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रिलायंस के नेटवर्क सिस्टम में सेंधमारी की प्लानिंग
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 02 Sep 2016 02:12 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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रिलायंस कंपनी द्वारा 4-जी की शुरूआत क्या हुई, देशभर की मोबाइल कंपनियों में भूचाल मचा हुआ है। देशभर में रिलायंस जियो के टावर लगाने का सिलसिला जारी है। इस नेटवर्किंग सिस्टम को चलाने वाली हार्डवेयर डिवाइस में सेंधमारी के पीछे बड़ी साजिश हो सकती है। विदेशी कंपनी सस्ते दाम पर करोड़ों कीमत की डिवाइस खरीदती थी। इसके पीछे विदेशी कंपनी का क्या मकसद है, इसकी जांच भी गृह मंत्रालय से कराने की बात कही गई।
आईजी मेरठ सुजीत पांडेय ने बताया कि रिलायंस कंपनी के 4-जी जियो टावर में प्रयोग होने वाले डिवाइस करोड़ों रुपये कीमत की है। इस हार्डवेयर डिवाइस को देशभर में कुछ चुनिंदा कंपनी ही बनाती है। यह डिवाइस किसी दूसरी मोबाइल कंपनी के टावर में इस्तेमाल होगी तो तत्काल रिलायंस कंपनी को पता चल जाएगा। इसकी जानकारी आरोपियों को भी थी। आरोपियों ने विदेशी कंपनी जैसे यूएसए के अमेरिका, इंग्लैंड सहित अन्य देश की कंपनियों से संपर्क कर लिया।
विदेशी कंपनियों ने आरोपियों की इस डील को स्वीकार कर लिया। विदेशी कंपनी भारत सरकार से बगैर बताए अत्याधुनिक उपकरण सस्ते दामों पर खरीद सकती है। इस बात पर गृह मंत्रालय तक सवाल उठने भी लाजिमी है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि विदेशी कंपनियों से ऑनलाइन डीलिंग होती थी। कोरियर द्वारा सामान जाता और ऑनलाइन पैसा विदेशी कंपनी उनके अकाउंट में भेजती थी। बड़ा सवाल है देश की सबसे बड़ी रिलायंस कंपनी के अत्याधुनिक उपकरण चोरी होकर बेचे जा रहे और किसी को भनक तक नहीं।
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गृह मंत्रालय से भी होगी जांच
भारत के सूचना प्रसारण विभाग को भी पुलिस ने रिलायंस कंपनी के 4-जी जियो टावर में सेंधमारी की सूचना दी है। पुलिस ने बताया कि भारत देश फैल रिलायंस कंपनी के नेटवर्किंग सिस्टम में सेंधमारी की विदेशी कंपनी की बड़ी साजिश हो सकती है। जिसके चलते इसकी जांच गृह मंत्रालय से कराने की जरूरत है। पुलिस ने इस की एक रिपोर्ट शासन को और दूसरी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी है।
रिलायंस 4-जी जियो टारगेट बने
आईजी ने बताया कि इंजीनियरिंग स्टूडेंट गैंग ने 12 नवंबर 2015 को अलीगढ़ रिलायंस जियो, 10 फरवरी 2016 को ग्वालियर और एक जून 2016 को मथुरा में रिलायंस जियो का टावर लूटा था। जहां से करीब दस करोड़ कीमत के अत्याधुनिक उपकरण कोरियर के जरिये अमेरिका और इंग्लैंड में भेजने की बात कही। मेरठ में दो रिलायंस जियो के टावर उनके निशाने पर थे। जिसमें नूरनगर रोड स्थित सरस्वती लोक रिलायंस टावर लूटने के बाद उन्हेें पल्लवपुरम में टावर लूटना था।
विदेशी कंपनी की बढ़ रही थी डिमांड
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि अमेरिका और इंग्लैंड में रिलायंस जियो के अत्याधुनिक उपकरण जाने के बाद यूएसए की अलग अलग देशों से ज्यादा डिमांड आने लगी थी। जिसके चलते इंजीनियरिंग स्टूडेंटों ने गिरोह में अन्य बदमाशों को शामिल कर लिया था। इस गिरोह में इलेक्ट्रिक, कंप्यूटर और साइबर के एक्सपर्ट लोगों की ज्यादा जोड़ा जा रहा था। गिरोह के सदस्य मोबाइल कंपनी से नौकरी छोड़ चुके बेरोजगार सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लालच देकर अपने साथ जोड़ते थे।
हर वारदात में बदलते थे गाड़ी
रिलायंस जियो कंपनी टावर पर जाने के लिए आरोपी हर बार दूसरी गाड़ी बदलते थे। आरोपियों ने बताया कि अलीगढ़ में आरोपी इनोवा से, ग्वालियर में स्विफ्ट से, मथुरा में होंडा सफारी से और मेरठ में वेगानॉर गाड़ी से आए थे। आरोपी खुद को कंपनी के बड़े अधिकारी बताकर टावर पर पहुंचते ही गाड़ी से सवाल जवाब करते और सीधे अंदर घुस जाते थे। आरोपियों ने बताया कि एक टावर लूटने के बाद वह नई गाड़ी लेते थे। जिसको वारदात में शामिल करते थे।
एक करोड़ का सामान 20 लाख में बेचते थे
प्रेसवार्ता में आरोपियों ने बताया एक करोड़ कीमत के अत्याधुनिक उपकरणों को यूएसए की कंपनी 20 लाख रुपये में खरीदती थे। एक कंपनी में करीब तीन करोड़ का सामान लूटकर करीब 60 लाख रुपये में बेच दिया है। तीन बार उपकरण भेजने के बाद यूएसए की कंपनियों ने इन सामान की डिमांड के साथ कीमत भी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि एक करोड़ का सामान अब 50 लाख रुपये में खरीदने की बात हो चुकी है। जिसके चलते आरोपियों ने रिलायंस जियो कंपनी टावर लूटने की बात चल रही है।
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आईजी मेरठ सुजीत पांडेय ने बताया कि रिलायंस कंपनी के 4-जी जियो टावर में प्रयोग होने वाले डिवाइस करोड़ों रुपये कीमत की है। इस हार्डवेयर डिवाइस को देशभर में कुछ चुनिंदा कंपनी ही बनाती है। यह डिवाइस किसी दूसरी मोबाइल कंपनी के टावर में इस्तेमाल होगी तो तत्काल रिलायंस कंपनी को पता चल जाएगा। इसकी जानकारी आरोपियों को भी थी। आरोपियों ने विदेशी कंपनी जैसे यूएसए के अमेरिका, इंग्लैंड सहित अन्य देश की कंपनियों से संपर्क कर लिया।
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विदेशी कंपनियों ने आरोपियों की इस डील को स्वीकार कर लिया। विदेशी कंपनी भारत सरकार से बगैर बताए अत्याधुनिक उपकरण सस्ते दामों पर खरीद सकती है। इस बात पर गृह मंत्रालय तक सवाल उठने भी लाजिमी है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि विदेशी कंपनियों से ऑनलाइन डीलिंग होती थी। कोरियर द्वारा सामान जाता और ऑनलाइन पैसा विदेशी कंपनी उनके अकाउंट में भेजती थी। बड़ा सवाल है देश की सबसे बड़ी रिलायंस कंपनी के अत्याधुनिक उपकरण चोरी होकर बेचे जा रहे और किसी को भनक तक नहीं।
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गृह मंत्रालय से भी होगी जांच
भारत के सूचना प्रसारण विभाग को भी पुलिस ने रिलायंस कंपनी के 4-जी जियो टावर में सेंधमारी की सूचना दी है। पुलिस ने बताया कि भारत देश फैल रिलायंस कंपनी के नेटवर्किंग सिस्टम में सेंधमारी की विदेशी कंपनी की बड़ी साजिश हो सकती है। जिसके चलते इसकी जांच गृह मंत्रालय से कराने की जरूरत है। पुलिस ने इस की एक रिपोर्ट शासन को और दूसरी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी है।
रिलायंस 4-जी जियो टारगेट बने
आईजी ने बताया कि इंजीनियरिंग स्टूडेंट गैंग ने 12 नवंबर 2015 को अलीगढ़ रिलायंस जियो, 10 फरवरी 2016 को ग्वालियर और एक जून 2016 को मथुरा में रिलायंस जियो का टावर लूटा था। जहां से करीब दस करोड़ कीमत के अत्याधुनिक उपकरण कोरियर के जरिये अमेरिका और इंग्लैंड में भेजने की बात कही। मेरठ में दो रिलायंस जियो के टावर उनके निशाने पर थे। जिसमें नूरनगर रोड स्थित सरस्वती लोक रिलायंस टावर लूटने के बाद उन्हेें पल्लवपुरम में टावर लूटना था।
विदेशी कंपनी की बढ़ रही थी डिमांड
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि अमेरिका और इंग्लैंड में रिलायंस जियो के अत्याधुनिक उपकरण जाने के बाद यूएसए की अलग अलग देशों से ज्यादा डिमांड आने लगी थी। जिसके चलते इंजीनियरिंग स्टूडेंटों ने गिरोह में अन्य बदमाशों को शामिल कर लिया था। इस गिरोह में इलेक्ट्रिक, कंप्यूटर और साइबर के एक्सपर्ट लोगों की ज्यादा जोड़ा जा रहा था। गिरोह के सदस्य मोबाइल कंपनी से नौकरी छोड़ चुके बेरोजगार सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लालच देकर अपने साथ जोड़ते थे।
हर वारदात में बदलते थे गाड़ी
रिलायंस जियो कंपनी टावर पर जाने के लिए आरोपी हर बार दूसरी गाड़ी बदलते थे। आरोपियों ने बताया कि अलीगढ़ में आरोपी इनोवा से, ग्वालियर में स्विफ्ट से, मथुरा में होंडा सफारी से और मेरठ में वेगानॉर गाड़ी से आए थे। आरोपी खुद को कंपनी के बड़े अधिकारी बताकर टावर पर पहुंचते ही गाड़ी से सवाल जवाब करते और सीधे अंदर घुस जाते थे। आरोपियों ने बताया कि एक टावर लूटने के बाद वह नई गाड़ी लेते थे। जिसको वारदात में शामिल करते थे।
एक करोड़ का सामान 20 लाख में बेचते थे
प्रेसवार्ता में आरोपियों ने बताया एक करोड़ कीमत के अत्याधुनिक उपकरणों को यूएसए की कंपनी 20 लाख रुपये में खरीदती थे। एक कंपनी में करीब तीन करोड़ का सामान लूटकर करीब 60 लाख रुपये में बेच दिया है। तीन बार उपकरण भेजने के बाद यूएसए की कंपनियों ने इन सामान की डिमांड के साथ कीमत भी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि एक करोड़ का सामान अब 50 लाख रुपये में खरीदने की बात हो चुकी है। जिसके चलते आरोपियों ने रिलायंस जियो कंपनी टावर लूटने की बात चल रही है।