिनाईं।
इतिहासकारों ने माना उपेक्षा का शिकार है हस्तिनापुर
हस्तिनापुर। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के तहत देश भर से आए 205 इतिहासकारों ने इतिहास के कई प्रमाणित तथ्यों पर शोध किया। उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इतिहासकारों ने यहां हस्तिनापुर नगरी में प्राचीन ऐतिहासिक तथ्यों को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर नगरी की सचमुच उपेक्षा की जा रही है।
श्रीकृष्ण सर्किट से जोड़ा जाए
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सरोज रानी ने बताया कि हस्तिनापुर महाभारतकालीन स्थान है। यहां पर पर्यटन को बढ़ावा देने के हिसाब से अभी तक सरकारों ने कोई कदम नहीं उठाया है। यहां के प्राचीन खंडहर देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हस्तिनापुर को श्रीकृष्ण सर्किट में शामिल करना होगा। वहीं, इतिहासकार शोध में लगे हुए हैं।
शोध के तथ्यों को सरकार के समक्ष रखेंगे
बीएचयू से डॉ. अनीता सिंह एवं डॉ. रश्मि सिंह ने बताया कि वे हस्तिनापुर की महाभारतकालीन उपेक्षित भूमि पर मेरठ प्रांत समिति से शोध करा रही है। जल्द ही मेरठ प्रांत समिति इन शोधित तथ्यों को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
द्रोपदी और कुंती पर शोध की जरूरत
गिन्नी देवी मोदी कॉलेज मोदीनगर की डॉ. अरुणा शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को विशेष दर्जा प्राप्त है। महाभारत काल में भी द्रोपदी, कुंती एवं गांधारी के जीवन काल पर अलग से शोध की आवश्यकता है। इस पर अखिल भारतीय संकलन योजना के तहत शोध जल्द ही शुरू किया जाएगा।
विरासत को जीवित रखना होगा
मुल्तानिया मोदी कॉलेज मोदीनगर से डॉ. कृष्णकांत शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि हस्तिनापुर से संबंधित है। इसलिए केंद्र और प्रदेश सरकार को हस्तिनापुर के पर्यटन और प्राचीन विरासत को जीवित रखने के लिए इसका विकास कराना होगा। यहां स्थित प्राचीन खंडहरों को संगृहीत कर रखना होगा।
पांडव टीले का उत्खनन जरूरी
बीएचयू की प्रोफेसर सुमन जैन ने बताया कि प्राचीन इतिहास के तथ्यों को जानने के लिए पांडव टीले पर उत्खनन कराना बहुत जरूरी है। इससे पूर्व भी यहां पर उत्खनन हुआ था। इसमें कुछ अवशेष पाए थे। इसलिए उनकी सही तिथि जानने के लिए यहां उत्खनन बहुत जरूरी है। यहां पर शोध सेंटर की स्थापना की जानी चाहिए। हस्तिनापुर कुरु वंश और पूर्व वंश के राजाओं-महाराजाओं की प्राचीन भूमि रहा है।

इतिहास से प्रेम के चलते पहुंचे रामदास
हस्तिनापुर। जिंदगी का बहुमूल्य समय देश सेवा में गुजारने के बाद बाकी समय में ग्रंथों की रचना की। इसके बाद अब देश सेवा के लिए अपने प्रांत के युवाओं को निशुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स कुरुक्षेत्र निवासी रामदास अरोड हस्तिनापुर में आयोजित अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना में शामिल हुए। उन्होंने 1969 में पंजाब यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। वह 1974 में सेना में भर्ती हो गए। उन्होंने मैकेनिक पद पर करीब दस साल सेवा की। यहां से सेवानिवृत्त होने के बाद हरियाणा पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुए। यहां से थानेदार पद से 2006 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने दर्जनों ग्रंथ लिखे। जिनमें उनके प्रमुख वीर रूर, सम्राट धज, उषा की लालिमा, आर्यव्रत एवं रोडवंश, भारत का गौरवशाली इतिहास, रोडवंश का पांच हजार वर्ष का इतिहास, विदेशियों द्वारा भारत में फैलाई गई भ्रांतियों का निराकरण आदि प्रमुख हैं। अब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के मैदान में बच्चों को निशुल्क सेना पुलिस, अर्द्धसैनिक बल का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस उम्र में उनके साहस को अन्य इतिहासकारों ने जमकर सराहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed