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फर्जी कागज तैयार कर लोन पर निकालते थे वाहन, तीन गिरफ्तार, पांच लग्जरी कारें बरामद

Wed, 06 Mar 2019 03:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 06 Mar 2019 03:33 PM IST
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Police arrested three accused for who were buying vehicles on  loan fake documents
arrest - फोटो : अमर उजाला
यूपी के मेरठ में टीपीनगर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो फर्जी कागजातों के सहारे पहले बैंक से फाइनेंस पर कार निकालते थे और बाद में उसे बेचकर रफूचक्कर हो जाया करते थे। पकड़े गये लोगों की निशानदेही पर पुलिस ने पांच लग्जरी कारें भी बरामद की हैं। पुलिस अब इस गिरोह का नेटवर्क खंगालने में जुटी है। चार आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही हैं। 
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पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक और एसपी सिटी एएन सिंह ने बताया कि सोमवार को टीपीनगर पुलिस को सूचना मिली कि फर्जी कागजातों से लोन कराकर निकाली गईं कुछ गाड़ियों का सौदा क्षेत्र में होने जा रहा है। यह एक अंतरराज्यीय गिरोह है, जो अब तक काफी गाड़ियां इसी तरह ठिकाने लगाकर बैंकों को करोड़ों का चूना लगा चुका है।

पुलिस ने सूचना पर कार्रवाई शुरु की और घेराबंदी करते हुए मलियाना बंबा पूंठ तिराहे से तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। उनके पास से पुलिस ने दो लग्जरी गाड़ियां भी पुलिस ने कब्जे में लीं और थाने आ गई। थाने में तीनों युवकों ने अपने नाम गजेंद्र पुत्र ब्रजपाल सिंह निवासी महेंद्रा एंक्लेव शास्त्रीनगर, थाना कविनगर, गाजियाबाद, प्रदीप कपासिया पुत्र सुखवीर सिंह निवासी नूर नगर लिसाड़ीगेट थाना ब्रह्मपुरी मेरठ और विनित श्रीवास्तव पुत्र सतीश चंद श्रीवास्तव निवासी कैलाशपुरम थाना कविनगर, गाजियाबाद बताए। सख्ती से पूछताछ में तीनों युवकों ने इस गोरखधंधे का सज उगल दिया। इसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर तीन लग्जरी गाड़ियां और बरामद कर लीं। 
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ऐसे करते थे वारदात 
सीओ ब्रह्मपुरी संजीव देशवाल के अनुसार यह गिरोह ऐसे लोगों की तलाश में रहता था जो सीधे-साधे होते थे या फिर अन्य राज्यों से आकर यहां बहुत कम समय के लिए रहते थे। उनके कागज लेकर कार लोन के लिए लगा दिए जाते थे।

लोन होने के बाद यह उस शख्स को 20-30 हजार रुपये देकर वहां से भेज देते थे। बाद में एनओसी जारी कराकर यह उस कार को मनमाने दामों पर बेचकर पैसा हजम कर जाते थे। इसमें कंकरखेड़ा निवासी राहुल का नाम सामने आया है जो एनओसी तैयार करता था।

कई जगह फैला नेटवर्क
टीपीनगर पुलिस ने पांच लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। यह सभी गाड़ियां गाजियाबाद स्थित तीन निजी बैंकों से ही फाइनेंस कराई गई थीं। एक साथ पांच गाड़ियां बरामद होने के बाद पुलिस इस गिरोह के गाजियाबाद में सक्रिय होने की संभावना जता रही है। 
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रिटायर्ड कांस्टेबल का बेटा सक्रिय 
पुलिस गिरफ्त में आया गजेंद्र नाम का शख्स रिटायर्ड कांस्टेबल का बेटा है। यह इस गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जो पहले भी कई वारदातों में शामिल रहा है। गिरोह के फरार अन्य साथियों में अजय दूबे पुत्र कोशल दूबे निवासी चिरंजीवी बिहार शास्त्रीनगर गाजियाबाद, पंकज भाटी पुत्र पवन सिंह निवासी सौजना रानी ऊंचा गांव थाना आहार जनपद बुलंदशहर, विक्की उर्फ करन पुत्र इंद्राज सिंह निवासी चिरंजीवी बिहार रेलवे लाइन थाना कविनगर गाजियाबाद, पवन गुर्जर पुत्र श्यौराज सिंह निवासी नूरनगर निकट राष्ट्रीय इंटर कॉलेज लिसाड़ी रोड थाना ब्रह्मपुरी मेरठ हैं। 

बैंकों की मिली भगत बिना संभव नहीं
आमतौर पर अगर कोई साधारण आदमी बैंक से लोन लेने जाता है तो उसे एक कठिन प्रक्रिया झेलनी होती है। आवेदक की बैकग्राउंड जानने के अलावा घर तक का वैरीफिकेशन होता है। कई-कई बार वैरीफिकेशन किया जाता है, ताकि वास्तविक आवेदक को ही लोन दिया जाए।

एसपी क्राइम के अनुसार यह गिरोह काफी समय से गाजियाबाद में सक्रिय रहकर इस गोरखधंधे को अंजाम देता आ रहा था। ऐसे में बैंकों की मिलीभगत के बिना इस गोरखधंधे को अंजाम देना संभव नही है। पुलिस अब बैंको की भूमिका भी जानने में जुटी है। 

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