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रकम डूबने के डर से धड़कने तेज, जानें पूरा मामला

Fri, 03 Feb 2017 10:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 03 Feb 2017 10:11 AM IST
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rakam doobane ke dar se dhadakane tej
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

रकम डूबने के डर से धड़कने तेज जिन्होंने इन सोशल ट्रेडिंग कंपनियों में अपने खून-पसीने की कमाई निवेश की थी। यूपी एसटीएफ द्वारा तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर और पूरा प्रकरण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे संबंधित पोस्ट और वीडियो व्हाट्स एप ग्रुप्स पर शेयर होनी शुरू हो गई। कई लोग यह पूरा प्रकरण जानने की कोशिशों में लगे रहे तो उनके चेहरों पर चिंताओं की लकीरें गहरा गईं, जो इसके शिकार हुए। शहर में माधवपुरम, शास्त्रीनगर, सिविल लाइन, गढ़ रोड सहित शहर के बड़े तबके का पैसा इन कंपनियों में लगा है। ऑनलाइन के खेल में कंपनियों का लुभावना ऑफर अब उनके लिए परेशानी का सबब बन गया।

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सरकारी एजेंसियां करेंगी जांच तेज
हर कोई जानना चाहता है कि आगे क्या होगा। अब सारे मामले की जांच सेबी, आयकर विभाग से लेकर सेंट्रल एक्साइज और उसके साथ काम करने वाली डीजीसीईआई करेगी। पहले से करीब डेढ़ दर्जन कंपनियों की फाइलों को खंगाल रही डीजीसीईआई की टीमें अब पूरा रिकॉर्ड खंगालने में लगी हैं। विभाग से जुड़े एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि अगर कारोबार 37 अरब का है तो उसने सर्विस टैक्स की भारी पैमाने पर चोरी की है, जिसके लिए कंपनी से जुड़े हर पोर्टल व एकाउंट की फाइल खंगाली जा रही है। एक-दो दिन में सारी स्थिति साफ हो जाएगी कि कितनी टैक्स चोरी हुई है।
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बाकी कंपनियां भी रडार पर
गाजियाबाद बी-166 रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी एके जैन ने डीजीसीईआई दिल्ली मुख्यालय में दर्जन भर कंपनियों की लिखित शिकायत की है। करीब 600 पेज से अधिक की शिकायत में उन्होंने नोएडा स्थित ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि सारी कंपनियां अवैध तरीके से संचालित हो रही है, क्योंकि केंद्र सरकार की तरफ से निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रही है। झूठा ऑफर देती हैं और तीन-चार महीने चलने के बाद एक कंपनी बंद हो जाती है और दूसरी को चालू कर दिया जाता है। उन्होंने तमाम कागजात संलग्न करने के साथ दावा किया कि एक लाख रुपये की सालाना टर्नओवर से संचालित दिखाने वाली कंपनियों ने तीन माह में ही 300 करोड़ से अधिक की रकम कमाई है। उन्हीं की शिकायत पर दिल्ली और मेरठ की टीमें जांच कर रही हैं। ऐसे में बाकी कंपनियां भी विभाग के रडार पर हैं। हालांकि कार्रवाई के मामले में यूपी एसटीएफ बाजी मार गई। सूत्र बताते हैं कि उससे कहीं ज्यादा बड़ी कार्रवाई जल्द ही डीजीसीईआई द्वारा होने वाली है।

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