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जीरो अमाउंट टिकटों से लाखों का फटका
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 06 Jun 2016 02:34 AM IST
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रुपयों का लोगो।
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (रोडवेज सिटी बस) के परिचालकों ने जीरो अमाउंट टिकट से कंपनी को लाखों का चूना लगाया है। एक कर्मचारी नेता की शिकायत पर एमडी ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने नौ परिचालक और छह टिकट निरीक्षकों को हटा दिया है। मामले में विभागीय जांच चल रही है।
शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 2010 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 120 सिटी बसें दी गई थीं। राज्य के नगर विकास विभाग के हिस्से आई इन बसों के संचालन का जिम्मा रोडवेज को सौंपा है। मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड कंपनी के तहत इन बसों का संचालन शहर और नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रूटों पर किया जा रहा है। चालक और परिचालक संविदा पर रखे गए हैं। पिछले छह साल से कंपनी को लगातार घाटा हो रहा है। कंपनी के अधिकारी घाटे के लिए प्राइवेट सिटी बसों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही समाने आई है। संविदा परिचालकों ने पूरा घोटाला किया है।
लाखों रुपये का गोलमाल
बस पर चलने वाले संविदा परिचालकों को कंपनी ने इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन (ईटीएम) दी है। परिचालक ईटीएम के माध्यम से टिकट काटकर यात्री को देता है। संविदा परिचालकों द्वारा बेचे गए उन टिकटों की धनराशि ही विभाग में जमा की जाती रही जिन पर स्टापेज अमाउंट भरा गया। परिचालक यात्रियों से पैसा लेकर जीरो अमाउंट टिकट जारी करते रहे और इन टिकटों से मिली धनराशि अपनी जेब में भरते रहे। लंबे समय से चल रहे इस खेल का पता लगने पर कंपनी में हड़कंप मचा है।
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जीरो अमाउंट टिकट का नहीं लिया हिसाब
कंपनी के किसी भी कर्मचारी और अधिकारी ने ईटीएम से जारी किए गए जीरो अमाउंट टिकट का हिसाब लेने की जहमत नहीं उठाई। न ही परिचालकों से पूछा गया कि जीरो अमाउंट टिकट किस लिए जारी किए जा रहे हैं। इसके चलते परिचालकों के हौसले बढ़ते गए और फर्जीवाड़े का दायरा भी बड़ा होता गया।
टीआई से लेकर अधिकारी भी जिम्मेदार
बसों की चेकिंग के लिए टीआई (टिकट निरीक्षक) स्टाफ की तैनाती की गई है। सवारी के पास टिकट नहीं होने या फर्जी टिकट मिलने पर टीम की रिपोर्ट से परिचालक के खिलाफ विदाउट टिकट की कार्रवाई होती है। सवाल उठता है कि टीआई की फौज होने के बाद भी इतना बड़ा मामला पकड़ में कैसे नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक टीआई स्टाफ की मिलीभगत से ही यह सब हुआ है।
संयुक्त परिषद् ने उठाया मुद्दा
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् के एमसीटीएसएल शाखा अध्यक्ष विकास राणा ने भ्रष्टाचार की पर्दाफाश करने और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। मामले का शिकायती पत्र कंपनी एमडी संदीप लाहा के अलावा मंडलायुक्त आलोक सिन्हा को दिया गया है। राणा का कहना है कि परिचालकों के मार्ग पत्रों की जांच से पूरा सच उजागर हो जाएगा।
जीरो अमाउंट टिकट का मामला सामने आया है। कुछ परिचालकों ने यात्रियों से पैसा लेकर जीरो अमाउंट टिकट जारी किए हैं। मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। 9 परिचालक, 6 टीआई को हटा दिया है।
- संदीप लाहा, एमडी एमसीटीएसएल
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शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 2010 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 120 सिटी बसें दी गई थीं। राज्य के नगर विकास विभाग के हिस्से आई इन बसों के संचालन का जिम्मा रोडवेज को सौंपा है। मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड कंपनी के तहत इन बसों का संचालन शहर और नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रूटों पर किया जा रहा है। चालक और परिचालक संविदा पर रखे गए हैं। पिछले छह साल से कंपनी को लगातार घाटा हो रहा है। कंपनी के अधिकारी घाटे के लिए प्राइवेट सिटी बसों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही समाने आई है। संविदा परिचालकों ने पूरा घोटाला किया है।
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लाखों रुपये का गोलमाल
बस पर चलने वाले संविदा परिचालकों को कंपनी ने इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन (ईटीएम) दी है। परिचालक ईटीएम के माध्यम से टिकट काटकर यात्री को देता है। संविदा परिचालकों द्वारा बेचे गए उन टिकटों की धनराशि ही विभाग में जमा की जाती रही जिन पर स्टापेज अमाउंट भरा गया। परिचालक यात्रियों से पैसा लेकर जीरो अमाउंट टिकट जारी करते रहे और इन टिकटों से मिली धनराशि अपनी जेब में भरते रहे। लंबे समय से चल रहे इस खेल का पता लगने पर कंपनी में हड़कंप मचा है।
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जीरो अमाउंट टिकट का नहीं लिया हिसाब
कंपनी के किसी भी कर्मचारी और अधिकारी ने ईटीएम से जारी किए गए जीरो अमाउंट टिकट का हिसाब लेने की जहमत नहीं उठाई। न ही परिचालकों से पूछा गया कि जीरो अमाउंट टिकट किस लिए जारी किए जा रहे हैं। इसके चलते परिचालकों के हौसले बढ़ते गए और फर्जीवाड़े का दायरा भी बड़ा होता गया।
टीआई से लेकर अधिकारी भी जिम्मेदार
बसों की चेकिंग के लिए टीआई (टिकट निरीक्षक) स्टाफ की तैनाती की गई है। सवारी के पास टिकट नहीं होने या फर्जी टिकट मिलने पर टीम की रिपोर्ट से परिचालक के खिलाफ विदाउट टिकट की कार्रवाई होती है। सवाल उठता है कि टीआई की फौज होने के बाद भी इतना बड़ा मामला पकड़ में कैसे नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक टीआई स्टाफ की मिलीभगत से ही यह सब हुआ है।
संयुक्त परिषद् ने उठाया मुद्दा
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् के एमसीटीएसएल शाखा अध्यक्ष विकास राणा ने भ्रष्टाचार की पर्दाफाश करने और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। मामले का शिकायती पत्र कंपनी एमडी संदीप लाहा के अलावा मंडलायुक्त आलोक सिन्हा को दिया गया है। राणा का कहना है कि परिचालकों के मार्ग पत्रों की जांच से पूरा सच उजागर हो जाएगा।
जीरो अमाउंट टिकट का मामला सामने आया है। कुछ परिचालकों ने यात्रियों से पैसा लेकर जीरो अमाउंट टिकट जारी किए हैं। मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। 9 परिचालक, 6 टीआई को हटा दिया है।
- संदीप लाहा, एमडी एमसीटीएसएल