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प्रतिकर के बदले भूखंड न दिए जाने से आक्रोशित हैं किसान

Thu, 19 May 2016 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 19 May 2016 02:28 AM IST
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pratikar ke badle
एमडीए में धरना देते किसान - फोटो : अमर उजाला
 प्रतिकर के बदले भूखंड दिए जाने की कार्रवाई सात माह बाद भी शुरू न होने से गुस्साए किसानों ने बुधवार को एमडीए कार्यालय पर जबरदस्त हंगामा कर दिया। सैकड़ों किसानों ने मेन गेट पर ट्रैैक्टर-ट्रालियां खड़ी कर अधिकारियों को बंधक बना लिया। वहीं महिला किसानों ने कार्यालयों में चूल्हे सुलगा दिए। पूरे कार्यालय में धुआं भरने से अधिकारी बिलबिला गए। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने कहा कि जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी तब तक धरना जारी रहेगा।
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गंगानगर, लोहियानगर और वेदव्यासपुरी के किसानों के साथ प्रतिकर के बदले विकसित कर भूखंड दिए जाने को लेकर एमडीए का समझौता हो चुका है। 11 नवंबर 2015 को बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से समझौते को हरी झंडी दे दी गई थी।
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किसानों के मुताबिक प्रत्येक किसान का लेखा-जोखा एमडीए कर्मचारियों को कंप्यूटर पर तैयार करना था और काम शुरू करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान अपनी फाइलें जमा करा चुके हैं। कार्रवाई न होने से आक्रोशित तीन योजनाओं के किसानों ने बुधवार को अनोखे अंदाज में ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन की शुरुआत कर दी।
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बुधवार सुबह करीब साढ़े दस बजे 15 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर आए सैकड़ों महिला पुरुष किसानों ने सभी गेट बंद कर तंबू लगा दिया। ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी कर मेन गेट बंद कर दिया। महिला किसानों ने दफ्तरों, गैलरी और हॉल में चूल्हे जलाकर खाना बनाया।
दफ्तरों में धुआं भरने से अधिकारी और कर्मचारी बिलबिला गए। सूचना पर थाना सिविल लाइन पुलिस पहुंची और किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने मांग पूरी न होने तक आंदोलन बंद करने से इनकार कर दिया। \
इस मौके पर सत्यपाल सिंह, हरविंदर सिंह, सिद्धार्थ शर्मा, सुरेंद्र भड़ाना, रणधारा सिंह, पोपीन प्रधान, विक्रांत, अशफाक, किरणपाल, तोफाराम, चंदन, संतरपाल, महिपाल, प्रहलाद, सचिन, जागेश्वरी देवी, सरला, ममता, सरोज आदि मौजूद रहे।

भीड़ देख गार्ड भी पीछे हटे
गेट पर किसानों की ट्रैक्टर ट्रालियों की कतार देखकर यहां तैनात गार्डों ने भी विरोध की कोशिश नहीं की। किसानों ने तत्काल तंबू ठोक दिए। इसके बाद अपने साथ लाए पंखे भी चालू कर दिए। किसानों ने परिसर में भट्ठियों पर खाना बनाना शुरू कर दिया।

महिला ब्रिगेड ने किया परिसर पर कब्जा
इस बार के आंदोलन में महिला किसानों ने खास रणनीति तैयार की है। बाहर पार्क में किसानों ने भट्ठी सुलगाकर भोजन बनाना शुरू कर दिया तो अंदर महिला किसानों ने आधा दर्जन चूल्हे सुलगा दिए। महिलाओं ने किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को बाहर नहीं आने दिया।

नहीं पहुंचे अधिकारी
जिस समय आंदोलन शुरू हुआ वीसी और सचिव कार्यालय में नहीं थे। इसके बाद चीफ इंजीनियर एपी सिंह ने किसानों से बात की कि वे खुद सचिव अश्वनी कुमार शर्मा को किसानों के बीच लेने जा रहे है। इस पर किसानों ने उन्हें जाने दिया, लेकिन वे किसानों को गच्चा दे गए। वे न तो खुद आए और न ही सचिव को लाए। शाम तक अधिकारी केवल फोेन पर ही बात करते रहे। किसी भी अधिकारी की किसानों की बीच जाने की हिम्मत नहीं हुई। ऐसे में किसानों ने ऐलान कर दिया कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा धरना जारी रहेगा।

भिड़ गए किसान और एमडीए कर्मचारी
दफ्तरों में धुआं भरने पर एमडीए कर्मचारी बाहर की तरफ भागे तो किसानों ने दरवाजे पर ताला लगाने की कोशिश की। इस पर दोनों आमने सामने आ गए। कर्मचारी नेता सुशील त्यागी और किसानों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। सुशील ने कहा कि किसान अपना आंदोलन करें पर उन्हें बंधक तो न बनाएं। किसानों ने भी कहा कि उनकी मर्जी के बिना बाहर कोई  नहीं जाएगा। बाद में किसी तरह पुलिस ने बीच बचाव कर मामला शांत किया। हालांकि किसान संघर्ष समिति महामंत्री हरविंदर सिंह के मुताबिक उन्होंने पीछे का एक गेट कर्मचारियों के लिए खुला छोड़ा था।

हरिवंदर के मकान का नक्शा जांचने पहुंची एमडीए टीम
समस्या का निदान करने की बजाय एमडीए अधिकारी बदले की भावना से काम करने में लग गए। बुधवार को जैसे ही धरना शुरू हुआ तो एमडीए एई आरके गुप्ता आदि किसान नेता हरविंदर सिंह के थापरनगर में बने आवास का नक्शा जांचने पहुंच गए। हरविंदर के मुताबिक प्राधिकरण का गठन सन 1976 में हुआ, जबकि उन्होंने 1972 में ही प्राधिकृत अधिकारी से नक्शा मंजूर करा लिया था। उस समय प्राधिकृत अधिकारी एडीएम प्रशासन मुन्ना अग्रवाल थे और उन्हाेंने ही यह नक्शा स्वीकृत किया था। किसानों के मुताबिक एमडीए यह दबाव की रणनीति न ही अपनाए तो अच्छा है।

यह है किसानों की मांगे
- एक पखवाड़े में तीनों योजनाओं के किसानों के हिसाब किताब का ब्योरा तैयार कर प्राधिकरण लिखित में सूचित करे।
- प्रत्येक योजना में किसानों को दी जाने वाली जमीन आरक्षित कर उस पर बोर्ड लगाया जाए। यह काम एक सप्ताह में हो।
- प्राधिकरण स्तर से देरी की अवधि का ब्याज भुगतान के दिनांक तक किसानों को दिया जाए।

किसानों के खिलाफ तहरीर
आंदोलन कर रहे किसानों के खिलाफ देर शाम थाना सिविल लाइन में तहरीर दी गई। मेंटीनेंस का काम काज देख रहे अवर अभियंता शिवकुमार की तरफ से दी गई तहरीर में कहा गया है कि किसानों के इस कृत्य से जानमाल और सरकारी दस्तावेजों की हानि हो सकती है। खास तौर पर चूल्हे जलाने से धुआं हुआ जिससे एमडीए कर्मियों को परेशानी हुई। सरकारी काम में बाधा पड़ी। आशंका जताई है कि इससे न केवल सर्वर उड़ सकता है बल्कि यदि जरा भी चिंगारी लगी तो भारी नुकसान हो सकता है। सचिव अश्वनी कुमार ने बताया इस बाबत वीसी के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है।


डीएम के लिए 15 लाख का ही चेक दे दो
धरने के दौरान किसानों ने कहा कि उन्होंने इस रकम में से जिलाधिकारी कोष में 15 लाख रुपये जमा करने का ऐलान कर रखा है। कम से कम 15 लाख रुपये का ही चेक काट दो ताकि डीएम कोष में जमा कराया जा सके।
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