{"_id":"585454654f1c1be851649cd7","slug":"religious-sites-administration-building-in-kent-in-trouble","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैंट एरिया में धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर विवाद, परेशानी में आया प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैंट एरिया में धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर विवाद, परेशानी में आया प्रशासन
अनुज मित्तल/मेरठ
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:14 PM IST
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कैंट बोर्ड का लोगो।
- फोटो : अमर उजाला
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कैंट एरिया में बाउंड्री रोड पर बंगला नंबर 77 के भीतर बनाये गये धार्मिक स्थल को लेकर विवाद बन रहा है। कैंट बोर्ड ने जहां इसे अवैध निर्माण करार देेते हुए ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किया है। वहीं इस धार्मिक स्थल को तोड़ने संबंधी मेसेज सोशल मीडिया पर वायरल होने से प्रशासन परेशान हो गया है। इस संबंध में एलआईयू की रिपोर्ट पर एडीएम सिटी ने कैंट बोर्ड को पत्र लिखा, लेकिन कैंट बोर्ड के सीईओ का जवाब प्रशासन का सिर दर्द बढ़ाने वाला है।
ये है मामला
बाउंड्री रोड पर बीएसएनएल आफिस के लगभग सामने बंगला नंबर 77 है। यह बंगला रक्षा संपदा अधिकारी के रिकार्ड में शकूरन बीबी के नाम पर दर्ज है। यह भूमि बी-3 श्रेणी में है और ओल्ड ग्रांट की शर्तों पर है। इस बंगले के परिसर में अब कई परिवार रहते हैं। 2012 में छावनी परिषद के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा रिपोर्ट दी गयी कि इस बंगले के एक हिस्से में फरदीन रशीद उर्फ बॉबी पुत्र आफताब रशीद द्वारा एक हॉल का निर्माण धार्मिक स्थल के प्रयोग हेतु कराया गया है। जिसके लिए छावनी बोर्ड से स्वीकृति नहीं ली गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर छावनी परिषद द्वारा निर्माण रोकने के लिए और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जब नोटिस पर जवाब नहीं आया तो एक और नोटिस जारी किया गया।
इस नोटिस के विरोध में निर्माणकर्ता ने अपीलीय ऑथोरिटी लखनऊ में 9 अप्रैल 2012 को अपील दायर की। लंबे समय तक सुनवाई होने और अपीलकर्ता द्वारा कोई जवाब न देने व प्रस्तुत न होने पर 17 मार्च 2016 को अपील खंडित कर दी गयी। इसके बाद यह मामला 10 जून को पुन: बोर्ड बैठक में रखा गया। जहां पर तय हुआ कि निर्माणकर्ता को नोटिस जारी किया जाये कि वह सात दिन के भीतर स्वयं ही अवैध निर्माण हटा दे, अन्यथा छावनी परिषद निर्माण हटायेगी और इसके खर्चे को निर्माणकर्ता से वसूला जायेगा। यह नोटिस तीन नवंबर को जारी किया गया और 7 नवंबर को निर्माणकर्ता को तामील करा दिया गया। जिस जगह धार्मिक स्थल का निर्माण हुआ है, उस बंगले में 25-30 परिवार रहते हैं।
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सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
नोटिस के बाद इस धार्मिक स्थल को गिराये जाने को लेकर सोशल मीडिया पर मेसेज वायरल होने शुरू हो गये। एलआईयू ने डीएम को पूरे मामले पर रिपोर्ट भेजी। सूत्रों के अनुसार एलआईयू ने शहर के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लेने की बात कही है। डीएम के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी नगर मुकेश चंद ने 2 दिसंबर को छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव को पत्र लिखा और एलआईयू रिपोर्ट का भी हवाला देते हुए इस संवेदनशील मामले की जानकारी मांगी।
निर्माण गिराया जाना जरूरी : कैंट बोर्ड सीईओ
इस पत्र के जवाब में कैंट बोर्ड सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने अपर जिलाधिकारी नगर मुकेश चंद्र को पत्र लिखा और कहा कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह नियम के तहत है। न्याय हित में इस निर्माण को गिराया जाना आवश्यक है। यह पूरी कार्रवाई अवैध निर्माण के कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत है। अवैध निर्माणकर्ता धर्म की आड़ में धार्मिक भावनाओं को भड़का रहा है। मामले को सांप्रदायिक रंग देने वाले मेसेज भेजकर भाईचारा एवं सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। उसके विरुद्ध स्थानीय पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्याेंकि इस प्रकार की हरकतों से न्यायालय का आदेश मानना, वैधानिक कार्रवाई करना प्रशासन के लिए बहुत कठिन हो जाएगा।
वर्जन.....
जैसे दूसरे अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस दिया गया, वैसे ही बंगला नंबर 77 के लिए भी जारी किया गया। निर्माण गिराने के लिए पुलिस बल की मांग भी नहीं की गई है। वैधानिक कार्रवाई नियम अनुसार ही होगी।
- राजीव श्रीवास्तव, सीईओ, कैंट बोर्ड
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ये है मामला
बाउंड्री रोड पर बीएसएनएल आफिस के लगभग सामने बंगला नंबर 77 है। यह बंगला रक्षा संपदा अधिकारी के रिकार्ड में शकूरन बीबी के नाम पर दर्ज है। यह भूमि बी-3 श्रेणी में है और ओल्ड ग्रांट की शर्तों पर है। इस बंगले के परिसर में अब कई परिवार रहते हैं। 2012 में छावनी परिषद के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा रिपोर्ट दी गयी कि इस बंगले के एक हिस्से में फरदीन रशीद उर्फ बॉबी पुत्र आफताब रशीद द्वारा एक हॉल का निर्माण धार्मिक स्थल के प्रयोग हेतु कराया गया है। जिसके लिए छावनी बोर्ड से स्वीकृति नहीं ली गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर छावनी परिषद द्वारा निर्माण रोकने के लिए और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जब नोटिस पर जवाब नहीं आया तो एक और नोटिस जारी किया गया।
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इस नोटिस के विरोध में निर्माणकर्ता ने अपीलीय ऑथोरिटी लखनऊ में 9 अप्रैल 2012 को अपील दायर की। लंबे समय तक सुनवाई होने और अपीलकर्ता द्वारा कोई जवाब न देने व प्रस्तुत न होने पर 17 मार्च 2016 को अपील खंडित कर दी गयी। इसके बाद यह मामला 10 जून को पुन: बोर्ड बैठक में रखा गया। जहां पर तय हुआ कि निर्माणकर्ता को नोटिस जारी किया जाये कि वह सात दिन के भीतर स्वयं ही अवैध निर्माण हटा दे, अन्यथा छावनी परिषद निर्माण हटायेगी और इसके खर्चे को निर्माणकर्ता से वसूला जायेगा। यह नोटिस तीन नवंबर को जारी किया गया और 7 नवंबर को निर्माणकर्ता को तामील करा दिया गया। जिस जगह धार्मिक स्थल का निर्माण हुआ है, उस बंगले में 25-30 परिवार रहते हैं।
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सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
नोटिस के बाद इस धार्मिक स्थल को गिराये जाने को लेकर सोशल मीडिया पर मेसेज वायरल होने शुरू हो गये। एलआईयू ने डीएम को पूरे मामले पर रिपोर्ट भेजी। सूत्रों के अनुसार एलआईयू ने शहर के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लेने की बात कही है। डीएम के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी नगर मुकेश चंद ने 2 दिसंबर को छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव को पत्र लिखा और एलआईयू रिपोर्ट का भी हवाला देते हुए इस संवेदनशील मामले की जानकारी मांगी।
निर्माण गिराया जाना जरूरी : कैंट बोर्ड सीईओ
इस पत्र के जवाब में कैंट बोर्ड सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने अपर जिलाधिकारी नगर मुकेश चंद्र को पत्र लिखा और कहा कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह नियम के तहत है। न्याय हित में इस निर्माण को गिराया जाना आवश्यक है। यह पूरी कार्रवाई अवैध निर्माण के कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत है। अवैध निर्माणकर्ता धर्म की आड़ में धार्मिक भावनाओं को भड़का रहा है। मामले को सांप्रदायिक रंग देने वाले मेसेज भेजकर भाईचारा एवं सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। उसके विरुद्ध स्थानीय पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्याेंकि इस प्रकार की हरकतों से न्यायालय का आदेश मानना, वैधानिक कार्रवाई करना प्रशासन के लिए बहुत कठिन हो जाएगा।
वर्जन.....
जैसे दूसरे अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस दिया गया, वैसे ही बंगला नंबर 77 के लिए भी जारी किया गया। निर्माण गिराने के लिए पुलिस बल की मांग भी नहीं की गई है। वैधानिक कार्रवाई नियम अनुसार ही होगी।
- राजीव श्रीवास्तव, सीईओ, कैंट बोर्ड