फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Protein in pulses reduced due to polluted water, 40 km area affected in 12 areas of Meerut district.

खुलासा: प्रदूषित पानी से घट गया दालों में प्रोटीन, मेरठ जिले के 12 क्षेत्रों में 40 किलोमीटर का इलाका प्रभावित

Sat, 07 Oct 2023 05:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा नीरज वर्मा, मेरठ
नीरज वर्मा, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 07 Oct 2023 05:16 AM IST
सार

प्रदूषित भूजल से स्वास्थ्य के लिए जरूरी दालों की भी सेहत बिगड़ रही है। 12 से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में दालों में प्रोटीन की मात्रा पांच से 10 फीसदी तक कम हो गई है।

विज्ञापन
Protein in pulses reduced due to polluted water, 40 km area affected in 12 areas of Meerut district.
demo pic...

विस्तार

मेरठ जिले में हस्तिनापुर-गढ़-सरधना के 40 किलोमीटर क्षेत्र का भूजल अब पीने योग्य नहीं है। इससे इंसान में कैंसर, किडनी, हृदय संबंधी गंभीर रोग बढ़ रहे हैं। प्रदूषित भूजल से स्वास्थ्य के लिए जरूरी दालों की भी सेहत बिगड़ रही है। 12 से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में दालों में प्रोटीन की मात्रा पांच से 10 फीसदी तक कम हो गई है। दालें प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। कई जगह तो आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्लांट से भी पीने योग्य पानी नहीं मिल रहा है। इसकी वजह भूजल में कैडमियम, मरकरी, जिंक, हैवी मैटल जैसे तत्वों की मात्रा तय मानकों से कहीं अधिक है।

विज्ञापन


चौधरी चरणसिंह विवि (सीसीएसयू) के वनस्पति विज्ञान विभाग में हुए शोध में यह खुलासा हुआ है। विभाग के प्रोफेसर ईश्वर सिंह के निर्देशन में चंचल गौतम ने ‘स्टडीज ऑन ग्राउंड वाटर पाॅल्युशन एंड इज इंपैक्ट ऑन सम लैम्युन क्रॉप प्लांट्स’ पर शोध किया है। इसके लिए हस्तिनापुर, सरधना, दौराला, कंकरखेड़ा, परतापुर, मंगल पांडेय नगर, सीसीएसयू परिसर, जागृति विहार, शास्त्रीनगर, गोकुलनगर, भावनपुर, गांव सैनी, उलखपुर, देदवा, किठौर और गढ़ के अलग-अलग 10 से 12 क्षेत्रों से भूगर्भ जल के नमूने लेकर जांच की गई। बताया गया है कि शोध दो साल चल रहा था। अब इसके परिणाम सामने आए हैं।
विज्ञापन


शोध के अनुसार हस्तिनापुर, सरधना, दौराला, जागृति विहार, शास्त्रीनगर, भावनपुर, उलकपुर के भूगर्भ जल में फ्लोराइड, आरसेनिक, मरकरी, मैग्नीज, कोबाल्ट, जिंक, लैड, कॉपर, टीडीएस (टोटल डिजाल्व सॉलिड), टीएच (टोटल हार्डनेश), बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड), सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) आदि खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यदि यही हालात रहे तो आने वाले समय में यहां का पानी परतापुर, कंकरखेड़ा, गोकुलपुर, सैनी गांव, देरवा, मंगल पांडेय नगर, किठौर की तरह सर्वाधिक प्रदूषित भूजल होगा। आरओ प्लांट से फिल्टर करने के बाद भी यह पानी पीने योग्य नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए खतरनाक हुआ भूजल
चंचल गौतम ने बताया कि इन क्षेत्रों के भूजल में कैडमियम 0.01 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) की जगह 63 पीपीएम, मरकरी 0.001 पीपीएम की जगह 9.35 पीपीएम, जिंक 5 पीपीएम की जगह 18.4 पीपीएम, लैड 0.01 पीपीएम की जगह 30.47 पीपीएम और हैवी मैटल 52.60 पीपीएम तक पाया गया है। खतरनाक हो चुके भूजल से कैंसर, किडनी, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारी होने की काफी संभावना है। 


प्रो. ईश्वर सिंह ने बताया कि दूषित हो चुके भूगर्भ की वजह से कई इलाकों में दालों की सेहत बुरी तरह से गड़बड़ा गई है। यहां पैदा होने वाली दाल में प्रोटीन की मात्रा पांच से 10 फीसदी तक कम हुई है। गरीब, मध्यमवर्गीय और शाकाहारी लोगों के लिए प्रचुर मात्रा में प्रॉटीन का स्रोत दालें ही हैं। दालों (मूंग, मसूर, लोबिया आदि) में प्रोटीन की मात्रा कम होना चिंता का विषय है। प्रो. ईश्वर ने बताया कि कम प्रदूषण वाले और चिह्नित इलाकों में पैदा हुई दाल की लैब में जांच की गई। जिन इलाकों का भूजल कम प्रदूषित था, वहां की दाल में बेहतर थी जबकि अधिक प्रदूषित भूजल वाले क्षेत्र में 10 फीसदी तक प्रोटीन की मात्रा कम मिली है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed