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2019 का फार्मूला तलाश रहा महागठबंधन, सियासी भूचाल में बदल गई भाकियू की किसान क्रांति यात्रा

Thu, 04 Oct 2018 11:32 AM IST
मदन बालियान , अमर उजाला, बागपत
मदन बालियान , अमर उजाला, बागपत Updated Thu, 04 Oct 2018 11:32 AM IST
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political parties seeks 2019 formula for Maha gathbandhan Bhakiyu Kisan Kranti yatra
किसान क्रांति यात्रा - फोटो : अमर उजाला

किसान क्रांति यात्रा के बाद अब राजनीतिक दल सियासी फार्मूला तलाशने में जुटे गए हैं। रालोद, सपा, कांग्रेस और बसपा ने भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया से लेकर गांव गली तक किसानों को यूपी बॉर्डर पर रोके जाने की ही चर्चा है। किसानों के बीच पहुंचे रालोद अध्यक्ष अजित सिंह के प्रति किसानों का रूख नरम दिखा है। बीमारी से सहानुभूति की लहर भी चली।

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ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों को चुनाव से पहले किसानों के मुद्दों पर मंथन करना पड़ेगा। हरिद्वार से किसान क्रांति यात्रा अराजनैतिक भाकियू ने शुरू जरूर की थी, लेकिन दिल्ली की सीमा तक पहुंचते-पहुंचते यह सियासी भूचाल में परिवर्तित हो गई। सीएम योगी आदित्य नाथ खुद किसानों से बात करने पहुंचे। केंद्र सरकार के मंत्रियों ने डेरा डाला और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने खुद भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत से बातचीत कर किसी तरह समाधान निकाला।
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किसान क्रांति यात्रा के नतीजों के नाम पर भले ही किसानों के हाथ खाली हो, लेकिन किसान समस्याओं पर जागरूकता का बिगुल बज गया है। नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, ऐसे में इस बार गन्ने और बकाया भुगतान को लेकर किसान सड़कों पर उतर सकते हैं।विपक्ष महागठबंधन का खाका तैयार करने में जुटा हुआ है। यही वजह है कि जैसे ही यूपी बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ तो विपक्ष के सभी राजनीतिक दल हरकत में आए।

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मुजफ्फरनगर दंगे के बाद लोगों के बीच पहुंचने से चूक गए रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने इस बार कोई देरी नहीं की।  किसानों के बीच पहुंचे और समर्थन दिया। बीमारी के कारण उन्हें लौटना पड़ा। किसान लॉबी में उनके प्रति सहानभूति की लहर भी चली। सपा और कांग्रेस भी  पीछे नहीं रही।

बुधवार को हुई बसपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला और सरकार के रवैये को गलत बताया। किसान क्रांति यात्रा में शामिल किसान पुलिस से मुकाबला कर किसी तरह किसान घाट पहुंचे और अब अपने घर लौट गए हैं। लेकिन अब सियासी तीर शुरू हो गए हैं।

विपक्ष भाजपा को कठघरे में खड़ा करने के लिए तमाम सवाल खड़े कर रहा है। लेकिन अब देखने वाली बात यह होगी कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में किसानों की नाराजगी का नतीजा क्या होगा। रालोद को कितना लाभ होगा। इतना तय है कि चुनाव के मुद्दों और चुनाव की रैलियों में किसान क्रांति यात्रा और यूपी बॉर्डर पर पड़ी लाठियों की आवाज भी बार-बार सुनाई देती रहेगी।

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